भारतीय शादियां अपनी असाधारण प्रकृति के लिए जानी जाती है. उत्सवों पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं. लेकिन इसे बदलाव कहा जायेंगा कि बहुत से नवजवान अब इस मौके का उपयोग समाज में बदलाव लाने के लिये कर रहे है. आइयें पांच ऐसी भारतीय शादियां के बारें में जानें जिन्होंने परंपराओं को बदला

  1. शादी के दिन रक्तदान कैंप

जब बंगाल के संदीप रॉय और श्रीला मंडल ने शादी करने का फैसला किया तो धूम धड़ाके वाली परंपरिक भारतीय शादी उनके दिमाग़ में नही थी. इसके बजाय इस जोड़े ने रक्त दान कैंप का आयोजन किया जहां वे और अन्य मेहमानों ने रक्त दान किया.

यह जोड़ा इस बात से भली भाती वाक़िफ था कि हर गर्मियों में बंगाल में रक्त की कमी होती है. इसी वजह से इन्हें यह कैंप आयोजित किया. यह रक्तदान के संदेश को फैलाने का भी तरीका था. दुल्हा और दुल्हन ने अपने दोस्तों और परिवार को इस बात के लिये तैयार कर लिया कि उपहारों के बजाय, वे शादी के जश्न में रक्त दान करेंगे.

  1. दुल्हन घोड़े पर बैठी

25-साल की जिया शर्मा, जो कि राजस्थान के अलवर जिले के बेहरोर कस्बे से ताअल्लुक रखती थी वह अपने विवाह समारोह को यादगार बनाना चाहती थी, जो महिला सशक्तिकरण का संदेश दे.  तो वह एक घोड़ा गाड़ी में  बैठी और बारात के साथ दूल्हे के घर गई. उन्होंने सदियों पुरानी परंपरा को तोड़ने की हिम्मत दिखाई, वही हमें दूल्हे के परिवार की भी प्रशंसा करनी चाहिये जिन्होंने इस अलग तरह की शादी के लिये हामी भर दी. एमए अंग्रेजी साहित्य की छात्रा  जिया की बारात उसी तरह से गई जैसे दूल्हे की जाती है. उनके दोस्तों ने सड़क पर नृत्य किया.

  1. शादी के तोहफे के रूप में विशेष शिक्षण उपकरण

पलोमा दत्ता जो कि एक ट्रेवल लेखिका और पेंगुइन रैंडम हाउस की संपादक है, उन्होंने और उनकी साथी वेद बरुआ, जो कि इतिहासकार है और स्टैथक्लाइड विश्वविद्यालय, ग्लास्गो में काम करते है ने अपनी शादी में एक सामाजिक काम को सामने रखा. अपने शादी के निमंत्रण में उन्होंने बताया कि वह लोग एक एनजीओ शिशु सरोथी से जुड़े है और  विशेष जरूरतों वाले बच्चों को उपहार देना चाहते है. इसलिए  उन्होंने मेहमानों से अनुरोध किया कि शादी के तोहफे के तौर पर या तो ‘विशेष शिक्षण उपकरण’ या नियमित आइटम जैसे क्रेयॉन, पेंसिल, इरेज़र, नोटबुक इत्यादि लेकर आयें.  उन्होंने एक नोट में यह भी बताया कि शादी के दौरान मिलने वाले पैसों का उपयोग भी इस काम के लिये किया जायेंगा.

  1. उनके विवाह के लिए साइकिल पर आयें

258 दूल्हे अपने रिश्तेदारों के साथ 7 नवंबर को सूरत में शादी के लिये तय स्थान पर पहुंचे. वजह यह थी कि वह लोग ट्रैफिक और प्रदूषण को लेकर जागरुकता पैदा करना चाहते थे. यह सब कुछ 58वें सामूहिक विवाह के मौके पर की गई जिसका आयोजन सामाजिक संस्था सौराष्ट्र पटेल सेवा समाज ने किया था.

  1. 500 रुपये में शादी करना

विजयवाड़ा की सब-कलेक्टर डॉ सलोनी सिडाना ने मध्य प्रदेश कैडर के एक भारतीय प्रशासनिक सेवा  के अधिकारी आशीष वशिष्ठ से मात्र 500 रुपये ख़र्च करके विवाह कर लिया. यही नही वे लोग मात्र 48 घंटों के अंदर ही अपने काम की जगह पर लौट कर आ गये.

आप अपनी शादी पर कौन सी परंपरा बदलेंगे?

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