फॉर्च्यून १००० कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सीईओ में 94 प्रतिशत सीईओ पुरुष हैं. यह न ही गर्व महसूस करने वाली बात हैं, न ही कोई समानता का संकेत हैं. कुशल होने के बावज़ूद महिलाओं को अवसर के लिए ज़्यादा परिश्रम और ज़्यादा इंतज़ार करना पड़ता है. एक स्टडी के अनुसार, महिला सीईओ पुरुष की तुलना में अधिक मेहनत और लंबे समय तक काम करती हैं, अलग लक्षण उन्हें टॉप पर ले जाते हैं.

कॉर्न फेरी की चार महीने चलने वाली इस स्टडी में, महिला सीईओकैसे काम करती हैं, एक पर्सपेक्टिव देता है। इस स्टडी में 41 फॉर्च्यून 1000 कंपनियों और 16 बड़ी निजी कंपनियों की 57 महिला सीईओ शामिल थे. रॉकफेलर फाउंडेशन ने अपनी “100 × 25” पहल, जिसका लक्ष्य 2025 तक 100 फॉच्र्युन 500 महिला सीईओ की भर्ती का समर्थन हैं, में इस स्टडी का समर्थन किया हैं.

प्रमुख निष्कर्ष:

  • 40 प्रतिशत से अधिक सीईओ की शुरुआत STEM डिग्री के साथ हुई.
  • यह महिलाएं हमेशा चुनौती से प्रेरित रहती हैं.
  • दो तिहाई महिलाओं ने कहा कि सेंस ऑफ़ पर्पस उन्हें प्रेरित करता है.
  •  एक चौथाई महिलाओं ने कहा कि उनका फोकस पॉजिटिव कल्चर बना कर काम करना हैं.
  •  इनकी उम्र थोड़ी ज़्यादा होती हैं, क्यूंकि इन्हे ३०% ज़्यादा समय लगता हैं यहाँ पहुंचे में.

सबसे महत्वपूर्ण यह था की इन महिला सीईओ के लिए दुसरो का योगदान और टीम सबसे ज़्यादा महत्व रखती हैं.

  • विनम्रता में इन्होंने काफी अधिक स्कोर किया. निष्कर्षों के द्वारा, इन में आत्म-प्रचार की कमी और क्रेडिट साझा करने की प्रवृत्ति हैं, और यह दुसरो की प्रशंसा करने मै विश्वास रखती है.”किसी भी नेता के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आप कौन हैं, यह कोई और परिभाषित न करे. आप कौन हैं, यह आप डिफाइन करती हैं. मैं खुद को सीईओ के रूप में नहीं, बल्कि एक महान संस्थान के प्रबंधक के रूप में देखती हूं। ” गिन्नी रोमेटी, IBM चेयरमैन और सीईओ

दो-तिहाई महिलाओं ने कभी सोचा नहीं था कि वे सीईओ बन सकती हैं, किसी न किसी ने उन्हें प्रोत्साहित किया. अध्ययन से पता चलता है कि महिलाएं हमेशा व्यावसायिक लक्ष्यों को पूरा करने और नई चुनौतियों की तलाश रहती हैं.

महिला लीडर को अपनी स्थिति बनाए रखने में क्या मदद कर सकता हैं? युवा महिलाओं को नेतृत्व के लिए क्या प्रोत्साहित कर सकता हैं?

  • हाल ही में, एक अध्ययन से पता चला था कि संरचनात्मक बहिष्कार के अलावा, सेल्फ-डाउट और सेल्फ-वर्थ की कमी, उन्हें नेटवर्किंग का, पुरुषों से कम, मौका मिलता हैं. इससे न केवल गेडेंर बाईस सामने आया, बल्कि यह भी कि महिलाओं ने अपनी क्षमता पर सवाल उठाया है. इसको रोकने के लिए, वर्कप्लेस पर लीडर्स की ज़िम्मेदारी अधिक हैं. उन्हें महिलाओं को प्रोत्साहित करना होगा.
  • लीडर्स को वर्कप्लेस की ताकत और कमजोरियों का आकलन करना, रोजगार और कार्य परिस्थितियों की संरचना पर पुनर्विचार करना चाहिए. कमजोरियों की पहचान करने से लिंग असंतुलन कहाँ-कहाँ और किस स्तरों पर कम किया जा सकता हैं.
  • कई नीति परिवर्तन और पहल भी परिवर्तन ला सकते हैं. महिलाओं को, बाधा को दूर कर नेतृत्व में मदद कर सकते हैं.

हमारे साथ बातचीत में, प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और नेता, डॉ शमिका रवि ने सुझाव दिया कि यह अवसर में समानता अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, “युवा लड़कियों के लिए महिला मेंटर्स महत्वपूर्ण है,” महिला श्रम बल के लिए काम शुरू करना चाहिए.

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