मधुर भंडारकर बॉलीवुड फिल्मों का निर्देशन करने वाले एक जाने-माने निर्देशक है। उन्होंने जैसे बॉलीवुड की फिल्मों को एक नया रूप दे दिया है। अगर आपने गौर किया हो तो यह ज़रूर देखा होगा कि मधुर भंडारकर की फ़िल्में ज्यादातर महिला केंद्रित होती हैं। वैसे उन्होंने इसका कारण भी दिया है। उनके मुताबिक फिल्मों के दौरान वे पुरुष कलाकारों के नखरे नहीं सह पाते हैं और इसलिए वे अपनी फिल्मों में महिलाओं को ही दर्शाते हैं।

मधुर भंडारकर मेरे कुछ पसंदीदा निर्देशकों में से एक हैं क्यूंकि उनकी फ़िल्में हमेशा किसी-न-किसी वास्तविकता को दर्शाती हैं जिससे रूबरू होना दर्शकों के लिए काफी ज़रूरी है। आईये उनकी पांच महिला केंद्रित फिल्मों की चर्चा करते हैं।

हीरोइन

भंडारकर की यह फिल्म सिनेमा उद्योग में महिलाओं के संघर्ष को दिखाती है। इस फिल्म में करीना कपूर खान लीड रोल में हैं। दर्शकों को हांलांकि दूर से देखने में ऐसा लगता है जैसे बॉलीवुड में सिर्फ परिवाद और नाम चलता है। लेकिन ऐसा नहीं है। और इसी वास्तविकता को मधुर भंडारकर ने अपनी इस फिल्म में दर्शाने का प्रयास किया है। आज तक हमने ऐसी कितनी फ़िल्में देखीं हैं जिसमे किसी छिपी हुई सच्चाई का वर्णन किया गया हो? लेकिन मधुर भंडारकर ने इन सभी चीज़ों को काफी खूबसूरती से दिखाया है।

इन्दु सरकार

हर राजनैतिक फिल्म की तरह भंडारकार की यह फिल्म भी विवादों की चपेट में आ गयी थी। इस फिल्म में वह समय दर्शाया था जब भारत में आपातकालीन लागू हुआ था। लगभग सभी राजनैतिक पार्टियां इस चर्चा में जुट गयीं थीं। लेकिन फिर भंडारकर ने यह साफ़ किया कि यह इंदिरा गाँधी की आत्मकथा नहीं है। इस फिल्म में उन्होंने कृति कुल्हरी को लीड रोल में दर्शाया था। यह फिल्म पूरी तरह से लीड रोल के इर्द-गिर्द बनायी गयी थी।

फैशन

इस फिल्म में दो दिग्गज अभिनेत्रियां कंगना रनौत और प्रियंका चोपड़ा लीड रोल्स में थीं। यह फिल्म फैशन उद्योग की वास्तविकता दिखाने में काफी कामयाब रही थी। यहां पर चकाचौंद के अंदर की दुनिया को मधुर भंडारकर ने बखूबी दिखाया है। संघर्ष, प्रतियोगिता, आदि भावों का यह फिल्म एक सही मिश्रण थी।

पेज 3

इस फिल्म को “नेशनल फिल्म अवार्ड फॉर बेस्ट फीचर” की श्रेणी में अवार्ड प्राप्त हुआ था। कोंकना सेन शर्मा यहां पर एक पत्रकार के किरदार में हैं। वे अपना बीट पेज 3 रिपोटिंग से बदलकर किसी गंभीर क्षेत्र में करना चाहती हैं। लेकिन बहुत संघर्षों के बाद भी उन्हें सफलता नहीं मिलती है। यह फिल्म साथ ही लैंगिक असमानता के मुद्दे को भी उजागर करती है।

कैलेंडर गर्ल्स

इस फिल्म में कुल 5 अभिनेत्रियां लीड रोल में हैं जो कैलेंडर गर्ल बनने का ख्वाब देखती हैं। वे सभी किसी-न-किसी बाधाओं को पार कर इस क्षेत्र में आ पातीं हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि संघर्ष का कोई निर्धारित समय नहीं होता और किसी को भी, किसी भी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। फिल्म में बहुत काबिलियत से 5 अभिनेत्रियों के जरिये कुछ पांच कहानियों को लोगों तक पहुंचाया गया है। यह फिल्म महिला केंद्रित है और पूर्ण रूप से कई सन्देश देने में कामयाब भी है।

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