अगर आंकड़ों को देखा जाए तो हमारे देश में सबसे ज़्यादा युवा है । भारत में कुल 70 करोड़ युवा है और जैसे ही वो बचपन से निकलकर वह युवावस्था में कदम रखते है तो उनमे बहुत सारे मानसिक और शारीरिक बदलाव आते है । उनका स्वभाव पूरी तरह से बदल जाता है । नए दोस्त बनते है नयी दुनिया आकर्षित करती है । उनमे बहुत ही ज़्यादा जोश और उत्साह होता है । आइये जानते है ऐसे 5 तरीके जिनसे हम आजकल के युवा  बेहतर तरीके से संभल सकते है :

  1. शुक्रगुज़ार रहें

आजकल के बच्चों को सब चीज़े आसानी से मिल जाती है इसलिए वो हर बात को हलके में लेते है और यह आदत आगे चलकर उनके लिए बहुत हानिकारक हो सकती है । यह आदत उन्हें भविष्य में बहुत नुकसान पहुँचा सकती है । तो इसलिए अभी से माता -पिता को उनके बच्चे को ज़िन्दगी में उन्हें छोटी -छोटी चीज़ो के लिए शुक्रगुज़ार होना सिखाना चाहिए।

  1. सेहत फैशन से बढ़कर है

आजकल के बच्चे हर काम फैशन  के हिसाब से करते है.  पर यह चीज़ ज़रूर दिमाग में रखे की फैशन आपकी सेहत से बढ़कर नहीं है । वही पहने , वही खाएं जो आपको कम्फर्टेबले लगता है । फैशन के नाम पर अपनी सेहत से खिलवाड़ न करें ।

  1. अपने शरीर को सुनो

एक युवा की सामान्य रूटीन लगभग फिक्स होती है, जो अपने करियर और मनोरंजन के प्रति अपना जुनून देखते हुए अपना काम करते है। युवावस्था में शरीर की घड़ी लगभग बदल सी जाती है  और शरीर में काफी बदलाव आते है बहुत से होर्मोनेस चेंज होते है । यह वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है कि नींद में किसी भी तरह की कमी आपको आपके रोज़मर्रा के कामो के लिए आलसी बना सकती है और इससे आप डाईजेस्टिव प्रोब्लेम्स और डिप्रेशन के शिकार भी हो सकते है ।

  1. बोरियत को तुरंत खत्म करें

“मैं बोर हो रहा हूं,” आपने यह वाकया कई युवा लोगो को कहते हुए सुना होगा । जब युवाओं के अंदर बहुत से बदलाव हो रहे होते है तो उन्हें उनके आस -पास कुछ भी अच्छा नहीं लगता । वह अक्सर खुद को बोर महसूस करते है । बोरियत भगाने का सबसे सही तरीका है की वह अपना दिमाग किसी प्रोडक्टिव काम में लगाएं  जैसे कोई हॉबी क्लास या किताबे पढ़ना ।

  1. अच्छे से सांस लें

हमारी सांस हमारे जीवन के लिए बहुत ज़रूरी  है। वहां कोई भी गड़बड़ी शारीरिक और मानसिक संतुलन को प्रभावित कर सकती है। ध्यान दें जब हम गुस्से , डर या चिंता में सांस लेते है और शांत समय में शांत होती है। इसके अलावा, ऐसे समय में जब हम जहरीली हवा में सांस ले रहे हैं, फेफड़ों में अधिक ऑक्सीजन बनाने की ज़्यादा ज़रूरत है। इसलिए शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए किसी भी प्रकार से  ‘अच्छे से सांस  लेना ‘ ज़रूरी है।

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