कई अपराध पता नही लग पाते है या फिर रिपोर्ट नही हो पातें हैं  सिर्फ इसलिये कि महिलायें अपने अधिकारों से अवगत नहीं होती है. अपराधों की बढ़ती संख्या के खिलाफ लड़ने के लिए यह जरुरी है कि महिलायें अपने कानूनी अधिकारों के बारे में जानती हो. भारतीय संविधान महिलाओं को कई अधिकार प्रदान करता है. अधिकारों की एक सूची हम यहां दे रहे है जिससे हर लड़की और महिला को अवगत होना चाहिए.

प्रसूति लाभ अधिनियम (2017)

हाल ही में संशोधित मातृत्व लाभ संशोधन अधिनियम 2017, गर्भावस्था के दौरान काम करने वाली महिलाओं के हितों की रक्षा करता है. इस अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक नियोक्ता को अपनी गर्भावस्था के कार्यकाल के दौरान प्रत्येक महिला कर्मचारी को कुछ विशेष सुविधाएं प्रदान करनी होती हैं. इन विशेष लाभों में पेड मातृत्व अवकाश (12 से 26 सप्ताह तक), घर से काम करने का मौका(सामान्य वेतन लाभ के साथ) और कार्यस्थल पर क्रेचे सुविधाएं भी शामिल हैं. यह अधिनियम महिलाओं को उनके काम और पारिवारिक जीवन को संतुलित करने के लिए अधिक फायदे देता है.

हालांकि, इस अधिनियम की वजह से लोगों से विपरित प्रतिक्रिया भी मिली. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक,  नियोक्ता अब महिला कर्मचारियों को काम पर रखने के लिए उत्सुक नहीं होंगे, जिसकी वजह से उनके लिए नौकरी के कम अवसर होंगे.

कार्यस्थल पर महिलाओं की यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013)

हाल के दिनों में यौन उत्पीड़न एक बड़ी समस्या है. यौन उत्पीड़न का मतलब होता है शारीरिक संपर्क और उसके आगे जाना, या यौन उत्पीड़न की मांग या अनुरोध, या यौन से संबंधित टिप्पणियां  या अश्लीलता दिखाना या यौन प्रकृति के किसी अन्य अवांछित शारीरिक, मौखिक, गैर-मौखिक आचरण शामिल हैं. चाहे वह पुरुष मालिक या सहयोगी द्वारा किया जाता है, आप मामलें में पुलिस से संपर्क कर सकते हैं और शिकायत दर्ज करा सकते हैं.

सभी संगठनों को एक आंतरिक शिकायत समिति की आवश्यकता होती है, जिसे ऐसी किसी भी शिकायत को देखना चाहिए.

घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा (2005)

यह कानून रूप से साथी द्वारा की गई हिंसा से संबंधित किसी भी महिला साथी (चाहे पत्नी या महिलाएं हो)  को सुरक्षा प्रदान करता है. इसमें महिला अपने साथी या परिवार के सदस्यों के खिलाफ शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक या मनोवैज्ञानिक परेशानी की शिकायत दर्ज करा सकती है जो उनके जीवन और शांतिपूर्ण अस्तित्व के लिए खतरा पैदा कर रहे हो. इस कानून में संशोधन के बाद विधवा महिलाओं, बहनों और तलाकशुदा महिलाओं के लिए भी इस तरह के अधिकार बढ़ाए गए है.

हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (2005)

यह अधिनियम सभी हिंदू महिलाओं को पितृ संपत्ति पर पूर्ण नियंत्रण और शक्ति देने का अधिकार देता है. 2005 में हुये संशोधनों ने परिवार में महिला और पुरुष के बीच संपत्ति वितरण अधिकारों को और आगे बढ़ाया. बेटियों को विवाह के बाद भी बेटों के बराबर ही संपत्ति पर अधिकार होगा.

बाल विवाह अधिनियम निषेध, 2006

बाल विवाह हमारे देश में एक लंबे समय तक चलने वाली प्रथा है. यह कानून शुरुआती विवाह के कारण हुई परेशानी से दोनों लिंगों के बच्चों की रक्षा करता है. हालांकि ज्यादातर मामलों में, छोटी लड़कियों का विवाह बड़े व्यक्ति के साथ कर दिया जाता है. इस प्रकार  यह जानना जरुरी है कि एक लड़की के विवाह होने की कानूनी उम्र 18 साल है, जबकि लड़के के लिए यह 21 वर्ष होती है. माता-पिता जो निर्धारित उम्र तक पहुंचने से पहले अपने बच्चों को मजबूर कर लेते हैं, वे इस कानून के तहत दंड के अधीन हैं.

स्ट्रीट पर उत्पीड़न

हालांकि भारतीय दंड संहिता अपनी पुस्तकों में स्ट्रीट उत्पीड़न / छेड़कानी का उपयोग या परिभाषित नहीं करती है लेकिन वह निश्चित तौर पर आपको नुकसान से बचाती है. सरल शब्दों में इसे सार्वजनिक रूप से किसी महिला को प्रताड़ित करना या परेशान करने के कार्य के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, उदाहरण के लिए  उस पर अपमानजनक टिप्पणी करना. आईपीसी की धारा 294 और 509 महिलाओं को ऐसी परिस्थितियों से बचाती है और किसी भी व्यक्ति या समूह के लोगों को किसी भी उम्र की महिला के प्रति आक्रामक / अपमानजनक टिप्पणी या इशारा करने के लिए प्रतिबंधित करती है.

दहेज प्रतिषेध अधिनियम, (1961)

बाल विवाह की तरह, भारतीय संस्कृति में दहेज भी पुरानी परंपरा है.  दुल्हन और उनके परिवारों को अधिकतम धनराशि का भुगतान करने के लिए अत्याचार किया जाता है ताकि शादी किसी भी तरह से चलती रही. भारतीय कानून इस तरह के किसी भी कृत्य को दंडित करता है जिसमें लेने और देने पर परिवारों के बीच संबंध बनाये जाते है.

जानें कि पुलिस के पास कौन से अधिकार है

  • न्यायालयीन आदेशों के अनुसार, प्रत्येक पुलिस स्टेशन में एक महिला पुलिस अधिकारी (एक हेड कांस्टेबल से नीचे नही होना चाहिए) पूरे समय होना अनिवार्य है.
  • एक महिला कॉन्स्टेबल की अनुपस्थिति में, पुरुष पुलिस अधिकारी द्वारा महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.
  • सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद एक महिला को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.
  • पुलिस केवल महिला के निवास पर ही उसकी जांच कर सकती है.
  • एक बलात्कार पीड़िता अपनी पसंद के स्थान पर ही अपना बयान रिकॉर्ड कर सकती है और पीड़िता की चिकित्सा प्रक्रिया केवल सरकारी अस्पताल में ही हो सकती है. सभी महिलाएं मुफ्त कानूनी सहायता का लाभ लेने की हकदार हैं.

SheThePeople.TV ने मयंक शर्मा से उन परिवर्तनों के बारे में बात की जो महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए मौजूदा कानूनों में किए जाने की जरुरत है. उन्होंने कहा, “कानून पूरी तरह से देश की महिलाओं की रक्षा, सुरक्षा और सशक्त बनाने के लिए तैयार किए गए हैं. उन्हें किसी भी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, लेकिन उनको सही तरह से लागू करने की जरुरत है. हमारे समाज में जो कमी है वह यह है कि लोगों में सिविक सेंस की कमी है और कानूनों को सही तरह से लागू नही किया जाता. एक बार ऐसा कर दिया जायें तो  निश्चित रूप से बदलाव आयेंगा.”

याद रखें, अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना भी एक अन्याय है. अपराध करना गलत है, लेकिन इसके बारे में चुप रहना ज्यादा ग़लत है.

 

 

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