पायल शाह करवा हमें बताती हैं कि समाज को सेक्स पॉजिटिव क्यों होना चाहिए।

1991 में जब कामसूत्र कंडोम कंपनी ने पूजा बेदी और मार्क रॉबिन्सन के शावर सीन के साथ अपनी पहली ऐड निकाली, तो उसे दूरदर्शन और दूसरे मीडिया चैनलों ने इस ऐड को बैन करदिया। पर अगर मैं इस ऐड के डिरेक्टर या निर्माता को श्रद्धांजलि दूंगी जो कि अलीके पदमसी हैं, मैं ये इसलिए करूंगी क्योंकि मुझे उनकी बहादुरी को सलाम करना है। वो और उनकी पूरी टीम ने पहली बार कंडोम को एक प्यार भरे रिश्ते की तरह दर्शाया। ये सब कुछ 20 साल पहले हुआ जब शारीरिक संबंध बस परिवार बढ़ाने के लिए देखा जाता था न कि प्यार दर्शाने के लिए।

उसी समय में जहां मिल्स एंड बूम की नावेल में जहाँ एक नौजवान को शारिरिक संबंध बनाने के तौर तरीके सिखाये जा रहें थे, वहीँ बॉलीवुड में अभी इन संबंधों बस किस तक रोक दिया गया। लड़को के पास उनकी ब्लू फिल्मे थी जोकि वो रूम में बंद होके देख लेते थे। मासिक धर्म या लिंग के बारे में बातें बहुत छुप चुपके होती थी या शर्मनाक कहीं जाती थी। एक बहुत छोटे तरीके से, सेक्स एक गंदा शब्द था और किसी को खुल के ये शब्द नहीं बोलना था। समाज काफ़ी सेक्स नेगेटिव था।

आज भी कुछ ऐसा ही है। 20 साल बाद भी इस इंटरनेट एरा में सेक्स निषेध परंपरा चलती आ रही है। फिर भी एक रेवोल्यूशन हुआ है जहाँ सेक्स की बातों को एक किनारा मिला। शायद इसने वक जगह भी बना ली है हमारे समाज में। और ये सही संकेत हैं क्योंकि अब समय आगया है कि समाज सेक्स पॉजिटिव हो और हमारे मन में इसके लिए घिन्न नहीं बल्कि प्यार होना चाहिये।

क्यों होना चाहिए समाज को सेक्स पोसिटिव?

सेक्स पोसिटिव होने के कई मतलब हैं जिनमें की ये कुछ हैं-
●सेक्स के और लिंग के झुकाव के बारे में बात करना बिना शर्माना या शर्मिन्दा महसूस करना।
●सेक्स को एक अच्छे तरीके से देखना, महसूस करना नाकि इसे घिन्नता से देखना।
● सेक्स के विचार को समझना।
●सेक्स एडुकेशन को आगे बढ़ना ताकि शारीरिक रोग न हो।
●एक इंसान के शरीर का तिरस्कार न करना अथवा उसे गले लगाना।
● सेक्स रिलेटेड बातों को अलग अलग तरह से न बोलके सीधे और साफ़ कहना।

हमें सेक्स पोसिटिव क्यों बनना चाहिए?

सेक्स मानसिक और शारिरिक तौर से बहुत आवश्यक है। इसे एक रहस्य की तरह देखने केआ अर्थ है कि हम इसे निषेध की तरह देख रहे हैं। बच्चों को अक्सर इसके बारे में गलत तरह से पता लगता है या गलत पोर्न देख कर मिलती है।

सेक्स एडुकेशन के बारे में बात कर हम शारीरिक संबंधों के बहाने हुए गलत कामों को रोक सकते हैं। यूनेस्को के रिपोर्ट के अनुसार कंप्रेहेंसिव सेक्सुअलिटी एडुकेशन का कहना है कि सेक्स एडुकेशन देना अत्यंत आवश्यक है ताकि लोग एक सुरक्षित और स्वास्थ्य शारीरिक जीवन जी सके। इसके बारे में पढ़ने से लोगों में महिलाओ के प्रति इज़्ज़त बढ़ेगी और उनकी शोषण होना कम होगा।
शारिरिक हानि, रेप और मानहानि को रोका जा सकता है क्योंकि अगर उन्हें इस बारे में पढ़ाया जाएगा उन्हें सेक्स और एक्सप्लॉइटशन के बीच फर्क समझ आएगा।

कैसे बनें हम सेक्स पोसिटिव समाज?

1. सेक्स शब्द को एक अच्छे तरह से देखना

पहली बात ये होनी चाहिए कि हमें सेक्स को एक अचछे ढंग से देखना चाहिए। सेक्स प्यार जताने के एक तरीका है तो फिर ये घिन्न कैसे हो सकता है? सेक्स एक ग़लत चीज़ नहीं है बल्कि हमनें इसे ऐसा बना दिया-पाप भरा। जैसे कि विवाह के पहले सेक्स करने को ग़लत समझा जाता था, एक शर्मनाक कार्य पर अगर आप विवाह के बाद ये करते हैं चाहे आप वो ज़बरदस्ती करें या खुशी खुशी, वो समाज को स्वीकार है।

सेक्स एक पोसिटिव एमोशन है और इसे ऐसे सोच तक सीमित नहीं रखना चाहिए। इसे शर्मनाक तौर से नहीं बल्कि प्यार से देखा जाना चाहिए।

2. इज़्ज़त करना

सेक्स को लेकर सही सोच रखना और इसे कम ज़रूरी न समझना। ये प्यार जताने का आपका तरीका होता है और खुद को शारीरिक और मानसिक तौर से खुश रखना है।

3. बात, फैलाना और सबको बताना

अपने दोस्तों से बात करें। उनके सामने परिस्थितियों को रखना। लोगों को इसके बारे में बात करना अजीब नही लगेगा। इसका ये मतलब भी नहीं है कि आप हर एक से इसके बारे में बात कर रहें हैं।

4. सेक्स और वल्गरिटी में फर्क

हमें सेक्स और असभ्यता में फर्क करना आना चाहिए। गंदे जोक और स्वास्थ्य शारीरिक बातें करने में फर्क है। गंदे बतों को एक तरफ़ करना चाहिए पर अगर आपका दोस्त अछि बात में कुछ सेक्स रिलेटेड बात करता है, उस पे हसना सीखिए।

तो आइए समाज को सेक्स पोसिटिव बबनाये, और इसके बारे में और बात करें।

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