जैसा की हम सब जानते है की आजकल त्योहारों का सीजन ज़ोरों पर है । एक हफ्ते पहले दिवाली थी और फिर आया सिख धर्म के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी का प्रकाश पर्व । श्री गुरु नानक देव जी के 550 वीं जयंती समारोह को सुल्तानपुर लोधी में गुरुपुरब के रूप में भी जाना जाता है। इस त्यौहार को पंजाब के कपूरथला में महिलाओं के एक बड़े ग्रुप ने अलग -अलग तरीके से लंगर (सामुदायिक रसोई) लगाकर लोगो की सेवा करके मनाया। ये महिलाएं दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों से आयी हैं, जिन्होंने शहर में आने वाले लाखों भक्तों का सम्मान करने के लिए भोजन तैयार कर प्रकाश पर्व मनाया।

“आसपास की जगहों से होने के कारण, तीर्थयात्रियों को बेहतर तरीके से होस्ट करना हमारा कर्तव्य है। दूसरी बात, ऐसा मौका बार बार नहीं आता ” कपूरथला जिले के शेरपुर साड्डा गाँव की निवासी संदीप कौर कहती हैं, उन्होंने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा। वह ‘बेबे नानकी लंगर’ में कार्य करती हैं और 10 अन्य महिलाओं के साथ सामुदायिक रसोई में सेवा करने के लिए आती हैं, जहां वे सुबह 10 बजे आती हैं और शाम तक काम करती  हैं।

एक अन्य महिला, गुरमीत कौर, जो 1 नवंबर को यूपी के बिलासपुर से 10 महिलाओं के एक समूह के साथ यहाँ आई थी, कहती है, “हम सभी बिलासपुर से हैं। यह सब श्री गुरु नानक देव जी की भक्ति ही है जो हमे लोगो की सेवा करने के लिए प्रेरित करती है। ”

बाबा निधान सिंह जी ‘हज़ूर साहिब वाले ’ शहर में सबसे बड़ा लंगर चला रहे हैं और वहाँ 500 से अधिक महिलाएँ सेवा का लाभ ले रही हैं।

शहर में 70 से अधिक लंगरों ने भक्तों को भोजन कराया और इन लंगरों की सेवा करने वाली महिलाओं के लिए, आयोजकों ने मुफ्त परिवहन सेवा की व्यवस्था की है, ताकि महिलाओं को इस बात पर झल्लाहट न हो कि उन्हें गाँव में कैसे जाना है और क्या करना है?  सुल्तानपुर लोधी में आयोजित किये गए इस लंगर सेवा में सेवा करती हुई महिलाओं के अलावा यहां एक अन्य आकर्षण है इन लंगरों में परोसे जाने वाले अलग -अलग व्यंजन।

सब्जियों को काटने के लिए यहां पर स्थापित बड़ी मशीनों का उपयोग करने के लिए महिलाओं को ट्रेन किया गया है क्योंकि अन्य महिलाएं चपातियां बनाती हैं। “बड़ी रसोई में दिन में सौ से अधिक चीज़े बन रही है। लंगर नाश्ता परोसने से शुरू होता हैं और भक्तों को पकोड़े, चाय और कई प्रकार की मिठाइयां मिलती हैं। यहां हर कुछ कदम पर एक लंगर है और सुल्तानपुर लोधी में आने वाले भक्तों के लिए अच्छे भोजन की कोई कमी नहीं है। यह एक ऐसा शहर है जहां गुरु नानक देव जी से जुड़े कई स्थान हैं, ”स्थानीय कांग्रेस पार्षद तेजवंत सिंह ने टीओआई  ने बताया।

75 वर्षीय वीर कौर उत्तराखंड की पांच अन्य महिलाओं के साथ इन लंगरों में सेवा करने आई हैं। वे कहती हैं, “यह एक सपने की तरह था कि इस समारोह में भाग लेने के लिए  बाबा जी ने बुलाया है और  हम उसी में अपना योगदान दे रहे हैं ।”

आसपास के क्षेत्र से होने के नाते, तीर्थयात्रियों को बेहतर तरीके से होस्ट करना हमारा कर्तव्य है। दूसरे, यह जीवन भर का अवसर है, ”

बाबा निधान सिंह “हज़ूर साहिब वाले” शहर में सबसे बड़ा लंगर चला रहे हैं और वहाँ 500 से अधिक महिलाएँ सेवा कर रही हैं।

पंजाब के पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय ने भी 5-12 नवंबर से शहर में आने वाले श्रद्धालुओं को मुफ्त बस सेवा प्रदान करने के लिए 1500 बसों की तैनाती की है। गुरुद्वारा बेर साहिब और अन्य सिख मंदिरों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने के लिए हर दिन हजारों भक्त सुल्तानपुर लोधी में आ रहे हैं। यह सिख समुदाय के लिए एक बड़ा अवसर है क्योंकि गुरु नानक देव जी ने अपने जीवन के पहले 14 साल सुल्तानपुर लोधी में बिताए थे। पंजाब के सीएम अमरिंदर सिंह ने हाल ही में देश के अन्य हिस्सों से नहीं बल्कि पूरे विश्व से आने वाले भक्तों की श्रद्धा  को समायोजित करने के लिए किए गए सभी प्रबंधों का व्यक्तिगत निरीक्षण करने के लिए शहर का दौरा किया।

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