मुझे लेखन से प्यार क्यों है? या फिर क्यों मेरे लिए लेखन एक खूबसूरत-सा एहसास है? यह प्रश्न बड़ा सरल जान पड़ता है लेकिन उतना ही कठिन भी है। क्यूंकि इसका उत्तर मेरे जीवन के आंतरिक स्तरों से सम्बन्ध रखता है। और इसी कारण संक्षेप में या कुछ वाक्यों में इसे बांधना आसान नहीं है। हाँ, लेकिन लिखना मुझे सशक्त करता है और शायद यह एक महत्वपूर्ण कारण है जिसकी वजह से मैं लिखती हूँ लेकिन लिखना सशक्त क्यों करता है यह प्रश्न भी दूसरा है और इसके जवाब भी अलग हैं। 

स्वयं की अंदरूनी विवशता को पहचानना

लिखना मुझे सशक्त करता है क्यूंकि लिखने के बाद मैं उस अंदरूनी विवशता को पहचान पाती हूँ जिसके कारण मैं लिखना शुरू करती हूँ और लिखने के बाद उससे मुक्त हो जाती हूँ। कभीकभी कुछ बाहर की विवशताएं भी इस अंदरूनी विवशता को उत्पन्न कर देती हैं जैसे आर्थिक आवश्यकता  लेकिन इस विवशता का मुझे सम्पूर्ण रूप से शक्तिशाली बनाने मे एक महत्वपूर्ण योगदान रहता है। 

कुछ ख्यातियों से मिलने वाली प्रेरणा

कभीकभी लिखने के लिए किसी तरह की प्रेरणा की आवश्यकता होती है, तो कभी लिखने से मिलने वाले उस सम्मान या ख्याति से प्रेरणा मिलती है। यह प्रेरणा सिर्फ मुझे ही नहीं बल्कि हर व्यक्ति को सशक्त करने मे सक्षम है। इस प्रेरणा से मन को संतुष्टि मिलती है और लिखने मे आनंद भी आता है। 

अनुभव से अनुभूति का एहसास

अनुभव घटित होता है और अनुभूति उस कल्पना को उत्पन्न कर देती है जो व्यक्ति सिर्फ किसी दृश्य को मात्र देखने से नहीं महसूस कर सकता। किसी दृश्य को देखकर प्रत्यक्ष अनुभव होता है पर अनुभूति एक गहरी चीज़ है जो लिखने से प्राप्त होती है। यह अनुभूति मुझे सम्पूर्ण रूप से सशक्त करती है और मुझे किसी भी दृश्य का वर्णन करने की क्षमता देती है। 

जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है लेखन

मैं एक नारी हूँ और आज भी नारी को अपने हक़ के लिए लड़ना पड़ता है। महिला सशक्तिकरण आज की जरुरत है और हर महिला को सशक्त होने के लिए किसी प्रकार के यंत्र की जरुरत हो सकती है। मेरे लिए लेखन ही अपने आप मे सबसे बड़ा यंत्र है।

इन सभी कारणों की वजह से लिखना एक खूबसूरतसा एहसास है जो सशक्त करने के साथसाथ मेरे ज्ञान को भरपूर रूप से बढ़ाता है। मैं अपने विचारों को स्वयं सही से समझ पाती हूँ और उन्हें किसी के भी सामने रखने मे गर्व महसूस करती हूँ।

 

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