मिनी माथुर, टीवी होस्ट और एक्टर, ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा कि जिस करियर पर मैंने इतनी मेहनत की है, उसे छोड़ने का कारण मातृत्व हो सकता है।”

अदाकारा, जो कि मौजूदा वक्त में माइंड द मल्होत्राज  नामक सिटकॉम में काम कर रही हैं, जब वर्किंग महिला के तौर पर मातृत्व के साथ अपने अनुभव के बारे में बोलती हैं, तब वह अपने किरदार की ही तरह अपराध भाव से मुक्त हो कर बात करती हैं।

मल्टीटास्किंग होने और वो कैसे चीजों को मैनेज करती हैं के बारे में बात करते हुए मिनी माथुर कहती हैं, “मेरा सचमुच मानना है कि यह ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल किया जाने वाला घिसापिटा वाक्य लगता है जब कहा जाता है कि खुश मां ही बेस्ट मां होती है।”

जहां वर्किंग मॉम्स के लिए काम और प्रेग्नेंसी में बैलेंस करना मुश्किल होता है, मिनी के लिए यह जरूरी था उनका शरीर, काम करना वापिस शुरू करने से पहले, ज़िम्मेदारी लेने के लिए रेडी हो जाए। “यह मेरे लिए ज़रूरी था कि मैं काम पर लौट जाऊं, जैसे ही मेरा शरीर वो करने की हालत में हो।”

एडजस्टमेंट्स और बैलेंस बनाना

“मैं इंडियन आइडल 4 के लिए शूटिंग कर रही थी जब मुझे पता चला कि मैं गर्भवती थी, इसलिए मुझे इंडियन आइडल छोड़ना पड़ा क्योंकि इंडियन ऑडिएंस एक प्रेगनेंट होस्ट को देखने के लिए अभी तक तैयार नहीं।” आगे बात करते हुए वो कहती हैं, “मुझे यह एक सेटबैक लग रहा था, मैं गुस्सा थी। लेकिन मैंने अपने घर पर रहने वाले एक एक मिनट में आनंद लिया और उसे सफल बनाया।” यह ज़रूरी है कि महिलाएं अपने बच्चे और अपने शरीर को समय दें। “काम आपके पास आएगा और आप अंत में काम पर लौट जाएंगे…. मेरा माओं के लिए यही सुझाव है कि ज़्यादा लंबा ब्रेक ना लें।” वह आगे कहती हैं, “कुछ माएं हैं जो 3 महीने बाद ही काम पर वापिस लौट जाती हैं, आपका शरीर तैयार नहीं होता। आपने बहुत मेहनत की है और यह समय आपके आराम का है।”

काम आपके पास आएगा और आप अंत में काम पर लौट जाएंगे…. मेरा माओं के लिए यही सुझाव है कि ज़्यादा लंबा ब्रेक ना लें।

समय बदलने के बावजूद भी महिलाएं ही हैं जो बच्चे के देखभाल कि ज़िम्मेदारी लेती हैं, फिर चाहे वो काम भी कर रही हों। नैपीज बदलने से लेकर ऑफिस में काम करने तक, औरतें ही सब करती हैं।

मिनी का इसपर क्या कहना है?

“एक हद तक भारतीय पुरुष बिगड़े हुए हैं, इसलिए हमें आनेवाले जेनरेशन से बदलाव लाना पड़ेगा। जिस तरह से मैं अपने बेटी को पालती हूं उसी तरह से मैं अपने बेटे को पालती हूं…. आधी जंग आप उसी वक़्त जीत जाते हैं अगर आपके पति आपके पंखों को उड़ने के लिए हवाएं दे…. चीजें होती हैं मगर मुझे मानना पड़ेगा कि मुझे एक्स्ट्रा हार्ड काम करना पड़ता है।”

“मेरा मानना है कि औरतों को सारे काम खुद से करना बंद कर देना चाहिए, अपने पति से मदद मांगें! आपको यह स्पष्ट रूप से कहना ही पड़ेगा, वो भी बिना किसी ग्लानि के।” वो आगे कहती हैं कि वो कभी अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करती कि “तुम किचेन सेट से खेलो और तुम डॉक्टर सेट से। आज मेरा बेटा सुशी शेफ है और किचेन से प्यार करता है जबकि मेरी बेटी नहीं।”

गिल्ट और पर्सनालिटी में बैलेंस बनाना

एक प्रमुख युद्ध जिसका वर्किंग महिलाओं को सामना करना पड़ता है, वो है गिल्ट । वो अपने बच्चों को काम की वजह से घर पर छोड़ कर आने की वजह से गिल्ट में रहती हैं और खुद को हमेशा दोष देती रहती हैं।

मेरा मानना है कि औरतों को सारे काम खुद से करना बंद कर देना चाहिए, अपने पति से मदद मांगें! आपको यह स्पष्ट रूप से कहना ही पड़ेगा, वो भी बिना किसी ग्लानि के।

मिनी माथुर इससे कैसे डील करती हैं?

मिनी माथुर का कहना है, “गिल्ट  एक ऐसी चीज है जिससे कोई नहीं बच सकता। जब आपके बच्चे छोटे होते हैं तब आपको ग्लानि होती है कि आप उनकी देखभाल के लिए मौजूद नहीं होते। जब वो बड़े हो जाते हैं तब आपको लगता है आपको उनसे बातें करनी चाहिए, महिलाएं ग्लानि से कभी बच ही नहीं सकतीं।” वह आगे कहती हैं, “ग्लानि से निपटने का मेरा तरीका ये था कि मैंने अपने जीवन को भागों में बांट दिया। मुझे पता होता है कि ये मेरे काम करने का वक़्त है लेकिन जब मैं घर पे होती हूं तो वो वक़्त मेरे बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम होता है, और कुछ नहीं।” हालांकि, वो ये भी कहती हैं, “जो उपलब्धियां आज महिलाएं पा रही हैं, कांच की दीवारें तोड़ती हुईं… , उसके लिए आपको कोई ना कोई कीमत चुकानी पड़ती है।” अगर आप अपना क्वालिटी समय घर पे दे रहे हैं, तो क्वांटिटी की चिंता ना करें। खुद की चिंता करें, ये सोचें कि आनेवाले दो सौ सालों में औरतें क्या करेंगी? खुद को आज़ाद करें और गिल्ट को भूल जाएं। “मुझे ये खुद के लिए करना होगा। मैं भी महत्वपूर्ण हूं।”

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