डिजिटल महिला पुरस्कार में एक पैनल भी मौजूद था जिसने स्टोरी टेलिंग, उसके भविष्य और डिजिटल स्पेस की भूमिका पर चर्चा की. किरण मनराल द्वारा संचालित पैनल में अलग अलग तरह के कटेंट निर्माता शामिल थे – टाकेटिव की संस्थापक प्रियंका सिन्हा झा, ट्रेवल ब्लॉगर शिव नाथ, लेखक और पटकथा लेखक कनिका ढिल्लों और अभिनेत्री सयानी गुप्ता शामिल थी. एक सार्थक वार्तालाप में इन्होंने स्टोरी टेलिंग की ताक़त और उनके स्पेस के बारे में बात की.

किरण ने इस बात पर बात करते हुये बताया कि स्टोरी टेलिंग हमारे अस्तित्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं और वही उन्होंने बताया कि कैसे डिजिटल दुनिया आज की गेम चेंजर है.

सोशल मीडिया पोस्ट और टिप्पणियों में मिल रही है आज़ादी के साथ, यह अपनी राय शेयर करने का एक आसान और अच्छा स्थान बन गया है- प्रियंका सिन्हा झा

प्रियंका ने पारंपरिक मीडिया और डिजिटल मीडिया के बीच तुलना की.

इस बात पर जोर देते हुए कि डिजिटल स्पेस रहस्यमयी है और इसकी अनौपचारिकता अंतर्दृष्टिपूर्ण है, उन्होंने कहा कि लोग किस तरह से इस माध्यम के साथ जुड़े हुए हैं. “यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि कहानी लोगों के साथ मेल खा रही है या नही और डिजिटल प्लेटफार्म इसे पता लगाने का सबसे अच्छा तरीका है.”

स्टोरी टेलिंग एक दिलचस्प चीज़ बन गई है क्योंकि माध्यम बदल रहे हैं और दर्शक बढ़ रहे हैं – कनिका ढिल्लों

उपन्यास लिखने और फिल्मों के लिए लेखन की चुनौतियों के बारे में कनिका ने कहा, “आप एक उपन्यास में प्राथमिक निर्माता होते है और फिल्म टीमवर्क होती है. उपन्यासों के विपरीत, स्क्रीनप्ले आर्गेनिक हैं. पटकथा में संक्षिप्तता की आवश्यकता है. एक लेखक के रूप में, मैं अपने शब्दों और मेरे पाठकों की कल्पना का परिणाम उठाने के लिए उपयोग करती हूं. ”

उन्होंने देखा कि स्क्रीनप्ले की तुलना में लेखकों के लिए उपन्यास अधिक अनुग्रहशील हैं. उपन्यासों के साथ, उन्होंने कहा, उसकी दृष्टि उसके दिमाग़ में होती है और वह सीधे अपने पाठकों से जुड़ती है. “एक फिल्म में, एक पूरी सेना होती है जिससे आपको निपटना होता है.” उन्होंने आगे कहा, यह सामाजिक कौशल है जिसमें वास्तव में स्क्रीन राइटर के तौर पर एक लेखक से बेहतर होने की जरुरत होती है.

कहानियों के डिजिटल पहलू पर बात करते हुये, कानिका ने कहा, “हर कोई डिजिटल एक्सेस की कहानी बता रहे है. हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कंटेट सिर्फ एक क्लिक दूर है, लेकिन इसकी पहुंच एक दो मुंही तलवार है. “

डिजिटल व्यक्तिगत रूप से सशक्त बना रही है. हमें हमेशा बताया गया है कि घर हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण और केवल एक जगह है. तकनीक की ताक़त की वजह से मैं गर्व से स्थायी पते के बिना दुनिया में कहीं से भी काम कर सकती हूं-शिव्या नाथ

शिव्या जो डिजिटल नामेड की जिंदग़ी जीती हैं और अब एक पुस्तक में अपने यात्रा अनुभवों को लिख कर बाता रही है कहती है कि, “कि कैसे डिजिटल की बड़ी पहुंच है लेकिन एक ही समय में अव्यवस्था में कटौती करना भी महत्वपूर्ण है.  बात की जा रही है कि किस तरह से  मुसाहारी  समाज ने उत्तराखंड में उनके ऊपर एक बड़ा प्रेरणादायक प्रभाव छोड़ा है.

शिव्या ने बताया कि किस तरह से डिजिटल ने उसे सशक्त बनाया. उन्होंने यह भी बताया कि कैसे ग्रामीण समुदाय अपने जीवन को बेहतर बनाने और दुनिया भर के लोगों को अपनी कहानियों को बताने के लिए डिजिटल का उपयोग कर रहे हैं.

कलाकार सयानी गुप्ता एक आट्रिस्ट और कलाकार है जिन्होंने डिजिटल माध्यम के प्रभाव पर अपनी बात रखी. “एक अभिनेता और कलाकार के रूप में, आप बस अपना काम कर रहे हैं और बगैर किसी मिडियम के. लेकिन निर्माताओं और लेखकों के रूप में, डिजिटल स्पेस लोगों के ध्यान को आकर्षित करना है.”

सयानि गुप्ता – डिजिटल कंटेट में फ़िल्टर की कमी होती है. हम कैसे एक लाइन खिचें? हम जिस सामग्री का उपभोग करते हैं, उसके लिए हम कैसे जिम्मेदार बन जाते हैं?

स्टोरी टेलिंग का विकास और लोग किस तरह से प्रिंट और डिजिटल मीडिया का उपयोग करते हैं

प्रियंका ने सभी माध्यमों के बीच संतुलन बनाए रखने के बारे में बात की. “हमें संतुलन खोजने की जरूरत है. डिजिटल सशक्त बनाती हैं क्योंकि आप जो भी चाहें उसे डाल सकते हैं, यह समझना महत्वपूर्ण है कि सामग्री को अपना उपभोक्ता मिल जाता है. स्केलेबिलिटी बाद में है. हां, एक नकारात्मकता है क्योंकि अनौपचारिकता की जो डिग्री है उसपर प्रश्न उठाया जाता है. हालांकि, एक कंटेट बनाने वाले के रुप में यह कहानियों के लिए बेहद सशक्त है और सोशल मीडिया पर पहुंचाता है.” उन्होंने इस बारे में भी बात की कि वर्तमान में हम महत्वपूर्ण रूप से समाचार अधिक योग्य और प्रामाणिक कैसे बना सकते हैं और इकलौते पहलुओं पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते हैं.

कनिका ने पूरी फेक़ न्यूज़ घटनाओं पर अपनी चिंता व्यक्त की जो वर्तमान में चल रही है. “यहां नकारात्मकता यह है कि कहानियों के क्रॉस प्लेटफार्म हैं, जहां लोग व्हाट्सएप जैसे चैनलों पर फेक़ न्यूज़ और एजेंडा साझा कर रहे हैं, जो परेशान करने वाली है. जिसके लिये कोई नियन नही है.”

सयानी ने चर्चा में कहा कि लोकतंत्र के साथ एक बड़ी ज़िम्मेदारी आती है. “यह जानना महत्वपूर्ण है कि हम अपनी सीमायें तय करें और सामग्री और कहानियों के लिए ख़ुद ही  उत्तरदायी होना पड़ेगा जो हम उसमें डाल रहे है. ”

हम किस तरह से देखते है समुदायों को विकसित होते हुये और आगे आते हुयें?

पैनल ने एक दिलचस्प राय दी कि स्टोरी टेलिंग कैसे ज्यादा समावेशी होनी चाहिए. शिव्या ने अपने निजी अनुभव को साझा किया कि स्टोरी टेलिंग का सार अभी भी वही है. “मैंने एक लंबे समय तक इंस्टाग्राम का उपयोग से बचती रही क्योंकि वह एक विजुयल प्लेटफार्म है और मैं एक फोटोग्राफर नहीं थी. मेरी कहानियां टेक्स्ट-आधारित थी,  लेकिन एक सामग्री निर्माता के रूप में, आगे बढ़ने और ब्रांड साझेदारी करने के लिए मुझे इंस्टाग्राम में आने की आवश्यकता थी, और इसलिए मैंने इसका इस्तेमाल शुरु किया. मेरे लिए, यह मंच भी है जहां मैं लंबे प्रारूप वाले कैप्शन जारी रखती हूं. मुझे विश्वास है कि यह जगह एक कहानीकार के रूप में किसी के ध्यान को आकर्षित करने का काम करती है.”

कनिका ने इस बात पर जोर देकर चर्चा समाप्त की कि इन दिनों व्यक्तिगत उपभोक्ताओं की कैसी लहर है और कोई समुदाय निर्माण प्रक्रिया नहीं है.

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