एमसी मैरी कॉम ने देश को एक फिर से गर्वित होने का अवसर दिया है। उनकी छठी विश्व खिताब की जीत ने उन्हें विश्व का नंबर एक बॉक्सर बना दिया है। साथ ही, इस महीने की शुरुआत में ही वे फेमिना मैगज़ीन के कवर पेज पर नज़र आयी थीं।

अपने दो दशकों के जगमगाते करियर में मैरी कॉम ने जब नवंबर में पिछले ही वर्ष 48 किलो की श्रेणी में दिल्ली में सम्मान प्राप्त किया, तब वह वर्ल्ड चैंपियनशिप के इतिहास में विश्व की सबसे सफल बॉक्सर बन उभर के आयीं थीं। उन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स, इंडिया ओपन बॉक्सिंग टूर्नामेंट, और अब वर्ल्ड चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में खिताब जीते हैं।

एआईबीए ने अपनी अपडेट की गयी रैंकिंग में मैरी कॉम को 1700 अंकों के भार विभाजन से नंबर एक स्थान पर रखा है।

वर्ष 2012 में मैरी कॉम ओलंपिक प्रतियोगिता में किसी मैडल को जीतने वाली पहली महिला बॉक्सर बनीं थीं। और अब 36 वर्षीय मैरी कॉम अपने वर्ष 2020 में होने ओलंपिक के सपने को देख रही हैं। उनकी मेहनत दिन-प्रतिदिन कड़ी भी होती जा रही है।

ऐतिहासिक जीत

पिछले ही वर्ष मैरी कॉम ने अपनी छठी विश्व चैंपियनशिप को जीत कर एक इतिहास रच दिया था। उन्हें ओलंपिक प्रतियोगिता में एक सिल्वर मैडल हासिल है। इसके साथ ही एशियाई खेलों में वह गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं। 36 वर्षीय मैरी कॉम ने केटी टेलर की पांच खिताबों की गिनती को पीछे छोड़ दिया है और अब वे क्यूबा की फेलिक्स सैवन की बराबरी कर चुकी हैं। वह पुरुष और महिलाएं दोनों को मिलाकर विश्व चैंपियनशिप के इतिहास की अब सबसे सफल बॉक्सर बन गयी हैं। किसी भी महिला ने आज तक इस तरह का इतिहास नहीं रचा है।

रिटायरमेंट पर जवाब

कुछ समय पहले ये अफवाहें थीं कि मैरी कॉम के रिटायरमेंट लेने की सम्भावना है। लेकिन मैरी ने आगे आकर इन सभी बातों को साफ़ कर दिया।

“मैंने कभी भी रिटायरमेंट के बारे में बात नहीं की, यह सिर्फ अफवाहें हैं। मैं खुद आश्चर्यचकित हो गयी जब मैंने यह बात सुनी”। – मैरी कॉम

मैरी कॉम तीन बच्चों की माता है और हाल ही में हुए खेलों में उन्होंने एक महत्वपूर्ण पात्र निभाया है। उन्होंने 2016 के रिओ ओलंपिक्स की निराशा को जड़ से ख़तम कर दिया है। साफ़ तौर पर, अब उन्होंने वर्ष 2020 में होने वाले टोक्यो ओलंपिक्स को अपने मस्तिष्क में केंद्रित कर लिया है, जो उनका जीवन का सपना है।

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