हममें से अधिकांश लोगो के लिए, हमारे जीवन के शुरुआती  20  साल हमारे जीवन का सुनहरा चरण हैं, जो कि मज़ेदार कॉलेज जीवन, करीबी दोस्तों, शून्य चिंताओं और असीम अवसरों से परिभाषित होते हैं। लेकिन कुछ चुनिंदा हैं जो समाज में बदलाव के एजेंट बन जाते हैं। मिलिए हिमाचल प्रदेश की जबना चौहान से, जिन्होंने 22 साल की उम्र में मंडी जिले के अपने गाँव थारजुन पर राज किया और इसे बदलने के लिए सरपंच के रूप में लगातार काम कर रही हैं।

वह दिल्ली में बेयोन डाइवर्सिटी फाउंडेशन  द्वारा आयोजित इंस्पाइयर इवेंट में अपनी यात्रा की जानकारी दे रही थीं।

आइये उनकी यात्रा के बारे में जानने के लिए दस बातें हैं:

  1. उनके पिता एक किसान हैं। हालाँकि, जब जबना ने 12 वीं कक्षा उत्तीर्ण की तब उनके पिता की सीमित आय उनकी शिक्षा में बाधा बन गई उनका एक नेत्रहीन भाई और एक बहन है।
  2. उन्होंने बताया कि वे एक पत्रकार के रूप में भी काम कर रही है और केवल अपने गाँव में हाशिए के समुदायों की समस्याओं पर ध्यान देने की कोशिश करती है बल्कि यह भी सुनिश्चित करती है कि ये समस्याएँ अधिकारियों तक पहुँचें और हल हो जाएँ। एक साल के भीतर वह मंडी में प्रसिद्ध हो गई, लैंगिक पक्षपात और सामाजिक अत्याचारों और अन्य महिलाओं के मुद्दों के खिलाफ वह प्रभावी ढंग से काम कर रही है। 

  3. उन्होंने पहली बार राजनेता बनने का अनुमान नहीं लगाया था। वास्तव में वह सोचती थी कि कौन उसे वोट देगा। यह उनके क्षेत्र के डिप्टी कमिश्नर थे जिसने उन्हें बदलाव लाने के लिए उनके  जुनून को देखते हुए चुनाव लड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इसे राज्य के लिए कुछ करने के अवसर के रूप में भी लिया। उन्होंने बताया कि कैसे लड़कियों को उनके राज्य में प्रधान नहीं बनाया जाता है और यह अपवाद होने के लिए खुश है।
  4. चुनाव जीतने के बाद, जबना कहती है कि उसने शराब और तंबाकू के दुष्प्रभाव को उजागर करना शुरू कर दिया। शराब का सेवन करने से पुरुषों को रोकना उनके लिए मुश्किल था। उन्होंने साझा किया कि कैसे वह बार-बार शहर के बुजुर्गों के प्रतिरोध का सामना कर रही है  जो उसकी उम्र और अनुभव को देखते हुए उन्हें परेशान करते है । अपने कार्यकाल के दौरान, उन्होंने थारजुन पंचायत के एक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया, जो क्षेत्र में शराब विक्रेताओं को बंद करने के लिए उपायुक्त को ज्ञापन सौंपता है। उन्होंने कहा कि जब बहुत से जिलों में शराब पर प्रतिबंध लगा, तब उनकी मेहनत रंग लाइ।
  5. उन्होंने कहा कि हमें अपने बाहरी स्वरुप को साफ रखने के अलावा अपने विचारों और अपने चरित्र को भी साफ रखने की कोशिश करनी चाहिए।

  6. उनके अनुसार, महिला सशक्तीकरण तभी प्राप्त हो सकता है जब कानून बनाने वाली संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़े, क्योंकि केवल महिलाएँ ही ऐसे कानून बना सकती हैं जो अन्य महिलाओं को लाभ पहुँचाएँ और उन्हें उन्नती प्रदान करे ।
  7. उनके पैतृक चाचा उनकी यात्रा के दौरान समर्थन का एक मजबूत स्तंभ रहे हैं।
  8. जबना के अनुसार, समाज में योगदान देने के लिए सफल होने और प्रयास करने के उनके दृढ़ संकल्प ने क्षेत्र के कई परिवारों को अपनी बेटियों को स्कूली शिक्षा पूरी करने और कॉलेज में भाग लेने की अनुमति दी है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि वे उनके प्रति आभार व्यक्त करती हैं।
  9. उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उन्हें प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सम्मानित किया गया था और उनके स्वच्छ भारत पहल के लिए टॉयलेट-एक प्रेम कथा के प्रचार के दौरान अक्षय कुमार से भी प्रशंसा मिली थी।
  10. उन्होंने शी दपीपल. टी वी को बताया, “भविष्य में, मैं पंचायत में काम करना चाहती हूं और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने वाले अपने एनजीओ को भी आगे ले जाना चाहती हूं।”
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