अब जबकि कश्मीर में खेल में युवा प्रतिभाओँ को पोषित करने का काम किया जा रहा, इसके बावजूद वह समाज अभी भी काफी पारंपरिक है. आज भी, शॉर्ट्स पहने हुए और ‘लड़कों’ का खेल खेलना पूरी तरह स्वीकार्य नहीं है. 23 साल की इरतिका अयूब ने कहा,”मुझे उसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा जैसे कि कोई भी कश्मीरी लड़की को अलग तरह का काम करने पर करना पड़ता है. मेरे माता-पिता पहले मुझे सहयोग करने के लिये तैयार नही थे लेकिन मुझे मिले कुछ पदकों ने उनकी राय बदल दी. वर्तमान में, मेरे माता-पिता मेरी इच्छा का समर्थन करते हैं. मैं एक वरिष्ठ खिलाड़ी और रग्बी विकास अधिकारी हूं.” वह इस तथ्य के बारे में बताती है कि वह एक ऐसे खेल को खेल रही है जो कुछ साल पहले तक कश्मीर में मौजूद नहीं था. मिलियें कश्मीर की रग्बी स्टार इरतिका अयूब से

SheThePeople.TV ने इरतिका अयूब से बात की ताकि रग्बी के लिए उनके जुनून के बारे में पता चलें और किस तरह की चुनौतियों का सामना उन्हें करना पड़ रहा है. उनके साथ लिये गये साक्षात्कार के कुछ संपादित अंश.

Irtiqa Ayoub, Kashmir’s Rugby player

इरतिका ने राज्य स्तर पर सात स्वर्ण पदक जीते हैं और सात जिला स्तर पर जीते हैं. उन्होंने 2016 और 2017 में रग्बी 7 में रजत पदक जीता और 2017 में स्नो रग्बी में स्वर्ण पदक जीता.

वह जम्मू-कश्मीर में सबसे कम उम्र की रग्बी विकास अधिकारी (आरडीओ) हैं  और उन्होंने सैकड़ों स्कूल और कॉलेज के बच्चों को भी प्रशिक्षित किया है.

वह कहती हैं, “सबसे पहले मैं फुटबॉल खेलती थी और मैं अपनी उम्र के लड़कों के साथ खेलती थी. मैं पिछले 7 सालों से खेलों में हूं. ”

हाल ही में, इरतिका को ‘एमिनेन्स अवॉर्ड्स’  से सम्मानित किया गया, जो कश्मीर घाटी में युवाओं को दिया जाने वाला एक सम्मान है.

इरतिका कहती है, “स्कूल में मैं कई तरह के खेल खेला करती थी जिसकी वजह से मुझे अच्छा लगता था. फुटबॉल, खो-खो, बैडमिंटन, वॉलीबॉल या क्रिकेट – आप जिसे बोलें, मैंने इस सब को सीखा था. फिर स्कूल में एक दिन मैंने अपने शिक्षक के आग्रह के कारण, रग्बी गेम में भाग लिया जो तब तक मुझे नहीं पता था कि कैसे आगे जाउं. मैं संकोच कर रही थी, मैंने यह भी नहीं देखा था कि गेंद कैसी दिखती है. जब स्कूल के शिक्षक ने हमें प्रोत्साहित किया, तो मैंने एक कोशिश करने का फैसला की. मैं रुक गई,  सीखा, और कामयाब हुई.”

धीरे-धीरे उन्हें पदक के साथ सराहना मिलने लगी और वह स्थानीय लोगों के लिए एक जानी पहचानी चेहरा बन गयी. हालांकि, एक खेल खेलने का विचार उनके परिवार को अच्छा नही लगा.

“मेरे पिता गर्व महसूस करते थे जब उन्होंने पत्रिकाओं और टेलीविजन में मेरी तस्वीरें देखीं.”

Irtiqa Ayoub, Kashmir’s Rugby player

वह कहती है, “यह स्कूल टूर्नामेंट के साथ शुरू हुआ. तब मैं राष्ट्रीय में जाने लगी. लेकिन जब मैंने अपनी नाक तुड़वाली तो मेरे परिवार ने मुझसे असहमत होना शुरू कर दिया.”

कोच ने कहा, “ मैं और जानने के लिए उत्सुक हूं. मैंने शुरू होने के बाद से एक लंबा सफर तय किया है लेकिन यह सिर्फ शुरुआत है. कश्मीर में आपको जो गुंजाइश और प्रतिभा मिलती है वह मजबूत है. लड़कियों को रग्बी खेलों की गतिविधियों के लिए मनाने की कोशिश करती हूं, मेरा मानना है कि हम हर खेल में कश्मीरियों की बड़ी प्रतिभा है. कोच ने सलाह दी कि हमें सिर्फ अपने आप में विश्वास करने और खेल में राज्य के भविष्य को सही करने के लिए कड़ी मेहनत करने की जरूरत है.

इरतिका का मानना है कि लड़कियों और महिलाओं को स्वतंत्र महसूस करना चाहिए और वे चाहती हैं कि वे किसी भी खेल में शामिल हों.  “मेरा परिवार मुझ पर विश्वास करता है और मेरे पिता शेख मोहम्मद मेरी प्रेरणा है.”

सहायक संस्कृति और राज्य सहायता

उन्होंने कहा, “कई कारणों से राज्य में लड़कियों को कोई मौका नहीं दिया जा रहा है लेकिन अब आपके सपने पूरे करने के लिये कई प्लेटफॉर्म हैं.  जम्मू-कश्मीर खेल परिषद, युवा लोगों के लिए विभिन्न कार्यक्रमों और गतिविधियों का आयोजन करती है. वे आने वाली महिला खिलाड़ियों का ध्यान पाने की कोशिश करते हैं और उन्हें नई किट और गियर प्रदान करते हैं. वे सुनिश्चित करते हैं कि हर लड़की को हर खेल खेलना पड़ेगा. ”

आलोचना स्वीकार करना किसी भी यात्रा का एक बड़ा हिस्सा है

इरतिका इस बारे में निडरता से बात करती है कि देश में युवा लड़कियों को कैसे अधिकार दिया जाना चाहिए और पसंद की आजादी दी जानी चाहिए. उनकी उपलब्धियां और रूप कभी-कभी सह-खिलाड़ियों को ईर्ष्या देता हैं और यह इरतिका को परेशान करता है.

वह दावा करती है, “समाज खेल का एक हिस्सा है लेकिन मुझे नहीं लगता कि वह मुझे प्रभावित करेगा. जिन लड़कियों में प्रतिभा है और प्रतिबद्ध हैं उन्हें खेल खेलना चाहिए, लेकिन माता-पिता का सहयोग मिलना बहुत जरुरी है. मुझे लगता है कि आलोचना स्वीकार करना किसी भी यात्रा का एक बड़ा हिस्सा है. वह आपको लक्ष्य के प्रति प्रेरित करता है.