24 वर्षीय इन्शाह बशीर, जो कश्मीर में बडगाम जिले के बीरवाह इलाके से है, खुद को एक शांत और मासूम बच्चे के रूप में याद करती है। इन्शाह,  2008 में अपने खुद के आधे -अधूरे घर में 40 फीट की ऊंचाई से गिरी जिसकी वजह से उन्होंने चलने की क्षमता खो दी। वह 12 वीं कक्षा में थी। हालाँकि,उन्होंने  इस चुनौती को स्वीकार किया कि यही जीवन है। वह बास्केटबॉल में रुचि रखती थीं और उन्होंने 2017 में हैदराबाद में राष्ट्रीय चैम्पियनशिप के लिए क्वालीफाई किया था। इन्शाह विशेष रूप से विकलांग बच्चों के लिए स्थापित एक विशेष प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षण ले रही है और अमेरिका में स्पोर्ट्स विजिटर प्रोग्राम 2019 में भाग लेने के लिए उत्सुक है।

शीदपीपल.टीवी ने  राष्ट्रीय मंच पर उनके अनुभवों के बारे में उनके साथ बातचीत की, अलग-अलग महिलाओं के खेल के खिलाड़ियों के रास्ते  में आई चुनौतियों के बारे में और उन्होंने अपने आत्मविश्वास को कैसे वापस पाया।

Insha Bashir, Wheelchair-Bound Basketball Player Kashmir

आपकी बास्केटबॉल टीम कैसे बनी?                                  

दरअसल, लड़कियों के लिए कोई विशेष टीम नहीं थी। बास्केटबॉल में रुचि दिखाने वाली लड़कियों में मैं पहली थी। मैंने लड़कों की टीम के साथ खेला और बाद में वर्ष 2017 में राष्ट्रीय स्तर पर, मुझे “रेस्ट ऑफ इंडिया” के रूप में एक टीम में चुना गया।

आपको बास्केटबॉल खेलने के लिए किसने प्रेरित किया?

घाटी में एक पुनर्वास केंद्र है, जिसका नाम शफाकत पुनर्वास केंद्र है, मैंने कुछ लोगों को अपने जैसी हालत में और यहां तक ​​कि अपने से भी बदतर हालत में देखा। उन्होंने मुझे उनसे जुड़ने का सुझाव दिया। सबसे पहले, मुझे लगा कि मैं इसे करने में सक्षम नहीं हो सकती, लेकिन फिर मैंने किया, और यह भी महसूस किया कि यह खेल व्हीलचेयर पर खेलने के लिए दिलचस्प और सुविधाजनक है।

Insha Bashir, Kashmir's First Woman Wheelchair-Bound Basketball Player

हमें उस दुर्घटना के बारे में बताएं जिसने आपका जीवन बदल दिया और आपने उस समय को कैसे पार किया?

मैं सिर्फ 15 साल की थी, 12 वीं कक्षा की छात्रा थी, जब मैंने उस दुर्घटना का सामना किया। मैं अपने आधे बने घर में 40 फीट की ऊंचाई से गिर गयी और उसके बाद मेरा जीवन बिखर गया। शुरुआत में, यह कठिन था। मुझे रीढ़ की हड्डी में चोट लगी और सर्जरी हुई लेकिन यह सफल नहीं रही। अपने पैरों पर चलने में सक्षम नहीं होने और चिकित्सा देखभाल की कमी ने मुझे जीवन के संघर्षों का सामना करना सिखाया। व्हीलचेयर मेरा एकमात्र सहारा बनी।

मैं अपने आधे – अधूरे बने घर में 40 फीट की ऊंचाई से गिर गयी और उसके बाद मेरा जीवन बिखर गया।

उस आघात से उबरने में मुझे बहुत हिम्मत चाहिए थी। मेरे परिवार और दोस्तों ने मुझे वापस लड़ने के लिए समर्थन दिया और मुझे अपनी खोई इच्छा शक्ति खोजने के लिए प्रोत्साहित किया। यह नौ साल का संघर्ष है जो अब खत्म हुआ है क्योंकि मुझे स्पोर्ट्स विजिटर प्रोग्राम 2019 में भाग लेने के लिए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से निमंत्रण मिला है। यह निश्चित रूप से मेरे लिए एक नई ऊंचाई होगी।

टीम के पीछे की प्रेरणा कौन था ?

यह जम्मू और कश्मीर लड़कों की व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम थी। उनकी मेहनत ने हमें प्रेरित किया। मैं अभी तक कप्तान नहीं हूं, लेकिन भविष्य में मैं अपनी महिला व्हीलचेयर बास्केटबॉल टीम की कप्तान बनना चाहूंगी।

Insha Bashir, Wheelchair-Bound Basketball Player Kashmir

दुर्घटना से जूझने से लेकर इसे राष्ट्रीय खेल आयोजन तक, एक कैरियर को संतुलित करने के लिए, आपको क्या खेल की ओर ले जाता है? यह आपके के लिए क्या मायने रखता है?

मैंने अपने कमरे में आठ साल बिताए। हर दिन मुझे लगता था कि मैं डिप्रेशन का शिकार हो रही हूँ। उस दुखद दुर्घटना के कारण खेलों के लिए मेरी रूचि काम हो गयी थी। आखिरकार, पुनर्वास केंद्र में मौका मिलने पर मै खेलों की ओर खींची। मेरे लिए, यह एक जीवन बदलने वाली बात है क्योंकि इसने मुझे व्यस्त कर दिया है जिससे मैंने अपनी मानसिक शांति का निर्माण किया और एक हद तक मेरी काया का भी। यह मेरा वह ज़रिया है जो दुनिया को मेरी क्षमता साबित करने के लिए प्रेरित करता है।

एक खेल के रूप में बास्केटबॉल मुझे मजबूत बनाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाता है।”

Insha Bashir, Wheelchair-Bound Basketball Player Kashmir

वर्कआउट की बात करें तो हमें अपनी फिटनेस और व्यायाम की दिनचर्या के बारे में बताएं।

मैं रोजाना जिम जाती हूं और एक नियमित दिनचर्या का पालन करती हूं। मैं अपने कोच द्वारा निर्धारित एक विशिष्ट डाइट चार्ट का पालन करती हूं। इसके अलावा, मैं हर दिन अपने खेल का अभ्यास करती हूं।

आपके रास्ते में आने वाली सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

पहली चुनौती यह स्वीकार करने की थी कि मैं अब व्हीलचेयर से बंध गयी हूं। दूसरी दुर्घटना के बाद खुद को फिर से मजबूत करना था। तीसरी चुनौती हमारे राज्य में बुनियादी सुविधाओं की कमी थी, क्योंकि वहाँ कोई सुलभ इमारतें, पार्क और बास्केटबॉल कोर्ट आदि नहीं हैं, और चौथा वह है जो हमारे देश में हर विकलांग व्यक्ति सामना करता है, विकलांग-अनुकूल वातावरण का सामना।

Insha Bashir, Wheelchair-Bound Basketball Player Kashmir

क्या जम्मू और कश्मीर में कोई अकादमी है जहाँ खिलाड़ी प्रशिक्षण प्राप्त करते हैं? वहां कितनी लड़कियां हैं?

नहीं बदकिस्मती से नहीं। मुझे मीडिया में चित्रित होते देख, कई लड़कियां अब इस खेल को अपना रही हैं, लेकिन हमारा राज्य किसी भी अकादमी को बनाने में मदद नहीं करता है।

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