हम में से बहुत से लोग खुद का उद्यम शुरू करने के बारे में सोचते हैं, लेकिन हम शायद ही इसे शुरु कर पातें है. ऐसा इसलिए नही हो पाता है क्योंकि शायद समाज हमें कम उम्र का समझ कर गंभीरता से नही लेता है. इसके बावजूद जो भी चुनौतियां है, हमारे देश में कुछ युवा महिला उद्यमी हैं जो स्टार्टअप के परिदृश्य को बदल रही हैं. यहां पांच युवा सुपर वुमेन हैं जो आपको अपने सपनों को पूरा करने के लिये प्रेरित कर रही है:

जन्नत बहल, बेबेल मी

2015 में जन्नत बहल द्वारा शुरु किया गया, बेबल मी बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए ऑनलाइन चिकित्सा प्रदान करता है. ब्रिटेन से अपने उच्च अध्ययन पूरा करने के बाद, जन्नत को भारत में मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता फैलाने की आवश्यकता महसूस हुई. यह सामान्य मानसिक विकारों जैसे चिंता, अवसाद और तनाव के साथ संघर्ष को थोड़ा आसान बनाने का प्रयास करता है. यह आपको अपनी आवश्यकताओं के अनुसार एक चिकित्सक से जोड़ता है और आपकी पहचान को छुपायें रखता है.

“किसी को भी आप यह बताने न दें कि आप उद्यमी बनने के लिए बहुत छोटी हैं क्योंकि कोई भी काम शुरू करने की कोई सीमा नहीं होती है. इसलिए यदि आपके पास ऐसा विचार है जो आपको लगता है कि इससे दुनिया में फर्क्र पड़ सकता है और आपके करियर और जीवन को बनाए रखने में सक्षम होगा, तो आज से ही शुरू करें.” – अफरीन अंसारी

अफरीन अंसारी, माई चाइल्ड ऐप

अफरीन अंसारी कहती है,”किसी को भी आप यह बताने न दें कि आप उद्यमी बनने के लिए बहुत छोटी हैं क्योंकि कोई भी काम शुरू करने की कोई सीमा नहीं होती है. इसलिए यदि आपके पास ऐसा विचार है जो आपको लगता है कि इससे दुनिया में फर्क्र पड़ सकता है और आपके करियर और जीवन को बनाए रखने में सक्षम होगा, तो आज से ही शुरू करें.” अपने कॉलेज के मित्र हर्ष के साथ, अंसारी ने माई चाइल्ड ऐप शुरू किया जब वे केवल 19 साल की थी. फोर्ब्स की 30 में 30 एशियाई सूची में विशेष रुप से प्रदर्शित, माई चाइल्ड ऐप लोगों के लिए एक जागरूकता लाने वाला मंच है जो अलग-अलग लोगों के जीवन को समझने और समझाने के लिए है.

साक्षी तलवार, रग्स एंड बियोंड

रग्स एंड बियोंड की को-फाउंडर, साक्षी तलवार कहती है, “मैं दृढ़ता से विश्वास करती हूं कि सफलता के लिए कोई लिफ्ट नहीं है. सीढ़ियों का सहारा लेना चाहिए.यह एक ईकॉमर्स एग्रीगेटर है जो दुनिया भर के ग्राहकों को ‘एक तरह का’ हस्तनिर्मित रग्स प्रदान करता है.”

जैपलिन पास्रिचा, फेमिनिस्म इन इंडिया

“हम एक युवा फेमिनिस्ट समूह हैं जो अंतरंग फेमिनिस्म पर काम करते है और कला, संस्कृति, नए मीडिया, प्रौद्योगिकी का उपयोग करके महिलाओं की आवाज़ को बढ़ाते हैं.” अपनी टीम के साथ जैपलिन पास्रिचा को अपने काम में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा और तब जाकर वह फेमिनिस्म इन इंडिया को सफल बना पाई. वह कहती है कि लोग डिजिटल एक्टिविज़म को हल्के ढंग से लेते हैं. उनका मानना है कि वो अवश्य कामयाब होगी.

बिस्ट्रिटी पोद्दार, पेपरलेस पोस्टकार्ड्स

पोद्दार कहती हैं, “अगर हम ध्यान देते हैं तो जीवन में पर्याप्त प्रेरणा होती है.” बिस्ट्रिटी पोद्दार द्वारा शुरू किए गए पेपरलेस पोस्टकार्ड, वर्तमान समय में वास्तविक जीवन की बातचीत को खोजने का प्रयास है. वह कहती है, “यह जीवन को करीब से जांचती है और नियमों, मानदंडों और मानकों को बदलने वाले गहरे विचारों को सामने लाती है.” इसमें 17 लेखकों, डिजाइनरों, डिजिटल विपणक और रणनीतिकारों की एक टीम है. यह कंपनी डिजिटल युग में वास्तविक जीवन पर आधारित कंटेंट को शामिल करके परिवर्तन ला रही है.

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