आज की महिलाएं बखूबी लिंग असमानता को मिटाने, अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करके और अपनी ज़िन्दगी अपने मुताबिक जीने में कोई कसर नहीं छोड़ रही. इस साल हमने कई महिलाओं को उनके क्षेत्रों में विजय हासिल करते देखा है. वह आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बन गई कि वह जो चाहते हैं, वो हासिल कर सकते है.

यहां ऐसी ही शक्तिशाली, साहसी और ज़िद्दी महिलाओं की एक सूची है, जिन्होंने साधारण जीवन में कुछ असाधारण हासिल करने की ठानी और सफल हुई 

उषा अनंतसुब्रमण्यम

इलाहाबाद बैंक की पूर्व प्रबंध निदेशक, उषा अनंतसुब्रमण्यम ने ‘द इंडियन बैंक एसोसिएशन’ (आईबीए) की अध्यक्ष बनकर वित्त उद्योग में प्रशंसा पाई.

जामिदा शिक्षक

केरल के मलप्पुरम जिले में, जनवरी 2018 में एक मुस्लिम महिला ने इतिहास में पहली बार शुक्रवार की प्रार्थना की थी. कुरान और सुन्नत समाज की महासचिव, जामिदा शिक्षक पहली महिला इमाम बनी, मुख्यालय में शुक्रवार की प्रार्थना आयोजित की. शिक्षक की प्रार्थनाओं के बाद, लोगों के विरोध में काफी अपमान किया गया. भारत में यह पहला मस्जिद है(कुरान सुन्नत सोसाइटी केंद्रीय समिति कार्यालय, मलप्पुरम, केरल) जहाँ जुमा की प्रार्थनाओं का नेतृत्व करने के लिए एक महिला को चुना गया.

गिलू जोसेफ

‘गृहलक्ष्मी’ के फरवरी एडिशन में स्तनपान पर एक कवर कहानी और तस्वीर छपी थी, जिसका शीर्षक- “स्तनपान कराते समय हमें न देखा करे”. तस्वीर में एक महिला को एक ब्लाउज और सिंदूर पहने हुए दिखाया था. स्तनों में से एक से बच्चा स्तनपान करते दिखाया था. यह सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हुई. इसमें मॉडल-मलयालम अभिनेता गिलू जोसेफ थी. कुछ लोगों ने उसकी प्रशंसा की, तो कुछ ने आलोचना की. पर जोसफ निडर रही और साहस के साथ ट्रॉल्स को जवाब दिया.

सृष्टि बक्शी

समर्पण और हिम्मत से ही समाज में पितृसत्ता के खिलाफ लड़ाई लड़ी जा सकती है. सृष्टि बक्शी ने हांगकांग में अपनी नौकरी छोड़, भारत में कन्याकुमारी से कश्मीर तक, पैदल चली. उनका उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा का संदेश और जेंडर डिवाइड के प्रति संवेदनशीलता फैलाना था.

मेनका गुरुस्वामी

सुप्रीम कोर्ट की वकील-मेनका गुरुस्वामी ने समलैंगिकता के आपराधिकरण पर केस लड़ा. उन्होंने उन लोगों का प्रतिनिधित्व किया जो LGBTQA समुदाय के हैं. कानून समाज के एक वर्ग के खिलाफ भेदभाव करने के लिए कैसे काम करता है, उन्होंने यह भी उजागर किया.

अरोही पंडित और कीथैयर मिस्क्विट्टा

लड़कियां-अरोही पंडित (22) और कीथैयर मिस्क्विट्टा (23) – दुनिया भर में “माही” नामक एक मोटर ग्लाइडर उड़ाने वाले पहले भारतीय पायलट हैं. उन्होंने एक मोटर ग्लाइडर विमान से तीन महाद्वीपों को छू लिया और 100 दिनों में 40,000 किमी से अधिक कवर किया.

श्री रेड्डी

अप्रैल में तेलुगु फिल्म उद्योग में कास्टिंग काउच के विरोध में, अभिनेत्री और पूर्व टीवी पत्रकार श्री रेड्डी कैमरे पर टॉपलेस आई. उन्होंने उद्योग से कई स्थापित नाम लिए जो इस अपराध के दोषी है. महिलाओं के यौन शोषण का विरोध करते हुए रेड्डी ने एक निगरानी करने की बजाए कहा, फिल्म चैंबर चुप रहती है.

तान्या सान्याल

कोलकाता की तान्या सान्याल इस साल अप्रैल में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (ए.ए.आई.) द्वारा नियुक्त पहली महिला फायरफाइटर बनी. ए.ए.आई. में कुल 3,310 फायरफाइटर विमान हैं.

शबनम

एक मुस्लिम महिला-शबनम रानी, ने सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में प्रचलित बहुविवाह और ‘निकाह हलाला’ पर प्रतिबंध लगाने की याचिका दी. कुछ दिन बाद, बुलंदशहर में रानी पर एसिड से हमला किया गया.

महिला  नेवल क्रू

देश भर से छह महिलाओं की एक टीम को नविका सागर परिक्रमा नामक एक परियोजना में आई.एन.एस.वी. तारीनी पर दुनिया का सफर करने के लिए चुना गया. टीम में तारीनी के कप्तान, लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी और क्रू, लेफ्टिनेंट कमांडर्स प्रतिभा जामवाल, पी स्वाथी और लेफ्टिनेंट एस विजया देवी, बी ऐश्वर्या और पायल गुप्ता शामिल थे. महिलाओं ने अपनी यात्रा सितंबर, 2017 में शुरू की, इस साल मई में भारत वापस आई.

शुभांगी स्वरुप

उत्तर प्रदेश के बरेली की शुभांगी स्वरुप ने नौसेना में पहली महिला पायलट बनकर इतिहास लिखा. नवंबर में भारतीय नौसेना अकादमी, एझिमला, कन्नूर से महिला अधिकारियों का पहला बैच पारित हुआ.

रहना फातिमा और कविता जक्कल

एक ऐतिहासिक कदम में, पत्रकार कविता जक्कल के साथ रहना फातिमा, सबरीमाला मंदिर के सबसे नज़दीकी तक पहुंचँने वाली दो महिलाएं बनी. सुप्रीम कोर्ट ने सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर के इनर सैंक्टम में प्रवेश करने की अनुमति दी. तब से, कुल आठ महिलाओं ने मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की लेकिन केवल फातिमा और जक्कल मंदिर के 500 मीटर्स तक पहुंच पाई.

मेहविश ज़र्गर

कश्मीर की मेहविश ज़र्गर राज्य में पहली महिला कैफे मालिक बनी और इतिहास रचा. इस साल फरवरी में, उन्होंने श्रीनगर में मी ‘एन’ यू कैफे की सह-स्थापना की और कश्मीर में पहली महिला कैफे उद्यमी बन गई.

जेना कोठारी

सालों से, धारा 377 के कारण ट्रांसजेंडर लोगों और नपुंसकों के खिलाफ सबसे अधिक भेदभाव किया गया, जिसने समलैंगिकता को अपराधी बना दिया. ट्रांसजेंडर समुदाय की जेना कोठारी ने समान मानवाधिकारों के लिए लड़ाई की. धारा 377 के खिलाफ लड़ते हुए कोठारी ने सर्वोच्च न्यायालय के संविधान खंडपीठ के सामने अक्कई पद्माशली और ट्रांसजेंडर समुदाय का प्रतिनिधित्व किया.

इन असाधारण महिलाओं को सलाम!

(यह पोस्ट पूर्वी गुप्ता ने अंग्रेजी में लिखा है.)

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