छुट्टियों आते ही, दोस्त व परिवार के सवालों में घिर जाते है, सिंगल लोग, जैसे “तुम शादी कब कर रहे हो”?

रिश्तेदारों के सवाल व सलाह खत्म होने का नाम नहीं लेती. हर त्यौहार या मिलन का मौका, बस इसी चीज़ पर निर्भर करता है कि कब कोई खास आपकी ज़िन्दगी में प्रवेश कर रहा है या करेगा. चाहे, चचेरे रिश्तेदार हो या ममेरे या दोस्त ही, सब फिकरमंद रहते है कि कई आप ज़िदंगी भर अकेले ही न रह जाये.

निःसंदेह हर कोई एक रोमांटिक रिश्ता तलाश रहा है. रिश्ता गंभीर हो और लंबा चले, तो इससे बेहतर कुछ नहीं. कई लोगो के मुताबिक, सिंगलस दंपतियों की तुलना में ज़्यादा दुखी या अकेले होते है.

यह प्रचलित धारणाएँ आजकल रिश्तों का मार्गदर्शन करती है, लेकिन यह झूठी है. जानिए क्यों:

क्यों अधिक लोग सिंगल रहना पसंद करते है?

सच्चाई यह है कि अधिक लोग अविवाहित व बिना किसी के साथ के रह रहे है. महलाएं अब अविवाहित रह कर काम करने व नौकरी करने में ज़्यादा विश्वास रखती है. हालाँकि, उनके प्रेमी होते है. 2010 में, अमेरिका में विवाहित जोड़ें अल्पसंख्यक बन गए. अधिक युवा वयस्क अविवाहित और बिना रोमांटिक साथी के रहना पसंद करते हैं.

इच्छा से सिंगल

बहुत से लोग सिंगल होने में आनंद लेते हैं. लोगों के पास कई राजनीतिक या नैतिक कारण हैं.

कुछ महिलाएं इच्छा से सिंगल मदर बनती हैं. जैसा कि समाजशास्त्री अर्लिए हॉक्सचाइल्ड ने तर्क दिया है, महिलाओं को सिंगल रहना, विवाहित जीवन से बेहतर व आकर्षक लगता है.

अन्य लोगों के लिए, सिंगल जीवन उनका खुद का निर्णय होता है. जैसे “अलैंगिक” लोग, जिन्हे यौन और रोमांटिक संबंधों में रुचि नहीं है.

अलैंगिक लोग कौन हैं?

1994 के ब्रिटिश सर्वेक्षण, 18 ,000 लोगो में 1 प्रतिशत लोग अलैंगिक थे. अलैंगिकता अभी भी बहुत कम ज्ञात है. लोगों में झिझक भी है. इसलिए, यह संभव है कि सही संख्या अधिक हो सकती है.

अलैंगिक ऐसे लोग हैं जो यौन आकर्षण महसूस नहीं करते हैं. अलैंगिकता केवल सेक्स से परहेज नहीं, बल्कि एक अभिविन्यास है. अलैंगिक में रोमांटिक भावनाएं हो सकती हैं, जीवन साथी के साथ अंतरंग क्षणों को साझा करना चाहते हैं और यहां तक ​​कि कडल भी – लेकिन यौन भावनाओं के बिना.

एंजेला चेन, पत्रकार, ने अलैंगिकता के बारे में एक किताब लिखी है, उसमे कहती है कि उसके अलैंगिक साक्षात्कार विषयों में अलैंगिकता के बारे में जानकारी की कमी थी. वह यौवन के दिनों में खुद से सवाल करते थे कि, “क्या मैं सामान्य हूं? क्या मेरे साथ कुछ गलत है?”

समाज में, अलैंगिकता को एक चिकित्सा विकार के रूप में देखा जाता है, जो बिलकुल गलत और असत्य है.

सिंगल और खुश? या अकेलापन?

“सिंगल आउट” के लेखक मनोवैज्ञानिक बेला डे पौलो के अनुसार, आजीवन सिंगल लोग, वृद्धों से कम अकेले होते है. और कई सिंगल लोगों में घनिष्ठ मित्रता होती है, जो रोमांटिक साझेदारी के समान ही मूल्यवान है.

सिंगल लोगों के इस निर्णय के कारण को समझना आवश्यक है. यदि आप किसी के मित्र या परिवार के सदस्य हैं जो आपको बताता है कि वे खुशी से सिंगल हैं – तो उन पर विश्वास करें.

(यह आर्टिकल दी कन्वर्सेशन में प्रकाशित हुआ था)

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