2002 के गुजरात दंगों के दौरान, एक गर्भवती बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और उनके परिवार के सात सदस्यों को रंधिकपुर गांव में भीड़ द्वारा मार दिया गया था।

सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को गुजरात सरकार को 2002 के सांप्रदायिक दंगों की पीड़ित बिलकिस याकूब रसूल बानो को ₹50 लाख मुआवजे के रूप में, सरकारी नौकरी और उनके पसंद के क्षेत्र में आवास का भुगतान करने का आदेश दिया।

भारत के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली अदालत  ने सरकार को दो सप्ताह में मुआवजा देने का आदेश दिया।

अदालत ने कहा कि बानो अपने परिवार की “तबाही” की गवाह थीं। उन्होंने बताया कि कैसी उनकी बच्ची उनकी आँखों के सामने उनके घर में मार दिया गया था । बनो तब गर्भवती थी जब उनके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया था और 3 मार्च, 2002 को अहमदाबाद के पास रंधिकपुर गाँव में उनके परिवार के सात सदस्यों की हत्या कर दी थी।

मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने पाया कि अतीत को देखने का कोई मतलब नहीं है और बताया कि समय की जरूरत पीड़ित को पुरानी दर्दनाक यादो से बाहर निकलने की है , जो उनके वकील के अनुसार, अपनों को खोने की बाद दर -दर भटकने को मजबूर है।

अदालत में दलीलें उन्हें  भुगतान किए जाने वाले मुआवजे पर केंद्रित होनी चाहिए। “आज की दुनिया में, पैसा सबसे अच्छा मरहम लगाने वाला है। हमें नहीं पता नहीं कि यह सभी कुछ ठीक कर सकता है या नहीं , लेकिन हम उसके लिए और क्या कर सकते हैं । जो भी मुआवजा आप चाहते हैं और हम उसके अनुसार आदेश ज़रूर देंगे, “मुख्य न्यायाधीश गोगोई ने कहा।

जब गुजरात के वकील हेमंतिका वाही ने हस्तक्षेप करने की कोशिश की, तो मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “आप भाग्यशाली हैं, हम आपके खिलाफ कुछ भी नहीं देख रहे हैं । यह मामला इतने वर्षो से चल रहका है की अब इसका फैसला होना ही चाहिए और बनो को न्याय मिलना चाहिए ।

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