जितना इंतज़ार कोई व्यक्ति कॉलेज लाइफ का करता है, उतनी ही उम्मीद हॉस्टल लाइफ की भी ज़रूर रहती है। लड़कियों को कॉलेज के साथ-साथ अगर गर्ल्स हॉस्टल भी मिल जाये, तो समझिये जैसे सोने पे सुहागा हो गया हो। हॉस्टल और कॉलेज की यादें आगे चल कर जैसे हमारी सभी यादों की बुनियाद बन जाती हैं। गर्ल्स हॉस्टल में रहना काफी मज़ेदार होता है। चाहे आप किसी भी स्वभाव की हों या कितनी ही अलग क्यों न हों, हॉस्टल में रहने वाले सभी लोग जैसे एक दूसरे के रंग में ढंग ही जाते हैं। आईये कुछ ऐसी चीज़ों को देखते हैं जिनका अनुभव सिर्फ एक हॉस्टल लाइफ के जरिये ही हो सकता है।

देर रात तक गपशप करने का मज़ा

यह तो मानना ही पड़ेगा की देर रात तक गपशप करने का अनुभव हमे हॉस्टल लाइफ में ही मिल सकता है। लड़कियों को तो वैसे भी “गॉसिप क्वींस” कहा जाता है और लड़कियां ही नहीं बल्कि लड़के भी इस उपाधि का इस्तमाल अपनी हॉस्टल लाइफ में जमकर करते हैं। लेकिन सिर्फ गपशप में ही लड़कियों की वार्तालाप सिमट कर नहीं रह जाती है। हम इस प्रक्रिया के दौरान एक-दूसरे के साथ समय बिताने का अवसर पाते हैं जो हमे उन्हें और उनके स्वभाव से परिचित करवाता है। इतना ही नहीं, यह सारी गपशप भरी बातें हमे एक-दूसरे के और नज़दीक लाती हैं।

फैशन की दुनिया से रूबरू होने का अवसर

अब यह कोई माने या न माने लेकिन हॉस्टल लाइफ में जैसे हॉस्टल के कमरे अधिकतर ट्रायल रूम बने रहते हैं। लड़कियां एक-दूसरे की ड्रेसेस पहनना और नयी-नयी ड्रेसेस ट्राई करना बेहद पसंद करती हैं। खाली समय में काफी बार वो इसी तरह से अपने समय का उपयोग करती हैं। बात चाहे फैशन टिप्स से लेकर मेकअप की क्यों न हो, लड़कियों एक दूसरे के साथ हॉस्टल लाइफ के सौभाग्य से इतना समय व्यतीत कर लेती हैं कि उन्हें जैसे इस क्षेत्र में महारत हासिल हो जाती है।

गर्ल्स हॉस्टल में एक-दूसरे के साथ रहकर और परेशानियों और सुख-दुख के समय एक-दूसरे का सहारा बनकर हम स्वयं में एकजुट महसूस करते हैं। हम एक साथ कई चीज़ों के संज्ञान में होते हैं जो कुल मिलाकर हमें ज्ञान से परिपूर्ण कर देता है।

स्वतंत्र और सक्षम बनने का मौका

यह सच है कि जब तक हम अपने माता-पिता की छत्र-छाया में रहते हैं तब तक हमारे ऊपर जिम्मेदारियां नहीं आती। लेकिन जैसे ही हम हॉस्टल और कॉलेज लाइफ की ओर कदम बढ़ाते हैं, वैसे ही हमे खुद को जिम्मेदार बनाने की ज़रूरत होती है। लेकिन उसके साथ ही हमें अपने निर्णय लेने की छूट भी होती है। हॉस्टल लाइफ में मज़ा भी जमकर आता है और हम खुद का व्यक्तिगत विकास भी कर पाते हैं। अपने सभी काम हम खुद के बल-बुते पर करते हैं और यह सब हमें स्वतंत्र और सक्षम बनाने में मदद करता है।

नयी चीज़ों को सीखने का अवसर

हॉस्टल लाइफ में हम जितने मज़े करते हैं, उतनी ही नयी चीज़ें भी सीखते हैं। फिर चाहे वह व्यव्हार और संचार कौशल में वृद्धि करने की बात हो या नयी संस्कृति, भाषाएं, और खान-पान को जानने की बात हो। एक-दूसरे के साथ रहकर और परेशानियों और सुख-दुख के समय एक-दूसरे का सहारा बनकर हम स्वयं में एकजुट महसूस करते हैं। हम एक साथ कई चीज़ों के संज्ञान में होते हैं जो कुल मिलाकर हमें ज्ञान से परिपूर्ण कर देता है। अगर इन सभी चीज़ों का सारांश निकला जाये तो हॉस्टल लाइफ हमारे मज़े, उत्साह, और विकास का एक ऐसा घोल तैयार करती है जिसे हम जीवन भर सराह सकते हैं।

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