पिछली शाम आयोजित डिजिटल महिला पुरस्कारों में वीयू टीवी की संस्थापक सीईओ देवता सराफ ने भी अपनी बात रखी. उन्होंने सभागार में अपनी बात, अपने काम की बात और उद्यमिता में महिलाओं और नेतृत्व की बात की.

“मैं इंडस्ट्री में सरताज बनना चाहती थी”

देवीता ने श्रोताओं के साथ अपनी यात्रा के दिलचस्प किस्सों को साझा करते हुए महिला नेतृत्व  बढ़ाने की बात की. उन्होंने कहा, “मैंने 13 साल पहले शुरू किया था जब मेरे मन में विचार आया कि भारतीय उपभोक्ता मोबाइल हो रहे हैं. सभी जानेमाने जाने वाले ब्रांड अमेरिकी, जापानी और विदेशी आधारित थे, इस लिये मैंने एक अंतरराष्ट्रीय भारतीय ब्रांड को बनाने के बारे में विचार किया. ”

उन्होंने उच्च स्तर के इलेक्ट्रॉनिक्स में अपनी जगह बनाई और जहां भी मौका मिला वहां आगे बढ़ी. 2014 तक उनके ब्रांड ने 30-34 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था. बार-बार, उन्हें अपने भविष्य के रास्ते पर पुनर्विचार करने के लिए कहा गया – क्या व्यापार  जारी रखना उचित था? हालांकि, बढ़ने और सीखने की इच्छा ने उन्हें जो भी शुरू किया, उसे जारी रखने में मदद की. “2014 में, जब मैं इससे हटने की सोचने लगी तभी  मैंने सोचा कि मैंने आठ साल तक ज़िस चीज़ पर मेहनत की उसे क्यों छोड़ना चाहिये? मैं बढ़ते रहना चाहती थी और अंत में, मैं इस उद्योग की सरताज बनना चाहती थी. ”

“इस साल, हम हजार करोड़ रुपये के राजस्व कमायेंगे “

तब से, देवीता ने इस खेल में पूरी ताक़त लगा दी. अपने उत्पादों को बेचने के लिए व्यक्तिगत रूप से ई-कॉमर्स कंपनियों से व्यक्तिगत रूप से बातचीत करना और देश के हर कोने में प्रत्येक उत्पाद के वितरण के लिए आंतरिक रूप से अपनी कंपनी को तैयार करना. “पिछले हफ्ते, फ्लिपकार्ट ने तीन दिनों में 1 लाख वीयू टीवी बेचे.”

देवीता की यात्रा बिलकुल अलग तरह की है. आज तक, वह अपने ब्रांड की सर्वश्रेष्ठ ऐंबेसडर बनी हुई है. उन्होंने एक दिलचस्प घटना साझा की जब उन्होंने अपने ब्रांड के लिए मॉडल बनने का फैसला किया. उनका मानना ​​है कि अपने व्यवसाय के लिए अपना ख़ुद का चेहरा बनना महिलाओं के कारोबार के लिये सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है.

“महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती विफलता का डर नहीं है, लेकिन सफलता का डर है”

उन्होंने कुछ गंभीर प्रश्न उठाए कि क्यों महिलाएं आज भी बड़ा लक्ष्य अपने लिये नहीं रख रही है. उन्होंने जोर देकर कहा कि यह समय है जब महिलाएं अपने बनाये हुये क्षेत्र से बाहर आये, अपनी क्षमता का आकलन करें और उसे पायें जिसके लायक़ वह अपने आप को समझती है. “हमारी सबसे बड़ी चुनौती है: लोग क्या कहेंगे!”

भारतीय समाज के संदर्भ में महिलाओं के उद्यमियों की दुर्दशा पर बाते करते हुये देवीता ने कहा कि महिलायें अक्सर सोचती है कि दूसरे क्या कहेंगे. उन्होंने कहा, “हम पुरस्कार प्राप्त करने और मान्यता प्राप्त होने से संतुष्ट हो सकते हैं, लेकिन हमें उच्च लक्ष्य स्थापित करना और बढ़ते रहना आवश्यक है. महिला उद्यमियों को बड़ी संख्या में लक्ष्यों को निर्धारित करने की जरूरत है और यहां एक दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने का लक्ष्य भी है. “

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