आज 53 वर्ष के हो रहे है शाहरुख खान को महिलाएं बहुत पसंद करती है. एक कलाकार के रूप में खान न सिर्फ एक संवेदनशील नायक है बल्कि जागरूक भी हैं. पुरुष नायकों द्वारा परिभाषित बॉलीवुड में प्रवेश करने के बावजूद, खान अभी भी खुद को अलग रखने में कामयाब रहे. 25 से अधिक वर्षों से एक सुपरस्टार रहना एक छोटी उपलब्धि नहीं है. वह भी, ज्यादातर रोमांटिक रोल करके.

करण अर्जुन, डॉन, फैन, राईस, खान की फिल्मोग्राफी जैसी एक्शन पैक फिल्मों के बावजूद बड़े पैमाने पर उनके पात्र संवेदनशील रहे है विशेष रूप से उनकी भूमिकायें जिसमें वह प्रेमी के रूप में आये है. कोई आश्चर्य नहीं कि उनके अधिकांश प्रशंसकों ने उन्हें बॉलीवुड के रोमांस के राजा के रूप में उन्हें माना है. रोमांटिक नायक के रोल में उत्कृष्टता के अलावा, खान जटिल और संवेदनशील पात्रों को चित्रित करने के भी चैंपियन है.

खान की कुछ लोकप्रिय फिल्मों में क्या बात एक सी है जैसे दिलवाले दुल्हनिया ले जायेंगे (फिल्म के आखिरी चरण में लड़ाई को छोड़कर), कुछ कुछ होता है, कल हो ना हो और दिल तो पागल है?

इन फिल्मों ने इस धारणा को ज़ाहिर किया है कि हमारे देसी नायक नरम और भावनात्मक भी हो सकते हैं.  उनके द्वारा निभाये गये अधिकांश राज और राहुल के रोल मेट्रो-सेक्शुअल कैरेक्टर रहे हैं, जिसमें उनका भावनात्मक पक्ष दिखता है. खान इसी वजह से सही विकल्प थे जब संजय लीला भंसाली ने देवदास फिर से बनानी की सोची, क्योंकि अभिनेता को पता था कि दुखद आत्म विनाशकारी प्रेमी का रोल निभाने के लिये किया गया था. उनकी पीढ़ी का कोई अन्य अभिनेता इस शीर्षक चरित्र की जटिलता के साथ न्याय नहीं कर सकता था. देवदास स्वभावपूर्ण, क्रोधित और निराश है. लेकिन सबसे ऊपर, वह एक नशे की लत में लगा हुआ है जिसका भावनाओं और उसके उपायों पर कोई नियंत्रण नहीं है.

कुछ ख़ास बातें.

  • बॉलीवुड में एक अग्रणी व्यक्ति के रूप में 25 से अधिक वर्षों में, शाहरुख खान ने संवेदनशील नायक बनने का एक सचेत प्रयास किया है.
  • उनके दृष्टिकोण ने इस विचार को सामान्य बनाने में मदद की है कि पुरुषों को हर समय माचो होने की आवश्यकता नहीं है.
  • देवदास में चरित्र के साथ उनकी पीढ़ी का कोई अन्य अभिनेता न्याय नहीं कर सकता था.
    उनके जन्मदिन पर, हम पुरुषों को बतायेंगे कि वह उन्हें धन्यवाद दे क्यों कि उन्होंने ही महिलाओं के प्रति करुणा और इज़ाज़त का भाव उन महिलाओं के प्रति जगाया जिन्हें वह प्रेम करते है.
  • लेकिन शाहरुख ने अपने करियर में बहुत जल्दी संवेदनशील पुरुष पात्रों को निभाने का एक संबंध दिखाया.

कभी हां कभी ना, में उन्होंने प्यार में फंसे सुनील का रोल निभाया. किसी भी पारंपरिक नायक के विपरीत, सुनील अभी तक आकर्षक है. वह शिक्षा में ज्यादा कुछ नही कर पाया लेकिन एक प्रतिभाशाली संगीतकार है. और वह एक लड़की से प्यार करता है,  जो किसी और के साथ प्यार करती है. मुझे यकीन है कि नब्बे के दशक के कई पुरुष कलाकार इस स्क्रिप्ट को छूने की हिम्मत नहीं करेंगे. लेकिन खान ने किया, और इसमें उन्होंने अपने व्यक्तिगत ब्रांड के आकर्षण और दृढ़ विश्वास को चरित्र में लाया, जिसने सुनील को सिर्फ पसंद करने योग्य नहीं बल्कि लोगों ने उसे अपने बीच का ही पाया.

तब से हमने देखा है कि खान ने कई बार स्क्रीन पर पुरुष नायक के संवेदनशील पक्ष को दिखाया है. उनके दृष्टिकोण ने इस विचार को सामान्य बनाने में मदद की है कि पुरुषों को हर समय माछो होने की आवश्यकता नहीं है. कि नायक को हमेशा आकर्षक या आक्रामक होना जरुरी नही है. उन्होंने अपने पात्रों के माध्यम से रोमांस के विचार को भव्यता दी है, जबकि स्वदेस, चक दे, दिल से या डियर जिंदगी जैसी फिल्मों के साथ उन्होंने सामान्य पुरुष व्यक्ति के अधिक अनुकूल होने के लिए आदर्श पुरुष लीड का रोल निभाया है.

उनके जन्मदिन पर, हम उन्हें धन्यवाद देकर बताना चाहते है कि उन्होंने पुरुषों को बताया कि वह महिलाओं के प्रति करुणा और इज़ाज़त का भाव पैदा करके जिन्हें जिन्हें वह प्रेम करते है.

वह दिल टूटने पर रो भी सकते है. या गाना गाने, डांस करने और सॉफ्ट रंग के कपड़े पहनने से वह किसी भी तरह से मर्दों से कम नही हो जाते है.

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