हमारे समय की सबसे पसंदीदा और प्रसिद्ध गुड़िया इस वर्ष साठ साल की हो गयी है लेकिन आज भी यह धीमी होने का कोई संकेत नहीं दे रही है। हम में से काफी लोग यह मानने से इंकार करेंगे कि किस तरह से बार्बी ने हमेशा एक प्लास्टिक परफेक्ट ब्यूटी का प्रतिनितिध्व किया है। लेकिन यह भी सच है कि एक निश्चित आयु की लड़कियां किसी और डॉल के ऊपर बार्बी को ही चुनेंगी।

मैटल द्वारा लांच की गयी बार्बी विभिन्न जातियों, शरीर के आकार, आदि को दर्शाती हैं। यह डॉल अब केवल भौतिकवादी और भव्य जीवन शैली अपनाने के बारे में नहीं है।

जब से 9 मार्च, 1959 में अमेरिकन टॉय फेयर में बार्बी ने अपना डेब्यू किया हैं तबसे एक बिलियन से ज्यादा बार्बी डॉल्स बिक चुकी हैं। यह गिनती काफी चौंका देने वाली हैं क्यूंकि खिलौने एक सीजन में ही पुराने हो जाते हैं। कोई भी डॉल आज तक बार्बी जितनी प्रमुख नहीं हो पायी है।

यह हमे एहसास दिलाता है कि बार्बी सिर्फ एक डॉल नहीं है, एक ब्रांड है, जिसे बहुत बेहतरीन तरह से प्रबंधित किया गया है। मैटल को बार्बी के चलते काफी विवादों का सामना करना पड़ा है। इसे एक अवास्तविक शारीरिक छवि को उजागर करने के लिए आरोपित किया गया था। बार्बी, डॉल्स के बीच में ही नहीं बल्कि लड़कियों और महिलाओं के बीच एक सौंदर्य मानक बन गयी। चाहे बात उसकी कमर की हो या उसकी त्वचा से लेकर उसके बालों की, किसी भी डॉल ने बार्बी की तरह सौंदर्य उद्द्योग की कल्पना नहीं की। निर्मातों को विविधता की कमी के कारण और भौतिकता दर्शाने के लिए काफी बार लताड़ा भी गया था।

यह लड़कियों को यह सोचने पर मज़बूर करता है कि जब वे बड़ी होंगी तो वे एक ड्रीम हाउस में रहने के अलावा क्या करना चाहेंगी।

लेकिन, मैटल ने हमारी सारी चिंताओं को संज्ञान में लिया और अपनी डॉल्स की विविधता की सीमा को बढ़ाया। उन्होंने अलग-अलग जातियों को दर्शाने वाली और अनेक रंग-रूप वाली बार्बी डॉल्स का निर्माण किया। आज बार्बी के 130 से ऊपर करियर हैं। वह एक अंतरिक्ष यात्री, रेस कार ड्राइवर, शिक्षक, सर्जन, आर्मी मेडिक, यूनाइटेड स्टेट्स की राष्ट्रपति, रैपर, आदि से भी काफी ज्यादा है। पिछ्ले ही वर्ष, मैटल ने रोबोटिक्स इंजीनियर बार्बी को लांच किया था। यह उन्होंने कार्यक्षेत्र पर विविधता की वकालत करते हुए किया था। कुछ लोगों के लिए बार्बी एक तैयार होने वाले और पूल पार्टी वाले खेल की तरह है, तो कुछ के लिए यह काम-क़ाज़ी महिलाओं को बदलते समय के साथ दर्शाने में सफल हुई है।

यह लेख पहले यामिनी पुस्तके भालेराव ने अंग्रेजी में लिखा था।

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