“अगर एक आदमी सबकुछ नष्ट कर सकता है, तो एक लड़की इसे क्यों नहीं बदल सकती?” मलाला यूसुफज़ई के ये शब्द बताते है कि किस तरह से उन्होंने समाज में निरंतर प्रयासों के ज़रिये बदलाव लाने की कोशिश की है. तालिबानियों द्वारा उन्हें गोली मारे जाने से लेकर सबसे कम उम्र की नोबेल पुरस्कार विजेता बनने तक का सफर मलाला का ऐसा है जो लाखों लड़कियों को प्रेरणा देता है.

हमने कुछ युवा लड़कियों से पूछा कि वह मलाला को अपनी प्रेरणा क्यों मानती हैं ?

लड़कियों का मार्गदर्शन करने वाली

“एक  लड़की जो एक तरह से नरक में रह रही थी और उसके बाद वह उस मुक़ाम में पहुंची जिसमें आज वह है यह दुनिया की सबसे प्रेरणादायक कहानी है. ” नैनीताल की भावना बिष्ट कहती हैं, “मलाला ने अपनी दृष्टि, क्षमताओं और काम के माध्यम से  अरबों लड़कियों को एक रोशनी दिखाई है जो जीवन में कुछ हासिल करना चाहती है और एक ऐसी ज़िंदगी जिना चाहती है जिसपर वह गर्व महसूस कर सकें.”

इस पीढ़ी का एक अभिन्न हिस्सा

नैनीताल में ही बैंकर के रूप में कार्यरत 24 वर्षीय अपूर्व जोशी का मानना है कि मलाला इस पीढ़ी के अभिन्न अंग के रूप में कार्य करती है.

“वह सही अर्थों में परिवर्तन, मानवता और प्रेरणा का प्रतीक बनी हुई है. यह नोबेल शांति पुरस्कार विजेता लड़की दुनिया को लड़कियों के लिये एक बेहतक जगह बनाने के लिये काम कर रही है और इससे ज्यादा प्रेरणादायक कोई बात नही हो सकती है जो काम वह इतनी छोटी उम्र में कर रही है. ”

साहस और दृढ़ संकल्प का प्रतीक

पारूल सोनी जो लेडी श्री राम कॉलेज से इकोनॉमिक्स ऑनर्स कर रही है कहती है कि वह उनकी उम्र के आसपास ही उन्होंने जो साहस और दृढ़ संकल्प दिखाया वह काफी प्रेरणादायक है.

“वह बहादुर है और उन्होंने अपने देश में दमनकारी ताकतों को उन्हें रोकने नहीं दिया. उन्होंने लगभग अपना जीवन गंवा ही दिया था लेकिन उसके बावजदू वह आगे बढ़ी”- परुल सोनी

समाज को वापस देने में विश्वास करती है

आईपी यूनिवार्सिटी से पत्रकारिता में मास्टर्स कर रही दीपाली मग्गों कहती है, “मैं अपनी में मलाला यूसुफज़ई को एक नायिका के तौर पर देखती हूं.  वह तालिबान के खिलाफ खड़ी हुई. उन्होंने पाकिस्तान जैसे देश में महिला शिक्षा के लिए प्रयास किये.  मैं उनके साहस की प्रशंसा करती हूं जो उन्होंने शिक्षा और शांति के लिए लड़ते हुये हमें बताया.  हमले के बाद उन्होंने मलाला फंड भी बनाया जिसका मक़सद दुनिया भर के बच्चों की मदद करना था. वह केवल 21 वर्ष की है और मैं उन चीज़ों की प्रशंसा करते हुये नही थकती हूं जो उन्होंने अब तक की है.”

“उनकी कहानी मुझे जीवन में आने वाली छोटी छोटी बाधाओं को दूर करने और भविष्य की ओर देखने के लिए प्रेरित करती है. मुझे यह अच्छा लगता है कि किस तरह उन्होंने अपने सामने आने वाली परिस्थितियों को नही छोड़ा बल्कि इसके बजाय संघर्ष किया.”- निमिशा बंसल

आपको कभी न हारने की सीख देती हैं

लेडी श्री राम कॉलेज की निमिशा बंसल ने कहा कि मलाला दुनिया भर की लड़कियों के संघर्ष का प्रतिनिधित्व करती है.  जिन्होंने उत्पीड़न, अन्याय और असमानता का सामना किया है और उसके बाद इन सब चीज़ों से बहादुरी के साथ बाहर आयी.

वह कहती है, “उनकी कहानी मुझे जीवन में आने वाली छोटी छोटी बाधाओं को दूर करने और भविष्य की ओर देखने के लिए प्रेरित करती है. मुझे यह अच्छा लगता है कि किस तरह उन्होंने अपने सामने आने वाली परिस्थितियों को नही छोड़ा बल्कि इसके बजाय संघर्ष किया. उन पर किये गये हमले ने उन्हें और मज़बूत बनाया. शिक्षा और महिलाओं के अधिकारों के क्षेत्र में उनका काम सराहनीय है.  वह दुनिया भर में लड़कियों और मानवीय कार्यकर्ताओं के लिए एक रोल मॉडल है.

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