सोमवार को चीन के सिंगटै में हुई एशियाई कॉन्टिनेंटल ओपन विमेंस चैंपियनशिप के तीसरे राउंड में एम लक्ष्मी को हराकर, 27 वर्षीय गोवा की भक्ति कुलकर्णी इंटरनेशनल मास्टर बन चुकी हैं । भक्ति अब गोवा की चौथी आई एम बन चुकी है । उनसे पहले लीओन मेंडोंसा, रोहन आहूजा और अनुराग महामल इंटरनेशनल मास्टर बन चुके है । भक्ति ने ये ख़ुशख़बरी अपने माता -पिता को व्हाट्सप्प के ज़रिये दी ।

उसने मैसेज में लिखा की ” मै अब आई एम बन चुकी हूँ ।”

इंटरनेशनल मास्टर बनने का सफर

भक्ति यह टाइटल जीतने वाली भारत की 6 वीं महिला है । भक्ति से पहले तान्या सचदेव, पद्मिनी रॉउट, ईशा करवादे , सुब्बरमान विजयलक्षमी और निशा मोहोता ने यह टाइटल जीत चुकी है ।

इंटरनेशनल मास्टर, ग्रैंडमास्टर के बाद शतरंज में दूसरा सर्वोच्च खिताब है।

भविष्य योजनाएं

एक खिलाड़ी को इंटरनेशनल मास्टर बनने के लिए  तीन खिताब हासिल करने पड़ते है और 2400 ईलो रेटिंग्स को पास करना पड़ता है । इस टूर्नामेंट से पहले भक्ति के पास 2380 ईलो पॉइंट्स थे , उन्हें 20 पॉइंट्स की ज़रूरत थी और तीन खिताब पहले से ही उनके पास थे ।

पहला टाइटल उन्होंने हाइलैंड ओपन मास्टर्स चेक रिपब्लिक में जीता था, 2013  में । दूसरा खिताब मुंबई मेयर्स कप इंटरनेशनल 2014 में जीता और आखरी खिताब पांचवे फिशर मेमोरियल टूर्नामेंट, जो की ग्रीस में हुआ था  वहां पर जीता । भक्ति को इंटरनेशनल मास्टर बनने में छह साल लग गए और ऐसा क्यों हुआ किसी को पता नहीं ।

मैंने बहुत सारे एशियाई और वर्ल्ड टूर्नामेंट्स में अपने देश का नेतृत्व किया है, मेडल्स जीते है पर मेरे लिए एलो पॉइंट्स इकठा करना बहुत मुश्किल था  अब मै एक इंटरनेशनल मास्टर हूँ और मेरा अगला लक्ष्य है ग्रांडमास्टर बनना

गोवा में दूसरी ग्रांडमास्टर चैस टूर्नामेंट 18 जून से शुरू होनेवाली है पर इसमें भक्ति हिस्सा नहीं लेंगी क्योंकि एशियाई चैंपियनशिप में उन्हें पांच और प्रतियोगिताएं में हिस्सा लेना है इसलिए वो वह व्यस्त होंगी ।

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