अरुणिमा सिन्हा अपने आप में ही एक अलग पहचान है ,उन्होंने इतनी कम उम्र में विकलांग होते हुए भी पर्वतारोहण में अपना मुकाम बनाया। उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी।

माइनस 45 से 40 डिग्री सेल्सियस के बर्फीले मौसम में थोड़ी सी ऑक्सीजन के सहारे इतना बड़ा इतिहास रचना कोई आसान काम नहीं है।अंटार्टिका की सबसे ऊँची चोटी माउंट विन्सन पर मौत से लड़ते हुए तिरंगा फहराना बहुत ही सराहनीय है। अरुणिमा ने यह ज़बरदस्त रिकॉर्ड गुरूवार को  12 बजकर 27 मिनट पर अपने नाम किया।उन्होंने यह ज़बरदस्त यात्रा एक कृत्रिम पैर के सहारे तय की।

“प्रतीक्षा खत्म हो गई है, हम आपके साथ साझा करते हुए  खुश हैं। विश्व रिकॉर्ड  विश्व की पहली महिला एंप्टी, जो माउंट विंसन (अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी) पर चढ़ी थी, हमारे देश भारत के नाम हो गई। सभी को उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद और जय हिंद” – अरुणिमा सिन्हा

अरुणिमा सिन्हा, एक  भारतीय पर्वतारोही हैं, जो 2013 में माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली महिला एंप्टी थी, अब माउंट विंसन (अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी) पर चढ़ने वाली पहली महिला एंप्यूटि बन गई है।

उत्तर प्रदेश की बहादुर बेटी अरुणिमा ने अपने पर्वतारोहण में करियर की शुरुआत एक जज़बर्दस्त हादसे के बाद अपना एक पैर  खोकर  पर्वतारोही के रूप में की । उन्होंने अनेको पर्वतो की चढ़ाई की और साबित किया की ऐसा कोई काम नहीं है जो वह न कर सकती हो । उन्होंने यह अविश्वसनीय वर्ल्ड रिकॉर्ड बहुत ही जद्दोजहत, अडिग विश्वास और असराहनीय महनत के सहारे हासिल किया है ।

अरुणिमा को बधाई देते हुए, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट किया: “बहुत बढ़िया! अरुणिमा सिन्हा को सफलता की नई ऊंचाइयों को बढ़ाने के लिए बधाई। वह भारत का गौरव हैं, जिन्होंने अपनी मेहनत और लगन से खुद को साबित किया है। उनके  भविष्य के लिए उन्हें शुभकामनाएँ। ”

गुरुवार को अरुणिमा ने ट्विटर पर अपनी सफलता की जानकारी दी। “प्रतीक्षा खत्म हो गई है, हम आपके साथ साझा करते हुए  खुश हैं। विश्व रिकॉर्ड  विश्व की पहली महिला एंप्टी, जो माउंट विंसन (अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी) पर चढ़ी थी, हमारे देश भारत के नाम हो गई। सभी को उनके आशीर्वाद के लिए धन्यवाद और जय हिंद , ” उन्होंने कहा।

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