जोड़े जिनकी पहली संतान के रूप में एक बेटी है और वह अपना दूसरा बच्चा जल्द ही इस दुनिया में लाने वाले है तो यह अनुमान लगाया जा रहा है की इन मामलो में लिंग निर्धारण का प्रयास करने और कन्या भ्रूण हत्या करवाने की सबसे अधिक संभावना है।

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग का मानना ​​हैकी इस बात को ख़ास तोर पर निर्धारित करने के लिए स्वस्थ्य और परिवार कल्याण विभाग ऐसी गर्भधारण की निगरानी के लिए एक कार्य योजना के साथ सामने आया है।

5 मार्च से आरोग्यवाणी, विभाग की आरोग्य हेल्पलाइन विंग , हर हफ्ते चार लाख तक कॉल करेंगे उन महिलाओ को जिनकी पहली संतान बेटी है और वो दूसरी संतान के लिए गर्भवती है ।

हम इन महिलाओं को ट्रैक करेंगे क्योंकि ऐसे मामलों में कन्या भ्रूण हत्या की संभावना अधिक होती है। किसी भी अप्रिय घटना के मामले में, हम पुलिस को लूप में रखेंगे और यदि आवश्यक हो, तो एफआईआर दर्ज कर सकते हैं, क्योंकि यह जागरूकता पैदा कर सकता है, “डॉ प्रभु गौड़ा,उप निदेशक, पीसीपीएनडीटी सेल, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग।

गर्भवती महिलाओं को टेटनस इंजेक्शन, नियमित कैल्शियम, आयरन सप्लीमेंट की दो खुराकें मिली हैं या नहीं, इसकी जाँच करने के अलावा, महिला एवं बाल कल्याण विभाग द्वारा लागू मटरू भोजन योजना का लाभ उठा रही हैं, आरोग्यवाणी उनकी मनोवैज्ञानिक भलाई पर भी ध्यान देगी।

हम जरूरत पड़ने पर महिलाओं की काउंसलिंग करेंगे और साप्ताहिक कॉल के जरिए उनके स्वास्थ्य पर नजर रखेंगे। हम सरकार द्वारा जारी किए गए थायी (मदर) कार्ड के जरिए महिलाओं को ट्रैक करेंगे।”

विभाग के पास पहले से ही गर्भवती महिलाओं का एक डेटाबेस है। प्रत्येक गर्भवती महिला के डिटेल्स, जिनमें आईडी प्रूफ और पता शामिल है, जो किसी भी पंजीकृत केंद्र में स्कैनिंग से गुजरती हैं, को बालिका सॉफ्टवेयर में खिलाया जाता है।

 

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