7 मार्च, 1987 को पैदा हुई  मरीना इकबाल ने 2009 में आयरलैंड की महिला टीम के खिलाफ अपने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की शुरुआत की. उन्होंने 6 साल अपनी राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व किया और वह 34 वनडे और 42 टी 20 का हिस्सा रही. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत गेंदबाज़ के तौर पर की लेकिन अंततः बल्लेबाजी करने लगी. सिर्फ यही नही.  मरीना हाल ही में पाकिस्तान की पहली महिला क्रिकेट कॉमेंटेटर बन गई. फीमेल क्रिकेट को दिये गये एक इंटरव्यू में उन्होंने विशाल यादव से क्रिकेट के बार में बात की.

1) पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के दौरान हुये मैंच में कॉमेंटेटर के तौर पर आपकी भूमिका की काफी सराहना हुई. आपने इस भूमिका को कितना पसंद किया?

वैसे यह मेरे लिए क्रिकेट के दूसरे क्षेत्र में प्रवेश करने का एक शानदार अवसर है. मुझे मौका मिला एक सफल प्रोडेक्शन टीम और शुरुआत से सह- कॉमेंटेटर के साथ काम करने का.  माइक  पकड़ने का मौका मिलना और गेम के बारे में आपने विचार साझा करना वाकई में एक अच्छा अनुभव है और आनंद भी मिलता है.

2) एक कॉमेंटेटर बनने का विचार कब आया?

मैं पीसीबी महिला विंग में अपने बोर्ड और प्रबंधन से बात कर रही थी कि हम एक खिलाड़ी होने के अलावा क्रिकेटरों के लिए और अधिक अवसर कैसे विकसित कर सकते हैं, जो उनके खेल के अनुभव का उपयोग करेंगे और युवाओं और महत्वाकांक्षी साथी क्रिकेटरों की मदद करेंगे. इसलिए उन्होंने मेरी रुचियों के बारे में पूछा और मैंने तुरंत कॉमेंट्री को चुन लिया.  फिर मैं भाग्यशाली भी थी क्योंकि पाकिस्तान, मलेशिया में ऑस्ट्रेलिया को हरा रहा था और इससे मुझे एक आदर्श मंच मिल गया.

3) हमें अपने बचपन के क्रिकेट के दिनों के बारे में बतायें? आपने किस उम्र में शुरुआत की?

मेरे पिता सेना में थे और वह टेनिस के चैंपियन थे. प्रारंभ में, उन्होंने हमें प्रेरणा दी और मुझे खेल की तरफ ध्यान देने को कहा. हमारे पास अध्ययन कक्ष में एक कोना था जहां उनकी सभी ट्रॉफी और पदक रखे हुये थे . वह हमेशा मेरा ध्यान जाता था. लेकिन मुझे बहुत कम उम्र से क्रिकेट का आकर्षण था. सबसे कम उम्र की होने की वजह से, मैं अपने भाई के साथ बहुत क्रिकेट खेलती थी और मेरे चाचा उस वक़्त पाकिस्तान पुरुष टीम का हिस्सा थे. उन्होंने मुझे हमेशा प्रेरित किया. लेकिन इसके साथ ही, एक पेशेवर स्तर पर महिलाओं के क्रिकेट खेलने के लिये कोई स्कोप नही था. मैंने इसे एक शौक के रूप में लिया. स्कूल में, मैं लड़कों के साथ क्रिकेट खेलने वाली एकमात्र लड़की थी और उन दिनों में इमरान खान, वसीम अकरम और वकार यूनिस जैसे हमारे राष्ट्रीय नायकों को देखती थी और तेज गेंदबाजी करने का शौक रखती थी. फिर कॉलेज में मुझे उचित गियर के साथ क्रिकेट खेलने का मौका मिला.  2006 में एक साल बाद, पीसीबी ने क्षेत्रीय टीम के लिए सेलेक्शन केंप लगाया और मुझे चुना गया जिसके बाद मैंने पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

4) बड़े होने के दौरान आपके रोल मॉडल / प्रेरणा कौन थे?

1992 के विश्व कप के बाद जब क्रिकेट ने विश्व कप जीता तो क्रिकेट के लिए मेरा जुनून बड़े पैमाने पर बढ़ गया. फिर बाद में, शोएब अख्तर को देखकर मुझ पर बड़ा प्रभाव पड़ा. मैं अपने घर के लॉन में इन किंवदंतियों के गेंदबाजी के एक्शन को किया करती थी. मैं इन राष्ट्रीय नायकों को देखती थी. लेकिन एक बार जब मैंने पीसीबी के तहत ठीक से खेलना शुरू किया, तो मुझे एहसास हुआ कि मैं गेंदबाज की तुलना में बल्लेबाजी बेहतर कर सकती हूं. यह मेरे में स्वाभाविक रूप से आया था.  बल्लेबाजी पर काम करते हुये,  मैं सचिन तेंदुलकर, मोहम्मद युसुफ और केविन पीटरसन से ज्यादा प्रेरित थी. मैंने बहुत कुछ सीखा और इससे मुझे मेरी बल्लेबाजी में सुधार करने में मदद मिली.  मैंने उसे देखकर इतने सारे शॉट्स सीखे और बल्लेबाजी की मेरी शैली में केविन की एक बड़ी झलक है.

5) आज आप अपनी सफलता के लिए सबसे ज्यादा श्रेय किसे देती हैं?

सबसे पहले मेरे माता-पिता को सभी क्रेडिट देती हूं,  जिन्होंने सामाजिक दबावों के बीच मुझे यह करने दिया. उन्होंने सिर्फ मुझे क्रिकेट खेलने की मंजूरी नहीं दी बल्कि मेरे करियर के प्रत्येक चरण में भी मेरी मदद की.  मेरी मां प्रेक्टिस और मैचों में मेरे साथ जाती थी और मेरे पिता ने हमेशा तकनीकी रूप से और मानसिक रूप से गेम खेलने में मदद की. अगर उन्होंने मुझे सहयोग नहीं दिया होता, तो मैं आज यहां तक नही पहुंच पाती.

6) क्या आपको पुरानी याद आयी जब आपने ने पहली बार कॉमेंटरी की?

हां, निश्चित रूप से.  ऐसा महसूस हुआ जैसे कल की बात थी. मैंने 22 गज की दूरी बहुत याद की जब मैं सलामी बल्लेबाज के रूप में बाहर निकलती थी और फिर यह महसूस किया कि अन्य कॉमेंटेटर ने मेरे बारे में बात की होगी जैसे कि मैं आज कर रही हूं.

7) आप क्या सोचती हैं कि पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम को विश्व नंबर 1 से पीछे रहने के क्या कारण है?

मैं पिछले कुछ वर्षों से टीम प्रगति कर रही है, इसके बावजूद कि पाकिस्तान में महिलाओं के क्रिकेट के लिए संरचना की कमी है.

“हमारे पास महिलाओं के क्रिकेट के लिए समर्पित पर्याप्त क्लब या ग्राउंड नहीं हैं. हमारी घरेलू संरचना अभी भी सुधार रही है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पर्याप्त मैचों की कमी एक बड़ी बाधा है. आईसीसी चैम्पियनशिप ने वास्तव में समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. लेकिन आपके प्रश्न का उत्तर देती हूं कि हमें क्या चीज़ पीछे कर रही है तो वह है क्वालिटी क्रिकेट मैंचो की कमी.  “

8) कोई भी मौजूदा महिला क्रिकेट खिलाड़ी जिसमें आप अपना प्रतिबिंब देखती हैं?

मैंने कई युवा लड़कियों को देखा है जिनमें बहुत प्रतिभा है और यह एक सकारात्मक संकेत है. हां, कराची के एक लड़की जावेरिया राउफ है जिसमें मैं अपनी झलक देखती हूं जो फ्लिक शॉट्स और कवर ड्राइव मेरे तरह मारती है.

9) आज, जब आप क्रिकेट के दिनों की फिर से देखती हैं, तो आपको क्या लगता है कि आप बेहतर क्या कर सकती थी? या कोई बदलाव?

नहीं, मैं बहुत संतुष्ट हूं जो सब मेरे साथ हुआ. प्रत्येक घटना एक अनुभव है और एक मजबूत सोच और  दृढ़ चरित्र का व्यक्ति बनने के लिए सीखना आवश्यक है. हालांकि मेरी इच्छा है कि मेरी माँ मुझे पाकिस्तान के लिए खेलते हुए देखती.  मुझे ग्रीन ब्लेज़र मिलने से एक साल पहले मैंने उन्हें खो दिया और मैं निश्चित रूप से चाहता थी कि वह वहां रहें

10) क्या कप्तानी आपके लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ था? एक ही समय में जिम्मेदारियां और सम्मान दोनों?

मैंने पाकिस्तान ए की दो बार कप्तानी की.  मुझे पाकिस्तान ए टीम के लिए अपने पहले मैच में कप्तान नियुक्त किया गया था, जो मेरी जिंदगी की यादगार चीज़ है. कप्तान ने मुझे बेहतर बना दिया. मेरा प्रदर्शन कप्तान के रूप में बेहतर हुआ.  हो सकता है कि ज़िम्मेदारी मेरे लिए  अच्छी बात है,  इसलिए हाँ,  मैं दबाव में कभी नहीं आई. मैंने हमेशा इसका आनंद लिया.

11) क्रिकेट क्या हमेशा आपके सपने में था? यदि ऐसा नहीं है, तो आपके अन्य सपने क्या थे जिन्हें पेशे में बदला जा सकता था?

मैं बचपन से क्रिकेट में थी.  फिर कॉलेज में, मुझे अपनी कॉलेज टीम के लिए चुना गया, जिसने एक पेशे के रूप में क्रिकेट अपनाने के लिये मजबूर कर दिया. लेकिन अगर क्रिकेट नहीं, तो मैं डॉक्टर होती.

12) इस समय पाकिस्तान में महिला क्रिकेट कैसा है? क्या वह विकसित हुआ है?

निश्चित रूप से. पाकिस्तान टीम ने एशिया टूर्नामेंट में दो स्वर्ण पदक जीते हैं और शीर्ष टीमों को भी हराया है.  खिलाड़ियों और क्रिकेट में जाने वाली लड़कियां अब महिलाओं के क्रिकेट के बारे में जानती हैं.  यहां तक कि पीसीबी देश भर से प्रतिभा लाने के लिए जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत कर रही है. यह एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है और आने वाले वर्षों में पाकिस्तान को निश्चित रूप से लाभ मिलने वाला है.

13) हमें उन चीज़ों के बारे में बताएं जिन्हें क्रिकेट ने आपकी ज़िंदगी को बेहतर बनाने में मदद की ?

मेरे लिए, बहुत सी चीजें हैं. मुझे हमेशा लगा कि क्रिकेट मेरे जीवन का हिस्सा था. यह मुझे धीरज रखने, लगातार काम करने और मेरे लिए कड़ी मेहनत और टीम नेतृत्व कौशल को प्रभावित करना सिखाया.  यह मुझे कई जीवन चुनौतियों के लिए भी तैयार करता है. आप खुद पर भरोसा करना सीखते हैं और अपनी कमजोरियों से लड़ते हैं.  यह आपको बाधाओं से लड़ने और अपनी गलतियों के समाधान खोजना सिखाता है.

14) एक रिकॉर्ड जो आप चाहती हों कि आप बनायें या तोड़े?

मैं हमेशा अपनी शुरुआती पारी में शतक जमाना चाहती थी.

15) एक चीज जो आप वास्तव में करना चाहते हैं या महत्वाकांक्षी क्रिकेटरों से कहेंगी?

क्रिकेट एक भावुक खेल है लेकिन साथ ही साथ बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है. आपको हमेशा एक सा होना होता है और कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता होती है. कोई शोर्ट कट नहीं है, आप मैदान से बाहर क्या करते हैं, उसे मैदान के अंदर देखा जा सकता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिणाम पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय देखा जायें कि हर दिन बेहतर कैसे बनें. यह एक प्रक्रिया है और इसमें समय लगता है,  लेकिन कड़ी मेहनत हमेशा फायदा पहुंचाती है.

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