क्या आपने कभी ये सोचा है कि नारी किरदारों के बारे में कैसे सोचा जाता है? क्या वो एक एहम किरदार निभाती है? क्या एक ऐसी महिला को दिखाया जाता है जो डिप्रेशन में हो फिर भी दायित्व पूर्ण हो? वो क्या बातें हैं जो एक डिप्रेशन से गुज़र रहीं महिला की कहानी को सुंदर बना देतें हैं? वोमेन्स राइटर फेस्ट में शिएनी अन्टोनी से उनके किताब के बारे मे बात की प्रीति शेनॉय से

अपनी नई किताब “वेक उप,लाइफ इस कालिंग” में प्रीति ने एक ऐसी महिला के बारे में लिखा है जो कि खुद की खोज में है।

किताब से पढ़ते हुए कुछ शब्दों के बाद प्रीति ने अपने किताब की नायिका अंकिता के बारे में बताया जोकि डिप्रेशन से गुजर रही हैं और दो बार आत्महत्या करने का प्रयास कर चुकी हैं।प्रीति कहती हैं “ हम लोग रोजमर्रा की जिंदगी के कठिनाइयों के बारे में बात करते हैं लेकिन जब भी बात मानसिक बीमारी पर आती है तो वह अजीब हो जाती है”।

आगे बोलते हुए उन्होंने कहा की “आजकल सिलेब्रिटीज़ इस बारे में बोल रही हैं और पिछले कुछ सालों से इस पर प्रभाव डाल रहें हैं। दीपिका पादुकोण ने खुद अपने डिप्रेशन के बारे में सबको बताया पर कितनों को इस बारे में सुनके प्रेरणा मिली?”

डिप्रेशन के बारे में यह कहा जाता है कि यह हमें कमजोर दिखाता है और यह बताता है कि हमें किसी और की जरूरत है पर हम नहीं चाहते कि कोई भी हमें ऐसे देखें। बात तो ये है कि ज़िन्दगी में हमें कोई न कोई साथ देने के लिए या समझाने के लिए चाहिए। प्रीति ने कहा “कि ये बार बार आने वाले खयालों से हमें मुक्ति चाहिए क्योंकि ये ही हमारे हार का कारण है और अंकिता भी इसी से गुज़र रही है”।

प्रीति कहती हैं “मेरी किताब एक ऐसी औरत के बारे में बताती है जो कि अभी बाइपोलर डिसऑर्डर से बाहर निकल रोज़मर्रा के ज़िन्दगी में कदम रख रही है। जैसे ही उसने ये किया, उसके जीवन में और कठिनाई आयी जिसका उसने सामना किया। हम सबमें कहीं न कहीं अंकिता है। हम सब अपनी दिक्कतों को शराब पीके मिटाना चाहते है या दबाना चाहते हैं, पर बात वही की वही रह जाती है”।

नॉर्मलसी, रचनात्मकता और असामान्यता में एक पतली रेखा है। हम सब अजीब है, हमारे पैदा या बड़े होने में हमारा हाथ न हो पर हमारे कल को सुधारने हमारा पूरा ध्यान होना चाहिए। तो खुद पे दबाव कम डालिये और अपनी ज़िन्दगी को खुल के जिये और खुद से प्यार कीजिये।

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