लड़कियां भी ट्रेवल करना उतना ही पसंद करती हैं जितना की कोई और करता है। या यूँ कह लीजिये कि हर उम्र, हर वर्ग, और हर तरह के व्यक्ति को ट्रेवल करना पसंद होता है। लेकिन लड़कियां अकेले अपनी सहेलियों के साथ ट्रेवल करें , यह आज भी लोगों को थोड़ा अटपटा सा लगता है। चाहे जो भी हो, लड़कियों के लिए ट्रेवल करना ज़रूरी भी है और उन्हें इस बात की पूर्ण आज़ादी भी घर-परिवार द्वारा दी जानी चाहिए। आइये कुछ ऐसे कारणों को देखते हैं जो यह सिद्ध करेंगे की लड़कियों के लिए ट्रेवल करना क्यों महत्वपूर्ण है।

लड़कियों के बीच एकता को मज़बूत करता है

यह सच की जब भी हम किसी व्यक्ति के साथ समय व्यतीत करते हैं, तो हमे एक-दूसरे के बारे में काफी जानने को मिलता है। यदि कुछ लड़कियों का समूह किसी आउटिंग पर जाये, तो यह समय भी किसी न किसी रूप में यादगार जरूर बन जाता है। और इन सब चीज़ों के बीच एक नया बल हम सभी के भीतर आ जाता है। उस बल का नाम एकता है जिसकी वजह से हमारे मित्रों से हमारे सम्बन्ध गहरे होते हैं। ख़ास तौर पर, अगर सम्बन्ध गहरे हों तो हम लोगों से काफी करीब तरह से लम्बे समय तक जुड़े रहते हैं।

नयी चीज़ों को सीखने का और उनकी खोज करने का अवसर

इसमें कोई शक नहीं है कि जब हम ट्रेवल करने के लिए निकलते हैं तो कुछ न कुछ नया तो ज़रूर देखते या सीखते हैं। नयी-नयी जगहों पर जाने से हमे नए अनुभव मिलते हैं। मान लीजिये की दो व्यक्तियों को किसी जगह के बारे में भरपूर ज्ञान है। लेकिन उच्च हाथ वार्तालाप में उसी व्यक्ति का होगा जो उस जगह पर स्वयं जा चुका है। इसलिए ट्रेवल करना हमारी नयी खोजों और जानकारियों के लिए हर चीज़ के मुकाबले एक बेहतर इंग्रीडिएंट साबित होता है।

पुरानी मानसिकता में बदलाव की उम्मीद

देखा जाये तो लोग आज भी रूढ़िवादियों के चलते लड़कियों पर पाबंदियां लगाते हैं। इस मानसिकता को तो समाज में हर आने वाले बदलाव की तरह कब का बदल जाना चाहिए। कह लीजिये कि विचार धारा में बदलाव आना इतना आसान नहीं है।

लोग सुरक्षा का बहाना देकर लड़कियों को घर से बाहर जाने से रोक देते हैं जो बिलकुल गलत है। लेकिन, जब लड़कियां बाहर ट्रेवल करने के लिए जाती हैं और अपने मित्रों के साथ समय बिताती हैं तो उसे देखकर यह उम्मीद की जा सकती है की जो लोग इस विचार से सहमत नहीं हैं, वे अपनी मानसिकता को भी समाज के बदलते नियमों के साथ बदलने का प्रयास करेंगे।

रिफ्रेश होने का बेस्ट उपाय

अपनी सहेलियों के साथ ट्रेवल करना तो अलग है लेकिन उनके नाम से ही हमारे चेहरे खिल उठते हैं। ट्रेवल करना पूर्ण रूप से हमे तारो-ताज़ा करने के लिए काफी है। अगर हमे तनाव से दूर जाना है या कुछ वक़्त अपनी सहेलियों के साथ बिताना है, तो कहीं बहार जाकर घूमने-फिरने से बेहतर उपाय शायद नहीं होगा। इसलिए ज़रूरी है कि हम अपनी व्यस्त दिनचर्या में से कुछ समय खुद के लिए और अपनी सहेलियों के लिए भी निकालें।

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