कारण चाहे जो भी हो लेकिन मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करने से हमेशा लोग हिचकिचाएं हैं लेकिन वर्ष २०१८ में हमने मानसिक स्वास्थ्य पर बात की। परंपरागत रूप से हम इन विषयों पर चर्चा नहीं करते थे। और तो और लोगों को इन विषयों पार बात करने से रोका जाता था। लेकिन ऐसा लगता है की २०१८ में हमने यह एहसास किया की इन मुद्दों को नज़रअंदाज़ करने से कुछ हासिल नहीं होगा। ऐसा लगता है जैसे इस देश के साहसी लोग मानसिक स्वास्थ्य के आस-पास के कलंक को हटाने की कोशिश कर रहे है।

कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • २०१८ वह वर्ष है जब भारत ने मानसिकस्वास्थ्य के विषय पर चर्चा शुरू की।
  • जब अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बात करेंगे तो इससे जुड़ा डर ख़त्म हो जायेगा।
  • किसी समस्या को स्वीकार करना और उसके लिए मदद लेना, उपचार के लिए ज़रूरी है।
  • इस बातचीत का अगला हिस्सा उपचार प्रक्रिया के बारे में समझना होना चाहिए।

सोशल मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान 

युवा और व्यस्क से लेकर आम लोग और सेलिब्रिटी तक सभी मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अपने संघर्षों को बता रहे है। जिसके कारण इस तरह कि बातचीत अब आम हो गयीं हैं। सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा इन विषयों पर हो रही है। इस बातचीत की आभासी प्रकृत्ति के कारण लोग बिना किसी डर के इस पर बात कर रहे हैं। जब लोग दूसरों को इस तरह बात करते हुए देखेंगे तो उन्हें भी प्रोत्साहन मिलेगा।

किसी भी व्यक्ति की मानसिक समस्या का समाधान होना आसान नहीं है जब तक उनके पास एक समर्थन प्रणाली ना हो। इसी वजह से लोगों के इस विषय पर बात करने को हम एक उपलब्धि समझते हैं। सामाजिक, व्यक्तिगत, और पारिवारिक अस्वीकार हमें अपना दुख साझा करने से रोकते हैं।

मदद माँगना

बातचीत की कमी के कारण हम किसी से मदद नहीं मांग पाते। न सिर्फ हम अपने साथियों से इस बारे में बात नहीं करते बल्कि प्रोफेशनल लोगों के सामने हिचकिचाते हैं। लेकिन अब हम इस पर बाकी बीमारियों की तरह खुलकर बात कर रहे हैं। लेकिन यह चर्चा जैसे २०१८ में शुरू हुई वैसे ख़तम नहीं होनी चाहिए।

लोगों को यह पूछना बंद कर देना चाहिए कि क्या गलत हुआ बल्कि उसके उपचार के लिए अपने सहयोग के बारे में सोचना चाहिए।

रिकवरी के रास्ते को समझना 

हमें यह समझना होगा की जिस तरह हमने इस विषय पर बात करना शुरू किया, उसी तरह इस विषय को सामान्य रूप से स्वीकार करना होगा। हम आज भी मानसिक स्वास्थ्य के शिकार हुए लोगों को देखते हैं। वे लोग या तो स्वयं को दोषी करार देते हैं या फिर खुद को अपने परिवार से अलग कर लेते हैं। इस बातचीत का अगला हिस्सा रिकवरी को समझना होना चाहिए। हम परिवार या दोस्तों के रूप में उन लोगों के लिए क्या कर सकते हैं जिन्हें हमारी जरुरत है? इसके अलावा, हमे कैसे पता चलता है की अब मदद लेने की जरुरत है?

बातचीत करने का मतलब यह नहीं है कि हम मानसिक स्वास्थय को पूरी तरह से समझते हैं। इसलिए वर्ष २०१९ में हमें प्रतिज्ञा लेनी चाहिए की न सिर्फ हम इस मुद्दे पर बात करेंगे बल्कि इसके विभिन्न पहलुओं को समझने का भी पूरा प्रयास करेंगे।

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