जो पहले कभी नहीं हुआ वो आज हुआ है। दो महिलाएं, दो बाइक और कन्याकुमारी से लेह तक की यात्रा मात्र 129 घंटे में पूरी की गई है। अमृता काशीनाथ और शुभ्रा आचार्य ने अब एक बहुत बड़ी उपलब्धि हासिल की है क्योंकि उनकी यात्रा मोटरसाइकिल पर महिलाओं द्वारा की गई सबसे लम्बी और तेज़ दक्षिण भारत से उत्तर भारत की यात्रा है। उनके इस अभियान ने उनका नाम ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज करवाया है।

उनका यह अभियान लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था क्योंकि यह दो महिलाओं द्वारा मोटरसाइकिलों पर किया गया सबसे लम्बी  और तेज़ उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा है। यह यात्रा पूरी तरह से स्पोंसरड थी।

इस देश में महिलाएं अकेले यात्रा करना पसंद नहीं करती हैं

दो महिलाओं में से एक अमृता ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि इस देश में महिलाएं अकेले यात्रा करना पसंद नहीं करती हैं। वे ज्यादातर सुरक्षा कारणों से पुरुष साथी के साथ यात्रा करना चाहती हैं। हालांकि, वे इस तथ्य को बदलना चाहते हैं। इसलिए यात्रा करते समय महिलाओं की सुरक्षा के बारे में कई धारणाएं हैं फिर भी इन दोनों महिलाओं ने खुद को साबित करने के लिए आगे कदम बढ़ाया और एक रिकॉर्ड स्थापित करने में सफल रहीं।

उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा के दौरान उनके लिए सबसे कठिन काम नींद को मैनेज करना था। शुभ्रा और अमृता ने कहा कि अभियान के दौरान कम से कम पांच घंटे की नींद का प्रबंध करना अगले दिन जल्दी उठने के साथ-साथ बहुत मुश्किल था।

इसके अलावा, अमृता ने यह भी कहा कि शुरू में, उनके पास सीमित समय में यात्रा करने की कोई योजना नहीं थी। लेकिन बाद में, उन्होंने खुद को चुनौती देने का फैसला किया और रिकॉर्ड बनाने के लिए पांच दिनों में यात्रा पूरी की। “हमने देश भर में लगभग दो लाख किमी की दूरी तय की है। फिर हमने भूटान और श्रीलंका को कवर किया। इस साल हम मंगोलिया जा रहे हैं, ”अमृता ने कहा।

यह अभियान ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ’ में दर्ज किया गया है

यह अभियान लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था क्योंकि यह दो महिलाओं द्वारा मोटरसाइकिल पर किया गया सबसे लम्बी और तेज़ उत्तर भारत से दक्षिण भारत की यात्रा है। अमृता ने कहा कि यात्रा पूरी तरह से स्पोंसरड थी। साथ ही, दोनों महिलाओं ने लगातार यात्री की हैं। वे कई अन्य अभियानों में भी गए हैं और इसी बीच, उन्हें अपनी यात्रा के दौरान चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है। वे पिछले सात वर्षों से एक साथ यात्रा कर रहे हैं। इसके अलावा, इस यात्रा को संभव बनाने के लिए उन्होंने कई महीनों तक ट्रेनिंग भी ली।

उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा के दौरान उनके लिए सबसे कठिन काम नींद को मैनेज करना था। अमृता के साथ अभियान में शामिल हुई शुभ्रा ने कहा कि अभियान के दौरान कम से कम पांच घंटे की नींद लेना और अगले दिन सुबह जल्दी उठना बहुत मुश्किल था। दो महिलाओं के अनुसार, लद्दाख में तांगलंगला पास सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सों में से एक था क्योंकि इस क्षेत्र में बर्फबारी और बारिश होने का खतरा है।

दो महिलाएं, निश्चित रूप से, सभी महिला यात्रियों के लिए एक प्रेरणा हैं।

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