आज हिंदी दिवस है. हिंदी दिवस इस मायने में महत्वपूर्ण हो जाता है कि भारत की लगभग आधी आबादी हिंदी बोलती है. इस देश ने कई महिला सहित्यकार दिये है जिन्होंने हिंदी के ज़रिये अपनी जगह अपनी लेखनी से बनाई. आइये हम जानते है उनमें से कुछ के बारे में.

  1. महादेवी वर्मा– महादेवी वर्मा का शुमार देश की सबसे प्रसिध्द हिंदी सहित्यकारों में होता है. वह स्वतंत्रता सेनानी भी थी. उनको हिन्दी की सर्वाधिक प्रतिभावान कवयित्रियों में से भी जाता है. उन्हें आज के ज़माने की मीरा कहा जाता था. उनकी लेखनी बहुत ही व्यापक थी. उन्होंने हर तरह की चीजें लिखी जिसमें गद्य, पद्य के अलावा बाल सहित्य भी शामिल है. उन्होंने लगभग 50 साल तक हिंदी सहित्य की सेवा की. उनकी ख़ासियत यह थी कि वह अंतिम समय तक कुछ न कुछ लिखती रही.
  2. कृष्णा सोबती– कृष्णा सोबती, हिंदी की फिक्शन और निबंध लेखिका थी. उनका नाम भी हिंदी सहित्य में बहुत इज़्जत के साथ लिखा जाता है. उनका जन्म पाकिस्तान के गुजरात में हुआ था. उन्हें उन्हें 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार और 1996 में साहित्य अकादमी अध्येतावृत्ति से सम्मानित किया गया था. उन्हें उनकी रचनात्मकता के लिए जाना जाता था. 2017 में इन्हें भारतीय साहित्य के सर्वोच्च सम्मान “ज्ञानपीठ पुरस्कार” दिया गया. हालाकिं कहा जाता है कि उन्हें यह पुरुस्कार काफी देर से मिला.
  1. शिवनी गौरी पंत– इनका असली नाम गौरी पंत था लेकिन यह शिवनी नाम से लिखा करती थी. यह हिंदी की जानी मानी उपन्यासकार थी. इन्होंने काफी कम उम्र में लिखना शुरु कर दिया था. और उनका लेखन उनके अंतिम समय तक जारी रहा. हिंदी के अलावा उनकी पकड़ कई भारतीय भाषाओं में थी. इसके अलावा वह अंग्रेज़ी की भी अच्छी जानकार थी. उन्होंने ज्यादातर महिलाओं को ध्यान में रख कर कहानियें लिखी.
  2. मन्नू भंडारी– मन्नू भंडारी भी हिंदी की जानी मानी कहानीकार है. इनका असली नाम महेंद्र कुमारी था लेकिन लेखन के लिये यह मन्नू नाम का इस्तेमाल करती रही. इनकी सबसे प्रसिध्द उपन्यास ‘आपका बंटी’ और ‘महाभोज’ रही है. ‘महाभोज’ में इन्होंने आप आदमी की पीड़ा को बताने का प्रयास किया है. इस पर नाटक भी बनाया गया था. वही ‘आपका बंटी’  में एक बच्चें को बताया गया है जो विवाह टूटने की वजह से घटता रहता है.
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