2019 के इलेक्शन में एक अलग बात होगी। इस बार एक महिला वोटर पर ध्यान ज्यादा रहेगा। 2014 के इलेक्शन में पुरुष वोटर और महिला वोटरों के बीच सिर्फ 1.8% का फर्क था। बढ़ती महिला जनसंख्या की वजह से ये देखा जा रहा है कि शायद आने वाले समय में महिला वोटर, पुरुष वोटरों से आगे निकल जाए।

बात जो भी हो, पर इस बार महिलाये और उनकी इच्छा और मांग को सबसे ऊपर रखा जाएगा। शीपीपल.टीवी ने वोमेन एंड वोट नामक पहल छेड़ी जहां इस चीज़ पे बात हुई कि कैसे महिलाएं इस बार के इलेक्शन में अपनी छाप छोड़ सकती हैं फिर चाहे वो वोटर हो, चुनाव लड़ने वाली हो या राजनीतिक विशेषज्ञ हो।

प्रियंका चतुर्वेदी जो कि कांग्रेस की स्पोक्सपर्सन हैं उन्होंने महिलाओं को लेकर कांग्रेस की क्या 4 मांगे हैं, उन्हें सामने रखा-

1. जान सुविधा देने वाली जगहों में महिलाओं की भाग्यता।
2. महिलाओं के लिए और नौकरी और उनके हुनर को बढ़ाना।
3. सामाजिक संस्थाओं का खुलना
4. महिलाओं के लिए और योजनाएं लाना।

नौकरी सबसे बड़ा कारण

प्रियंका का कहना है “बहुत फिक्र की बात है कि कई औरते अपनी नौकरी छोड़ रही हैं। ऐसा सिर्फ उनके साथ ही क्यों हो रहा है और वो सबसे ज्यादा पीडित क्यों हैं? औरतें नौकरी पाने के लिए उतनी ही शशक्त हैं जितने की पुरुष। ये बात बस उद्यमती तक सीमित नहीं है बल्कि कॉरपोरेट में भी आती है। मैटर्निटी लीव के कारण औरतों का नौकरी में रहना और बढ़ा है और उनकी सहूलियत के लिए भी सही है किंतु जब वो 26 हफ्ते के बाद वापस आती है, उन्हें कोई नहीं लेता। हमें इसपे ध्यान देना पड़ेगा”

प्रियंका कहती हैैं कि सरकार का काम नौकरी बनाना नहीं बल्कि उन्हें बढ़ाना है। नौकरी मल्टीनेशनल कंपनी बनाती हैं।

सामाजिक सुरक्षा एवं एजेंसी

प्रियंका के अनुसार महिलाओं की सुरक्षा सिर्फ बस चलाने से नहीं अथवा इस से आएगी जब लोग ये समझेंगे की अलग अलग एजेंसी में उन्हें किस तरह की दिक्कते हैं जब वो समाज के बीच में हैं। “ हमें और सावधानी बरतने की आवश्यकता है, हमें औरतों को शशक्त बनाना है और हर जगह सी सी टीवी और वाहनों को उनतक पहुँचा ना है। उस से भी ज्यादा हमें जवाबदेही चाहिए ताकि सरकार इस बात से अपने आप को पीछे न करें”

राजनीति में अनुभव

राजनीति में अपने अनुभव के विषय में बात करते हुए उन्होंने कहा कि उनका अनुभव बहुत ही अच्छा रहा है. उन्हें पिछले 10 साल में बहुत कुछ सीखने को मिला है. राजनीति ने उन्हें अपना परिपेक्ष लोगों के सामने रखने में सहायता करी है. राजनीति ने मुझे यह सिखाया है कि कोई भी जर्नी आसान नहीं होती परंतु कोई भी जर्नी इतनी मुश्किल भी नहीं होती कि हम खुद पर विश्वास ना रखें

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