SheThePeople.TV ने अरेंजड गे मेरिज ब्यूरो के संस्थापक उर्वि शाह से बातचीत की. शाह समलैंगिक विवाह की साइट चलाती है.

फैसले के खंड 377 पर आपकी भावनाएं क्या थीं। यह भारत में समुदाय के प्रति धारणा कैसे बदलेगी?

आज़ादी के 71 साल बाद, इस फैसले से हम असली मायने में  स्वतंत्र हुए है. इस अपराधी-करण के कारण समुदाय के कई सदस्यों को नुकसान उठाना पड़ा था. किसी की निजी पसंद को अपराध बनाना केवल अनुचित नहीं, असंवैधानिक भी है. मैं इस फैसले से बेहद ख़ुश हूँ.

जबकि भारत में धीरे-धीरे ही सही लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बदलाव आया है . बहुत कम लोगों ने समलैंगिक डेटिंग या मैट्रिमोनियल सर्विस के बारे में सोचा है.

आपको समाज में मौजूद अंतर का एहसास कब हुआ? हमें अरेंज्ड गे मैरिज के बरें में बताए.

डेवलपमेंट स्टडीज में पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद, मैंने सेवा क्षेत्र में कई जंग काम किया. सामाजिक मुद्दों को समझने के दौरान, मैंने महसूस किया कि LGBTQ समुदाय अभी भी भारत में सामाजिक भेदभाव का सामना कर रहा है.  मैंने शोध किया और उस अवधि के दौरान हमसफ़र ट्रस्ट, लक्ष्या फाउंडेशन और अन्य गैर-सरकारी संगठनों के संपर्क में आयी. मैं रिचर्डसन ड्यूक, ट्रांसजेंडर अधिकार कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी और मानवेंद्र सिंह गोहिल से मिली, जो समलैंगिक व्यक्ति हैं. मुझे पता चला कि वे अवसाद, चिंता, गैर-स्वीकृति, भेदभाव, हिंसा और नशीली दवाओं के दुरुपयोग का सामना करते हैं.

मुद्दों पर शोध करते समय इसने मुझे अहसास हुआ कि ऐसी कोई डेटिंग साइट नहीं है जहाँ समान विचारधारा वाले लोगों को भागीदारी मिले.

आपके निर्णय पर परिवार और दोस्तों की क्या प्रतिक्रिया थी?

मैं रूढ़िवादी गुजराती परिवार से हूं, जहां फर्क नहीं पड़ता कि एक महिला कितनी शिक्षित है, अंत में, एक अमीर पति ढूंढ कर शादी कर दी जाती है. मुझे अपने माता-पिता को समझाना पड़ा कि एल.जी.बी.टी.क्यू.आइ.ए. का मतलब क्या है.

इस व्यवसाय में आना एक जोखिम था, मेरे माता-पिता का सवाल था, “यदि आप इस ब्यूरो को शुरू करते हैं, तो कौन सा लड़का आपसे शादी करेगा?” मेरे पास केवल एक ही जवाब था कि मैं उस परिवार में जाऊंगी, जो मेरे कर्तव्य को समझे.

मेरे माता-पिता की शर्त थी कि मुझे गुजरात छोड़कर जाना होगा और बाक़ी परिवार को मेरे व्यवसाय के बारे में नहीं बताना. मैंने वैसा ही किया और सबको यही कहा कि मुझे सिकंदराबाद में नौकरी मिल गई है और मैं वहाँ शिफ्ट हो रही हूँ.

आपकी साइट पर अभी तक कितनी शादियाँ हुई हैं?

अब तक, हमारे 49 जोड़े लिव-इन रिलेशनशिप में हैं, 43 कपल जिन्होंने शादी की और 29 जोड़े एक रिलेशनशिप में हैं. उनमें से, समलैंगिक जोड़े क्रमशः 3, 1 और 1 हैं. यह सारा डाटा भारत का है. विदेश में, हमारे पास 12 समलैंगिक जोड़े और छह ट्रांसजेंडर जोड़े हैं.

“अगर सरकार समलैंगिक विवाह के पक्ष में नहीं है, तो मैं निश्चित रूप से लिव-इन रिलेशनशिप में समलैंगिक जोड़ों की मान्यता के लिए एक और याचिका दायर करूंगी.” – उर्वी शाह

जब 377 विघटित हुआ था, तब भारतीयों की आपकी समलैंगिक विवाह साइट के लिए क्या प्रतिक्रिया थी?

हर किसी को एक साथी की आवश्यकता होती है. मैं समलैंगिक लोगों को कोठरी से बाहर आने में मदद करना चाहती थी.

यह कानून(धारा 377) अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और मजेदार बात यह है कि उन्होंने इसे अपने देश में वैध कर दिया है.  दूसरे, मैंने बहुत से लोगों को यह कहते सुना है कि समलैंगिकता हिंदू धर्म के खिलाफ है, जिज्ञासा के कारण, मैंने संस्कृतियों और परंपराओं पर शोध किया.

आपकी सबसे बड़ी चुनौतियाँ क्या थी?

चुनौतियों के बारे में बात करे, तो मेरे दोस्तों का ख़िलाफ़ होना एक चुनौती थी. मेरे परिवार के सदस्य अभी भी मेरे काम के खिलाफ हैं और मुझे लगता है कि मैं परिवार के लिए अभिशाप हूं और उनकी प्रतिष्ठा को नष्ट कर दिया है.

मैंने अपने कुछ दोस्तों को LGBTQ कम्युनिटी होम से डिनर के लिए घर बुलाया. व्यक्तिगत रूप से उन्हें जानने के बाद, मेरे माता-पिता ने उनका अधिक सम्मान करना शुरू कर दिया.

मुझे मौत की धमकी और एसिड अटैक की धमकी मिली है। मैं चिंतित नहीं, लेकिन मुझे डर है कि एलजीबीटीक्यू समुदाय के सदस्य मेरे काम के खिलाफ जा सकते हैं और इसे एक नकली कंपनी कह सकते हैं. कुछ लोगों ने यहां तक ​​कहा कि मैरिज ब्यूरो के नाम पर मैं एक वैश्या स्थल चला रही हूं. जब मैंने कंपनी शुरू की, लोगों ने अपनी नौकरी छोड़ दी और कर्मचारियों के रूप में मेरी कंपनी में शामिल हो गए. धीरे-धीरे और धीरे-धीरे मैंने 26 कर्मचारियों को नियुक्त किया और उनमें से किसी ने भी कम्पनी नहीं छोड़ी.

आप आगे क्या करना चाहती है?

मैं समुदाय के लोगों की मदद करना जारी रखूंगी.  हम LGBTQ समुदाय के बारे में समाज को संवेदनशील बनाने की योजना बना रहे हैं. मैं जल्द ही अपने वकील से मिलने जा रही हूं कि समुदाय के लिए विवाह क़ानूनों की याचिका कैसे दायर की जाए.

समलैंगिक विवाह के वकील का तर्क है कि यह एक समान अधिकार का मुद्दा है.

“अगर सरकार समलैंगिक विवाह के पक्ष में नहीं है, तो मैं निश्चित रूप से लिव-इन रिलेशनशिप में समलैंगिक जोड़ों की मान्यता के लिए एक और याचिका दायर करूंगी.” 

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