निर्मला सीतारमण, जो मोदी सरकार में शपथ लेने वाली सबसे वरिष्ठ महिला कैबिनेट मंत्री हैं, ने शुक्रवार को वित्त मंत्रालय का कार्यभार संभाला। वह पहली महिला हैं जिन्हें मंत्रालय का पूरा कार्यभार दिया गया है।

वह मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के दौरान पहली फुल -टाइम महिला रक्षा मंत्री भी थीं। दिलचस्प बात यह है कि इंदिरा गांधी ने कुछ समय के लिए दोनों मंत्रालयों का कार्यभार संभाला, लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान केवल यही एक अतिरिक्त जिम्मेदारी उनके पास थी। तो आइये जानते हैं निर्मला सीतारमण को  पहली महिला फुल टाइम वित्तीय मिनिस्टर बनने पर किन चुनौतियां का सामना करना पड़ेगा ?

  1. हालात पर काबू पाना

अब केंद्रीय वित्त मंत्री के रूप में, सीतारमण का पहला बड़ा काम अभी के वित्त वर्ष के लिए नियमित बजट तैयार करने में मंत्रालय का मार्गदर्शन करना हैं और फिर वो बजट जुलाई में पेश करना होगा। यह एक आसान काम नहीं होगा, क्योंकि उन्हें इसके लिए कई चुनौतियों का सामना करना होगा। उनकी पहली बड़ी चुनौती होगी हालात पर काबू पाना । हालांकि इस बात की आशंका है कि वित्त वर्ष 2019-20 की मौजूदा क्वार्टर  (अप्रैल-जून) के दौरान धीमी जारी रहने की संभावना है, लेकिन यह भी उम्मीद है कि अर्थव्यवस्था आनेवाले क्वार्टर  (जुलाई-सितंबर) में रफ्तार पकड़ सकती है।

  1. इनकम टैक्स में लाभ

उनकी दूसरी बड़ी चुनौती खपत और निवेश दोनों को बढ़ावा दे रही है। लेकिन कुछ संकेत अशुभ होते हैं। जबकि अप्रैल में औद्योगिक उत्पादन काम  हो गया था, ऑटो कंपनियों की मांग के कारण एक इन्वेंट्री मुसीबतो का सामना करना पड़ रहा है। समस्या को संबोधित करने के तरीकों में से एक है उपभोक्ताओं के हाथों में अधिक पैसा देकर इनकम टैक्स को कम करना।

  1. जी एस टी पर ध्यान देना

उनका तीसरा काम जीएसटी भरने को आसान बनाना हैं और सीमेंट जैसी वस्तुओं पर टैक्स  कम करना है। जीएसटी  के लिए नया रिटर्न फॉर्म तैयार है और उसके लिए आगे काम भी चल रहा हैं। अब, उन्हें  समय  के अनुसार काम बढ़ाने के लिए प्रेशर  देना होगा और फिर रिटर्न्स  और ई-वे बिल दोनों में कुछ और बदलाव लाने होंगे। सीमेंट पर 28 फीसदी जीएसटी दर को कम करने का भी दबाव है। लेकिन दर को घटाकर 18 प्रतिशत करने से सरकारी खजाने पर ,000 13,000 करोड़ तक का खर्च आ सकता है।

  1. एक्सपोर्ट पर ध्यान देना पड़ेगा

सीतारमण को इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी अड़चनों को दूर करने के लिए भी  काम करना होगा । एक्सपोर्ट में धीमी गति ने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर , और बदले में, नौकरियों को नुकसान पहुंचाया है। इसी तरह, बाहरी मोर्चे पर, अधिक प्रोत्साहन प्रदान करके एफडीआई को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।

निर्मला सीतारमण पर देश के वित्त की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी हैं जो हमे लगता हैं वो पूरे विश्वास और ज़िम्मेदारी के साथ निभाएंगी और वैसे भी उन्होंने  देश की पहली फुल टाइम महिला वित्त मंत्री बनकर इतिहास तो रच ही दिया हैं । अपनी काबिलियत से वो देश का नाम रोशन करेंगी ।

 

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