पिछले महीने, जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल ने एक विशेष रिपोर्ट जारी की कि 1.5 डिग्री सेल्सियस पर ग्लोबल वार्मिंग जिसे अब तक प्रकाशित सबसे महत्वपूर्ण जलवायु परिवर्तन रिपोर्टों में से एक माना जा रहा है. दुनिया भर के कई वैज्ञानिक इस रिपोर्ट का हिस्सा थे. भारत का प्रतिनिधित्व आईपीसीसी के प्रमुख सदस्य के रूप में सेवा करने वाली वैज्ञानिक मिनल पाठक ने किया.

पाठक वर्तमान में आईपीसीसी के कार्यकारी समूह III (कमीशन) की तकनीकी सहायता इकाई के साथ एक वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही हैं. इसके अलावा जेंडर पर आईपीसीसी के हाल ही में स्थापित अंतरराष्ट्रीय कार्य समूह की सदस्य है, वह अहमदाबाद विश्वविद्यालय में पर्यावरण और ऊर्जा के वैश्विक केंद्र में गतिविधियों का समन्वय करती है. वह इंपीरियल कॉलेज, लंदन और दुनिया भर के कई अन्य प्रमुख संस्थानों में एक अतिथि शोधकर्ता भी है.

SheThePeople.TV एक वैज्ञानिक के रूप में पाठक से उनके जीवन के बारे में पूछा, साथ ही नवीनतम ग्लोबल वार्मिंग रिपोर्ट और पर्यावरण की ओर नागरिकों की ज़िम्मेदारी पर भी बात की.

“पढ़ाई ने मेरा वैज्ञानिक स्वभाव विकसित किया”

वह याद करती है कि उन्होंने मुख्य रूप से व्यापक पढ़ने की वजह से विज्ञान के क्षेत्र में अपनी रुचि विकसित की. वह बताती है, “बचपन में मेरे पास ढेरों प्रश्न होते थे, जिससे मुझ में जिज्ञासा पैदा हुई और सीखने का मौका मिला. दैनिक आधार पर पढ़ना मुझे आवश्यक जानकारी इकट्ठा करने में भी मदद करता है. वह एक युवा लड़की के रूप में मेरी सोच को विशेष रूप से आकार देती है. ”

चुनौतियां

पाठक, जो पर्यावरण विज्ञान में पीएचडी हैं, उनके लिये यह सब आसान नही था. वह कहती है, “इस विशेष क्षेत्र में शिक्षा सबसे पहले और सबसे महत्वपूर्ण चुनौती थी. मैं स्नातक होने के बाद पर्यावरण विज्ञान (जो मैंने अंततः किया) करना चाहती थी. हालांकि, मुझे दृढ़ता से मना किया गया. मुझे कई लोगों ने लगातार कहा कि इसमें किसी भी तरह का कोई स्थाई करियर नही है.”

वह कहती है कि एक और संघर्ष, यह था कि क्षेत्र में किसी के लिए पारिश्रमिक शुरू में बहुत अच्छा नहीं था. “उदाहरण के लिए, मुझे याद है, मुझे बताया गया था कि चूंकि मैंने पीएचडी कर ली है, इसलिए मेरे लिए बैंकिंग या प्रशासनिक सेवाओं में कोशिश करना आसान है.” अब वह महसूस करती है कि इस समय में पर्यावरण पर जागरुकता ज्यादा है और चर्चा भी की जा रही है.

भारत और विदेशों में काम करने का अनुभव में अंतर

एक प्रोफेसर के रूप में, उन्होंने न केवल भारत में सक्रिय रूप से सेवा की है, बल्कि दुनिया भर में कई संस्थानों में भी कई पदों पर कार्य किया है. उनका शोध लो कार्बन सिटीज़, परिदृश्य मूल्यांकन, ट्रांसपोर्टेशन डीकारबोनाइज़ेशन और शहरी लचीलेपन पर केंद्रित है. लेखों, पुस्तक अध्यायों और तकनीकी रिपोर्टों सहित उनके दो दर्जन से अधिक प्रकाशनों की समीक्षा की गई है.

दुनिया भर में टीमों और कॉलेजों के साथ काम करते हुए, पेशेवर परिदृश्य में उनके कई अनुभव हैं. “मुझे लगता है कि यह बहुत अलग है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कार्यस्थल पर व्यावसायिकता का बहुत उच्च स्तर है. वास्तव में, इससे मुझे एक बेहतर पेशेवर बनने में मदद मिली है. वह प्रतिबिंबित करती है कि काम, बैठकों, समय सारिणी, कार्य नैतिकता के प्रति प्रतिबद्धता प्रमुख रूप से बेहतर बनाती है. पाठक का मानना है कि विदेशों में लोग कर्मचारियों के प्रति अधिक सम्मानजनक और अनुकूल हैं.

वह संस्थानों में खराब बुनियादी ढांचे की भी बात करती है. उदाहरण के लिए, हमारे पास व्यापक पुस्तकालयों की कमी है जो बच्चों के पास पहुंचाना बहुत जरुरी है.

“मैं युवा लड़कियों को सलाह दूंगी, विज्ञान में करियर की इच्छा रखने, ध्यान केंद्रित रहने और अपनी प्राथमिकताओं को सही बनाने के लिए”

ग्लोबल वार्मिंग पर आईपीसीसी_सीएच रिपोर्ट: अब 1 डिग्री भी कैसे मायने रखती है

ग्लोबल वार्मिंग पर विशेष रिपोर्ट एक बड़ा संकेतक है कि हम गलत जा रहे हैं और परिणाम जिन्हें हमें भुगतना है. जब पर्यावरण की बात आती है तो हमें लापरवाही और अपने कार्यों के लिए ख़ुद ही सामना करना पड़ता है. इस पर विस्तार से पाठक बताती हैं: ” जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल, पिछले 30 वर्षों से इन रिपोर्टों को प्रकाशित कर रहा है. लेकिन यह उस चरण के कारण विशेष रूप से महत्वपूर्ण है जिस पर हम हैं. हम टिपिंग प्वाइंट के बहुत करीब हैं. हम औसतन 1 डिग्री से ऊपर चले गए हैं, तापमान दुनिया भर में बढ़ रहा है. यदि हम कुछ भी नहीं करते हैं तो इसका लोगों पर गंभीर प्रभाव पड़ने वाला है. आपको एक उदाहरण देना चाहेंगे कि इस दर पर हम सभी 90 प्रतिशत कोरल खो सकते हैं. ”

वह बताती है कि इस रिपोर्ट और अन्य ग्लोबल वार्मिंग कारकों से संकेत मिल रहा है कि हम अब मौजूदा वास्तविकता से इनकार नहीं कर सकते हैं. रिपोर्ट के बारे में वह बताते हुये कहती है कि, “दरवाजा अभी बंद नहीं हुआ है, लेकिन बहुत कम जगह बाकी है.”

परिवर्तन जो वैज्ञानिकों का सुझाव है उस पर सरकार और नागरिक कार्य कर सकते हैं

रिपोर्ट, जो इस बात पर प्रकाश डालती है कि हर आधा डिग्री गर्मी अब भारी बदलाव लायेंगी. और जरुरत इस बात की है कि नागरिक इस बदलाव को रोकने में मदद करें. वह कहती है, “मुझे खुशी है कि आप यह पूछ रहे हैं क्योंकि यह समझना महत्वपूर्ण है कि राष्ट्रीय और स्थानीय नीतियों का सुझाव दिया गया है और काम करने जा रहे हैं, नागरिकों को सुधारने और ध्यान से आगे बढ़ने की व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी है.”

Minal Pathak IPCC

“हमें अपनी ज़िम्मेदारी ख़ुद लेनी है”

पाठक बताती हैं कि ऊर्जा और संसाधन कुछ ऐसी चीजें हैं जिनका हम हर गतिविधि में उपयोग कर रहे हैं. “हम तथ्यों के माध्यम से छोटे अंतर पैदा कर सकते है जैसे ऑटोमोबाइल के उपयोग से, कचरे को सही जगह डाल कर, भोजन और सामग्रियों की खपत आदि जैसे तथ्यों से. उदाहरण के लिए, उन इलाक़ों में चलने और साइकिल चलाने से जहां हम वाह का उपयोग करके प्रदूषण को बढ़ा रहे है. ”

विज्ञान और अवसरों में महिलाएं

जब हम विज्ञान में महिलाओं के बारे में बात करते हैं, तो अगर इस क्षेत्र में करियर बनाना लड़किया चाहती है तो युवा लड़कियों को इसके लिये काफी मेहनत करनी पड़ेगी. पाठक कहती हैं, “विज्ञान में और लड़कियों को प्रोत्साहित करने के लिए, उन्हें समान रूप से अवसर दिया जाना भी महत्वपूर्ण है.” उन्होंने स्वीकार किया कि सरकारें, अधिकारी और संस्थान कुछ हद तक जरूरी काम कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि इसे और अधिक करना है बड़े पैमाने पर.

“महिलाएं अंतरिक्ष में जा रही हैं, वे विमान उड़ रही हैं, कंपनियों को चला रही हैं, सौदों पर बातचीत कर रही हैं और नोबेल पुरस्कार जीत रही हैं. हमें युवा लड़कियों तक पहुंचने की ज़रूरत है और उन्हें बताएं कि ऐसा कुछ भी नहीं है जो वे नहीं कर सकती.”

एक वैज्ञानिक के रूप में, वह रोजमर्रा की जिंदगी में विज्ञान के महत्व को समझती है और अधिकतर महिलाओं के लिए भी इस क्षेत्र में एक जगह बनाने में सक्षम होने का आग्रह करती है. वह कहती है कि देश के सबसे दूरस्थ कोनों में युवा लड़कियों तक पहुंचना और उन्हें विज्ञान के बारे में जागरूक करना, बल्कि उनके लिए उपलब्ध विकल्पों की एक बड़ी संख्या के बारे में जागरूक होना महत्वपूर्ण है. वह आग्रह करती है, “लड़कियों में पहली बार संभावनायें निर्माण करना और फिर उन्हें प्रोत्साहित करना महत्वपूर्ण है. इससे पहले रोडब्लॉक को ध्वस्त करना और लड़कियों में मौजूद दिमाग़ को भी स्वीकार करना चाहिये. इसके अलावा, जागरूकता फैलाने और इस शिक्षा में उनकी रूचि पैदा करने के लिए बुनियादी स्तर पर उपाय किया जाना चाहिए. ”

“मैं युवा लड़कियों को सलाह दूंगी, विज्ञान में करियर की इच्छा रखने, ध्यान केंद्रित रहने और अपनी प्राथमिकताओं को सही बनाने के लिए”

 

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