मंगलवार को समाचार एजेंसी ए.एन.आई. के साथ एक साक्षात्कार में , प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक , , राम मंदिर, विमुद्रीकरण , ऋण माफी आदि जैसे कई मुद्दों पर बात की, हालांकि, सबरीमाला और ट्रिपल तालक जैसे महिला-केंद्रित मुद्दों पर उनके बयान ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी.

आइए एक नजर डालते हैं नए साल के पहले दिन पीएम मोदी द्वारा दिए गए महिला विशेष बयानों पर:

ट्रिपल तालक बिल और लैंगिक समानता

एएनआई की संपादक, स्मिता प्रकाश ने पीएम मोदी से सवाल किया कि ट्रिपल तालक अध्यादेश को उनके द्वारा एक प्रगतिशील कदम माना गया था, लेकिन सबरीमाला मुद्दे पर उनकी पार्टी परंपराओं की आड़ में फंस गई. ऐसा क्यों?

इसके जवाब में, प्रधानमंत्री ने कहा कि तत्काल ट्रिपल तलाक़ के खिलाफ अध्यादेश लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए लाया गया था. उनका मानना ​​है कि इस मुद्दे को धार्मिक मुद्दों से अलग रखना चाहिए. उनके अनुसार, ट्रिपल तलाक़ लिंग समानता की बात है, सबरीमाला परंपरा की.

मोदी ने यह भी जोड़ा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ट्रिपल तालक अध्यादेश लाया गया था. इस मुद्दे का समाधान संविधान के तहत मिलेगा. अधिकांश इस्लामिक देशों ने ट्रिपल तालक पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह धर्म या आस्था का विषय नहीं, लैंगिक समानता का मुद्दा है, सामाजिक न्याय का मामला है. इसलिए दोनों को अलग रखना चाहिए.

सबरीमाला मामला परम्परा से संबंधित है

सबरीमाला तीर्थस्थल में मासिक धर्म की उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश और दक्षिणपंथी समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन की बात करते हुए, पीएम मोदी ने सुझाव दिया कि यह मुद्दा सीधे ‘परंपरा से संबंधित’ है. और सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में एक महिला न्यायाधीश (न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा) द्वारा असंतोष महसूस किया गया था. इस मामले कि तेह तक जाना ज़रूरी है.

मोदी ने कहा कि देश में हर किसी को न्याय मिलना चाहिए. हालांकि, कुछ मंदिर हैं, जिनकी अपनी परंपराएं हैं, जहां पुरुष नहीं जा सकते. और पुरुष नहीं जाते.

सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट की एक महिला जज ने कुछ विशेष टिप्पणियां की हैं, जिन्हे ध्यान से पढ़ने की जरूरत है. एक महिला के रूप में, उन्होंने कुछ सुझाव दिए हैं. इस मुद्दे पर विचार व बहस ज़रूरी है.

आयुष्मान भारत पर बोले प्रधानमंत्री

आयुष्मान भारत योजना की विफलता के बारे में बातचीत को खारिज करते हुए, पीएम ने कहा कि इस योजना ने देश भर में लाखों लोगों की मदद की है और ऐसा कोई भी वादा नहीं है जो पूरा न किया गया हो. उनके मुताबिक, आयुष्मान भारत योजना के तहत गरीबों को 5 लाख तक का बीमा दिया गया है. बड़ी संख्या में लोग पीड़ित थे (स्वास्थ्य सेवा के लिए), आज उन्हें इलाज मिल गया है. वह कैसे इसे विफल माने?

भारत के मध्यवर्ग पर

देश के मध्यवर्ग के बारे में बात करते हुए, मोदी ने कहा कि यह समय है जब हम अपनी सोच बदलना शुरू करें. मोदी बोले कि मध्यम वर्ग कभी किसी की दया पर नहीं रहता है. वह गरिमा के साथ रहते हैं और देश को चलाने व विकास में अपार योगदान देते हैं.

(यह ख़बर भावना बिश्ट ने अंग्रेजी में प्रकाशित की है.)

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