हमारे देश में ऐसी अनेक युवा लड़कियां हैं जो खतरे से दूसरों को बचाने के लिए अपने जीवन को खतरे में डाल देती हैं। सरकार ने सात ऐसी लड़कियों की पहचान की है जिन्होंने बहादुरी के कृत्यों का प्रदर्शन करके देश को गर्वित किया है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी 24 जनवरी को उन्हें राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार देंगे।

इन लड़कियों और उनके बहादुर कामों के विषय में जानिए

1. नेत्रावती चवण कर्नाटक की एक 14 वर्षीय लड़की है जो दो भाइयों में से एक को बचाने में कामयाब रही जो 30 फीट गहरे तालाब में गिर गए थे। उनमें से छोटे भाई ने उसकी गर्दन बहुत कस कर पकड़ी हुई थी जिस कारण उसकी मृत्यु हो गयी. नेत्रवती को मरणोपरांत गीता चोपड़ा राष्ट्रीय बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

२. नाज़िया उत्तर प्रदेश में आगरा की रहने वाली 16 वर्षीय महिला हैं जिन्होंने जुआ और ड्रग माफिया को चलने वाले लोगों को जेल में पहुँचाया. उन्हें भारत पुरस्कार से सम्मानित किया गया है.

पढ़िए :यह 21 किलोमीटर मैरेथॉनर की कहानी आपको भागने के लिए प्रेरित करेगी

३. उड़ीसा से ममता दलाई सबसे कम उम्र की पुरस्कार विजेता हैं. वह अपने दोस्त को बचाने के लिए 5 फुट मगरमच्छ से लड़ी थी. उसने बापू गायधनी पुरस्कार जीता है.

४.लुक्रकंपम राजेश्वरी चानू को भी मरणोपरांत पुरस्कार मिलेगा। एक महिला और उसका बच्चा एक रसीले पुल से इंफाल नदी में गिर गए थे। राजेश्वरी ने मां-बच्चे की जोड़ी को बचाया परन्तु स्वयं नदी में बह गयी.

पढ़िए :जानिए किस प्रकार इन महिलाओं की सेना पृष्ठभूमि ने इन्हें एन्त्रेप्रेंयूर बनने में सहायता की

५. गुजरात की 16 वर्षीय समृद्धि शर्मा को सामान्य पुरस्कार प्राप्त होगा। उसने बहादुरी से एक बदमाश से लड़ लिया जो उसके घर में उस पर हमला कर रहा था।

६. रायपुर की रहने वाली लक्ष्मी यादव ने तीन दुश्मनों का अपहरण कर लिया था. वह उसे एक ऐसे स्थान पर ले गए जहाँ कोई न हो और उस पर यौन हमला करने की कोशिश की. लड़की सफलतापूर्वक हमले से बचने में कामयाब रही और अपराधियों को कैद कर लिया गया.

7. नागालैंड की मंशा एन भी बहादुरी का पुरस्कार प्राप्तकर्ता है.

इन 7 लड़कियों के अलावा, 11 लड़के भी हैं जिन्हें प्रधान मंत्री द्वारा बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित किया जायेगा.

पढ़िए : ५ महिला एन्त्रेप्रेंयूर जो लोगों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए काम कर रही हैं

Email us at connect@shethepeople.tv