लिपस्टिक अंडर माई बुर्का की अभिनेत्री अहाना कुमरा ने बताया कि किस तरह से बॉलीवुड काम करता है. उन्होंने कहा,  “महिलाओं को अपने अधिकारों का एहसास नहीं है, खासकर फिल्म उद्योग में.  आपके अधिकार क्या हैं? यह तथ्य है कि आपके पास एक ज़बान है और आप इसका उपयोग करके ना कह सकते हैं. आप भूमिकाओं के लिए नहीं कह सकते हैं. हम हिंदी फिल्म उद्योग में हर किसी को इतनी आसानी से नाराज़ करते हैं क्योंकि यह आदमियों का क्लब है. वह मुंबई में SheThePeople.TV के ऑनलाइन सेफ्टी समिट में बोल रही थी.

डिजिटल क्रांति जो महिलाओं को आवाज़ दे रहा है, उसके बारे में बोलते हुये उन्होंने कहा, “अचानक सभी को अपनी आवाज मिल रही है और यह बहुत अच्छा है. हमें इस तथ्य को अपने बारे में स्वीकार कर लेना चाहिए कि डिजिटल स्पेस बहुत सी चीजों को पारदर्शी बनाने जा रहा है.”

वार्तालापों और बातचीत की मुख्यधारा में ऑनलाइन सुरक्षा रखना महत्वपूर्ण है और सेफ्टी समिट ऐसा ही करता है – नई सुरक्षा चुनौतियां, फेक़ न्यूज़, डेटा गोपनीयता, तकनीक और युवा और डिजिटल फुटप्रिंटस् चुनौतियों और समाधान.

फिल्म सेट पर यौन उत्पीड़न के बारे में अभिनेत्री तनुश्री दत्ता के मामलें पर, कुमरा ने कहा कि नाम लेने के लिए बहुत हिम्मत की जरुरत होती है. लेकिन उन्होंने यह भी बताया कि बॉलीवुड में उत्पीड़न के खिलाफ महिलाओं की एकता क्यों नहीं हो सकती है.

“ऐसे कई उदाहरण हैं जहां मैं फिल्म मीटिंग्स के लिए गई हूं और लोगों ने पूरी तरह से अनुचित प्रश्न पूछे जैसे ‘क्या आपका  बॉयफ्रेंड है?’ इसमें मेरी फिल्मोग्राफी या शिक्षा आदि से कोई लेना देना नहीं है. मुझे डर था. और कहीं आप भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि हर बैठकों में लोग केवल ऐसे ही प्रश्न पूछ रहे होते हैं और यह काम पाने का एकमात्र तरीका है! यदि आप अकेले हैं, और यदि आप उपलब्ध हैं और आप उनके साथ बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हैं. हम ऐसे पुरुषों के क्लब में क्यों रह रहे हैं? “

“ऐसे कई उदाहरण हैं जहां मैं फिल्म मीटिंग्स के लिए गई हूं और लोगों ने पूरी तरह से अनुचित प्रश्न पूछे जैसे ‘क्या आपका  बॉयफ्रेंड है?’ इसमें मेरी फिल्मोग्राफी या शिक्षा आदि से कोई लेना देना नहीं है. मुझे डर था. और कहीं आप भ्रमित हो जाते हैं क्योंकि हर बैठकों में लोग केवल ऐसे ही प्रश्न पूछ रहे होते हैं और यह काम पाने का एकमात्र तरीका है! यदि आप अकेले हैं, और यदि आप उपलब्ध हैं और आप उनके साथ बिस्तर पर जाने के लिए तैयार हैं. हम ऐसे पुरुषों के क्लब में क्यों रह रहे हैं? ”

उन्होंने बताया कि महिलाओं को यौन उत्पीड़न के खिलाफ बोलना कितना मुश्किल है, क्योंकि कई महिलाएं हिंदी फिल्म उद्योग में अपनी गरिमा को अपने माता-पिता के सामने रख कर आती हैं और सफल कैरियर बनाना चाहती हैं.

कुमरा ने देश की महिला कलाकारों के बारे में बात करते हुये कहा, “महिलाओं के लिए यह एकमात्र तरीका है कि वह कहें ‘मैंने अभिनेत्री बनने का फैसला किया और मैं अपनी पसंद को ही चुन रही हूं. और यह वह निर्णय है जिसके ज़रिये में अपनी जिंदगी चलाउंगी.’ यह एक बड़ा निर्णय है, खासकर भारत में महिलाओं के लिए. ”

अपने अभिनय से हैरान करने वाली इस अभिनेत्री ने बॉलीवुड के बारे में काफी कुछ बताया, साथ ही उन्होंने उद्योग में महिला कलाकारों की दुर्दशा के बारे में भी कहा कि अगर वह भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ कुछ बोलना भी चाहती है तो पुरुषों के वर्चस्व की वजह से कुछ भी नही बोल पाती है.