भारत में महिलाओं को तौर-तरीकों से रहने को कहा जाता है। और अगर वे उन तौर-तरीकों को न माने, तो वे सामाज का पूर्ण तरह से हिस्सा नहीं मानी जातीं। जब बात सेक्सशुअल चीज़ों की हो, तो महिलाओं से चुप्पी साधने की उम्मीद की जाती है और पुरुषों पर जैसे न कोई तंज़ कसा जाता है न उनपर कोई रोक है। इन कुछ फिल्मों में सेक्सशुअली सशक्त महिलाओं का चित्रण किया है।

वीरे दी वेडिंग

महिला सुपरस्टार्स की यह फिल्म उनकी दोस्ती और उनके बीच की जुगलबंदी को दर्शाती है। सारी महिला मित्र साथ बैठकर अपनी सेक्स लाइफ के बारे में बात करतीं हैं और एन्जॉय भी करतीं हैं। स्वरा भास्कर के किरदार को इसमें मास्टरबेट करते हुए दिखाया गया है जिससे यह साबित होता है कि महिलाओं के लिए भी यह कोई झटके की बात नहीं है।

पार्चड

इस फिल्म में राधिका आप्टे ने अदाकारी की है। उन्होंने इसमें एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है जो घरेलु हिंसा का शिकार है और हर वक़्त वह अपनी पति से उसके बाँझ होने के लिए ताने सुनती है। यह जांचने के लिए वह किसी और पुरुष के साथ सोती है और यह पता चलता है कि स्वयं उसका पति ही बाँझ है।

लिपस्टिक अंडर माय बुरखा

भारत में सेक्स के बारे में बात करना एक तबू है। जो महिलाएं बूढ़ी होती है, उनकी सेक्स लाइफ के बारे में कोई बात ही नहीं करता। लेकिन इस फिल्म में 55 वर्षीय एक विधवा महिला फ़ोन सेक्स करती हैं। उस महिला का नाम ऊषा है जिनका किरदार रतना पाठक शाह ने निभाया है।

बधाई हो

एक मध्यम वर्ग के परिवार के बीच स्तिथ यह कहानी है। यहां पर यह सन्देश पहुँचाने का प्रयास किया गया है कि सेक्स किसी भी उम्र में करना या उस पर बात करना कोई आश्चर्य की बात नहीं है। महिलाएं अगर अपनी सेक्सशुएलिटी को देखना चाहता है, तो उसमे गलत क्या है और उसमे मुँह छिपाने वाली कोई बात नहीं है।

लस्ट स्टोरीज

नेटफ्लिक्स की इस सीरीज काफी सारी सेक्स के इर्द-गिर्द घूमती छोटी-छोटी कहानियों का चित्रण किया गया है। एक ऐसे ही प्रसंग में राधिका आप्टे सेक्स के बारे में किसी को ज्ञान देती नज़र आ रही हैं। साथ ही नेहा धुप्या और काइरा अडवाणी अपने सेक्सशुअल अरमानों को वाइब्रेटर की मदद से पुरे करते हुए दिख रही हैं।

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