हम सबके लिए दोस्तों को, रिश्तेदारों को या साथियों को फ़ोन पे अलग अलग सोशल मीडिया से टेक्स्ट करना एक रोज़मर्रा का काम है। अब जब क्योंकि हमारी असली ज़िन्दगी कल्पनिक तौर तरिकों से जुड़ गई है, हमें भी इस समाज में अपडेटेड रहने के लिए ऑनलाइन रहना पड़ता है। अगर हम इन सब बातों से अवगत नहीं हुए तो ऐसा लगता है जैसे कुछ पीछे छूट गया या रह गया। झगड़ो का, खबरों का, दोस्तों से मिली हुई खबरों का हमें भेझिझक इंतेज़ार रहता है और हम इन सबका हिस्सा बनना चाहते हैं। अगर हम ये सब नही कर पाते तो अक्सर हमें फोमो नामक भाव महसूस होता है यानी कि फियर ऑफ मिसिंग आउट। यही कारण है कि क्यों बहुत लोगों को स्ट्रेस होजाता है।

थ्रिव ग्लोबल से बात करते हुए टेक जनरेशन के लेखक माइक ब्रूक्स ने कहा कि ये कुछ पीछे छोड़ देने की भावना ही है जो हमें बार बार अपना फ़ोन देखने पे मजबूर करता है, हम बातों से और चल रहे कार्यक्रम से अवगत रहना चाहते हैं। “हमें ये भी लगता है कि अगर हमने दूसरे इंसान को जवाब नहीं दिया तो उसे बुरा लगेगा”। सच ये है कि इंटरनेट ने हमारी ज़िंदगी आसान बनाने की जगह मुश्किल बना दी है।

बार बार फ़ोन देखना एक ऐसे शैतान की तरह लगने लगा है जिसे मैं खुद संभालने की कोशिश कर रही हूँ। जब भी मेरे फ़ोन में आवाज़ आती है तो मैं अपने आप स3 लड़ती हूँ कि कैसे मैं कुछ भी करके फ़ोन न उठाऊं। मैं जानती हूँ कि ये मेरी ज़िंदगी में कैसी अड़चन है क्योंकि ये मुझे मेरे काम से भटका देता है और परिवार के साथ बिताए जाने वाले समय को कम करदेता है। जब भी मैं सोती हूँ और फ़ोन बजता है तो मैं उसे उठाने के लिए मजबूर होजाती हूँ। मैं जानती हूँ कि बहुत लोग मेरी बात समझ पाएंगे क्योंकि ये बस उन लोगो तक सीमित नहीं रहा जिनसे मैं प्यार करती हूँ या जो मेरे साथ काम करते हैं बल्कि फ्रिज की फ़ोटो देखने के लिए भी मैं हर आधे घंटे में फ़ोन देखती हूँ।

तो इस से निपटा कैसे जाए। सबसे पहली बात तो ते है कि ये सब अचानक से बंद नहीं हो सकता। आपको ये सोचना पड़ेगा कि आपके लिए सबसे ज्यादा जरूरी कौनसा काम है और कौनसा काम रुक सकता है। आप कुछ ग्रुप को म्यूट कर सकती हैं और उन सोशल मीडिया प्लेटफार्म को चुन सकती हैं जिसपे आप रहना चाहे। अलग अलग प्लेटफार्म के लिए अलग अलग रिंगटोन रखे ताकि आपको ये पता चले कि सबसे आवश्यक सूचना कौनसी है। आखिर कर आपको किसका जवाब देना है ये आपके इच्छा शक्ति पे होगा।

एक और ज़रूरी बात है जान लेना और खुद को ये बताना की हर चीज़ से अपडेटेड रहना जरूरी नहीं। इसमें कोई दिक्कत नहीं है अगर आपको एक समाचार के बारे में देर से पता लगे या येदेर से पता लगे कि आपके दोस्त ने नई गाड़ी ली। लोगों से अपने रिश्ते को लेकर सीमाएं रखना ज़रूरी है यानी कि कुछ जगहों पे जवाब न देना या न जाना। ये मुश्किल है पर आपकी मुसीबत को आसान कर देगा।

सोशल मीडिया से आने वाले स्ट्रैस को हम नकार नहीं सकते। फोमो सही है और एंग्जायटी और स्ट्रेस भी। पर ये आपके हाथों में है कि आप अपने स्ट्रेस को कैसे नीचे रखें कुछ आसान से तौर तरीके अपना कर।

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