“अगर हमें औरतों के खिलाफ हुए शोषण को रोकना है तो शुरुआत घर से होनी चाहिए। अगर वो अपने घर में खुश नहीं है , तो वो कहीं खुश नहीं है।” घरेलू हिंसा आजकल एक ऐसे कीड़े की तरह हमारे समाज मे फ़ैल रखा है जिससे पीछा छुड़ाने अब आवश्यक हो गया है। ये हिंसा भारत के घर घर में देखी जाती है। भारत में घरेलू हिंसा की तादाद 33.5% है। घरेलू हिंसा वह हिंसा है जहां ज़बरदस्ती बल या गलत शब्दो का प्रयोग किसी शारिरिक तोर से कमज़ोर इंसान पे किया जाता है।

क्यों की जाती है घरेलु हिंसा ?

ये घरेलू हिंसा अक्सर उन घरों में देखा जाता है जहां घर की औरत कमा नही रही होती। गांव और शहरों में औरते जोकि कम कमाती हैं, उन पे घरेलू हिंसा होना काफी आम बात है, घर के मर्द शराब के नशे में उन्हें मारते हैं, अक्सर उनके शरीर पे चोट के निशान देखने को मिलते हैं। ये महिलाएं अक्सर इस हिंसा का शिकार काफी सालों से हैं क्योंकि ये आर्थिक तरह से अपने पतियों पे निर्भर रहती है। ये भी देखा गया है कि दहेज न देने के कारण ये हिंसा की शुरुआत करता है। कई बार देखा गया है कि नई नवेली दुल्हन आत्महत्या कर लेती है इसके कारण। गाँव में अब इस हिंसा को एक पति पत्नी के बीच के भिड़ंत के रूप मे देखा जाता है किंतु ये इस से कई ज्यादा है। जब भी एक प्रेग्नेंट महिला के साथ ये किया जाता है , उसके बच्चे को बचाने की उम्मीद कम हो जाती है अगर हिंसा शारिरिक हो तो। अगर हिंसा मानसिक हो तो बच्चे के ऊपर इसका गलत असर पड़ सकता है।

घर के मर्द शराब के नशे में उन्हें मारते हैं, अक्सर उनके शरीर पे चोट के निशान देखने को मिलते हैं। ये महिलाएं अक्सर इस हिंसा का शिकार काफी सालों से हैं क्योंकि ये आर्थिक तरह से अपने पतियों पे निर्भर रहती है।

माता-पिता के दिये गए संस्कार

देखा गया है कि माता -पिता और बड़ो के दिये हुए संस्कार इसे प्रभावित करते है। अगर एक बच्चा अपने पिता को उसकि माता पे हिंसा का प्रयोग करते देखता है तो ये देखा गया है कि उसके हिंसा के प्रतिशत बढ जाते है। अगर परिवार बड़ा हो और अगर इस हिंसा को बढ़ावा दिया जाता है , तो भी आगे की पीढ़ी इस हिंसा को बढ़ावा देगी एवं इसका प्रयोग करेगी।

आखिर हिंसा का प्रयोग कर मिलता क्या है?

इसका एक सीधा सा जवाब है। आत्म संतुष्टि। एक कमज़ोर इंसान पे बल का प्रयोग कर एक ताकतवर इंसान को आत्म संतुष्टि मिलती है । उसे अपने शक्ति का एहसास होता है और ये पता चलता है कि उसे माना करने वाला कोई नही है। ये देखा गया है कि सिर्फ एक हेट्रोसेक्सुअल जोड़े के बीच ये आम नही परंतु होमोसेक्सुअल जोड़ो के बीच भी ये देखा जाता है।

मुक्ति कैसे पाएं?

इस हिंसा से जो भी नुकसान हुआ उसका तो कुछ नही कर सकते पर हम महिलाओं और पुरुषों को इस बारे में बता सकते हैं । उन्हें इस बात का एहसास कराया जा सकता है कि ये प्यार नही , सहमति नही बल्कि ज़बरदस्ती है। उन्हें ये बताया जा सकता है कि शादी में हिंसा का प्रयोग करना, एक छोटी सी अन-बन नही बल्कि एक अपराध है जिसके लिए गुनहगार को सज़ा मिल सकती है। हिंसा का प्रयोग करने वालो को ये डर दिलाने के लिए की घरेलू हिंसा एक अपराध है, कड़ी से काडी सज़ा मिलनी चाहिए। परिवारों में इस हिंसा के प्रयोग का उल्लंघन कर बड़े अपने छोटो को सीख दे सकते है। आखिर कर जब देश की महिलाओं पे हिंसा छोड़ उनकी सहायता की जाएगी, एक सशक्त भारत का निर्माण होगा , जहां महिलाये स्वयं ही आर्थिक रूप से आज़ाद होगी।

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