पेंगुइन द्वारा प्रकाशित फेमिनिस्ट रानी, आपिनियन लिडर्स के साथ बातचीत का संकलन है जिसमें नारीवाद की विकसित अवधारणा के बारे में बताया गया है. शैली चोपड़ा और मेघना पंत द्वारा लिखी गई इस पुस्तक को पढ़ने के 14 कारण हैं.

कालकी कोचलिन बताती हैं विवाह संबंध में बंधी महिलाओं के बारे में, किस तरह से शादी की वजह से उनकी ख़ुद की पहचान खो जाती है. उनका मानना है कि महिलाओं को प्यार के डिज्नी विचार को छोड़ना चाहिए और आकर्षक प्रिंस के द्वारा बचाए जाने की प्रतीक्षा करना बंद कर देनी चाहिए.

गुरमेहर कौर बात करती है कि किस तरह से आज की युवा महिलाएं सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी पहचान बना रही है और कैसे वो ट्रॉलिंग से बच सकती हैं.

सपना भावनानी बताती है कि किस तरह से फेमिनिन होना आप को कम फेमिनिस्ट नही बनाता है. नारीवाद उसी तरह से है जिस तरह से मर्दानगी एक आदमी के लिए है; उसे नहीं पूछा जाता है कि मर्दाना होने का क्या अर्थ है.

अदिति मित्तल, हमें बताती है कि किस तरह से पुरुष हास्य अभिनेताओं को वही चीजों के लिए पुरस्कृत किया जाता है, जिनके लिए महिला हास्य अभिनेत्रियों को शर्मिंदा किया जाता है. और वह कॉमेडी स्पेस में मौजूद चौंकाने वाली पूर्वाग्रहों को बताती है: कैसे लोग उनके स्तन पकड़ते हैं और फ़ोटो लेने के बहाने हरक़ते करते हैं.

दीपा मलिक, पैरालाम्पिक्स में स्वर्ण जीतने वाली भारत की पहली महिला है. वह हमें दिखाती है कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में जैविक रूप से कमजोर नहीं हैं, यह एक कहानी है जो कि इतिहास में महिलाओं को दबाने के लिए सुनाई जाती थी. वह हमें दिखाती है कि महिला शरीर को प्रतिनिधित्व के अधिक विचारों की आवश्यकता क्यों है.

तनमय भट्ट, बताते है कि कैसे नारीवाद के संबंध में पुरुष अभी भी सीख रहे हैं और विकसित हो रहे हैं. अपने अनुभव के बारे में बताती है कि उन्हें किस तरह से उनके शरीर को लेकर शर्मिंदा किया जाता था और उन्होंने किस तरह से कॉमेडी का इस्तेमाल सामाजिक टिप्पणी के लिए किया.

• प्रसिद्ध आरजे मालिश्का मेंडोंसा, इस बारे में बताती है कि किस तरह से खुद को प्यार करना नारीवाद की परिभाषा है, खासकर तब जब आपके आस-पास के लोग आप के साथ न्याय करते हों. वह हमें बताती है कि फेमिनिस्म वह है जब आप स्वयं और आपकी इच्छाओं के प्रति सच है.

गुल पनाग – एक अभिनेत्री,मॉडल, फिटनेस गुरु, राजनेता, उद्यमी, एविएटर और नई मां – हमें दिखाती है कि महिलाओं को स्वयं को साबित करने के लिए 10,000 घंटे अधिक काम करना पड़ता है.

• फेसबुक की अंखी दास बताती हैं कि कैसे उनके जीवन में आने वाले पुरुषों ने कॉर्पोरेट गुरु के रूप में उनका जीवन बना दिया. और कैसे सोशल मीडिया महिलाओं को उद्यमी बनने के लिये काम कर रहा है.

आरेफा जोहारी मुस्लिमों के शिया संप्रदाय में मादा जननांग उत्परिवर्तन (खतना) के बारे में बताती हैं जहां युवा लड़कियों से कोई सहमति नहीं मांगी जाती है, फिर भी इस अपराध के लिये कोई भी सज़ा का प्रावधान नही है. इसको यौन हमले की तरह अपराधी नहीं बनाया जाता है।

रोहिणी शिर्के, एक किसान की बेटी है जो एक महाराष्ट्रीयन गांव में रहती है, जिन्होंने अपने पति को मधुमक्खी की खेती शुरू करने और उद्यमी बनने के लिए छोड़ दिया. उन्होंने खुद ही इंटरनेट और फोन का उपयोग करने का तरीका सीखा और अब अपने गांव में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिये काम भी कर रही है.

राणा अयूब कहती हैं कि उनका दृष्टिकोण गैर-पक्षपातपूर्ण है, वह कहती है कि वह अन्याय के खिलाफ बोलना जारी रखेगी, चाहे वह महिलाओं, मुसलमानों या दलितों के खिलाफ हों.

सौरभ पंत अपनी कॉमेडी का उपयोग जरूरी मुद्दें जैसे सेनेटरी नैपकिन टैक्स, फेयरनेस क्रीम, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, वैवाहिक बलात्कार जैसे मुद्दों को उठाने के लिये करते है. जो न सिर्फ पचास प्रतिशत बल्कि 100 प्रतिशत आबादी को प्रभावित करता है. एक भारतीय नारीवादी पुरुष, वह कहती है कि वह है जो पुरुषों और महिलाओं के लिए समानता चाहता है.

श्री गौरी सावंत हमें सिखाती है कि मां होना जैविक नही बल्कि भावनात्मक बात हैं. जेंडर आपके जननांगों में नहीं बल्कि आपके दिमाग में है. एक ट्रांसजेंडर जो मुश्किल से अपना काम चला पाती है, वह वेश्या की बेटी को गोद लेती है और उनके रिश्ते को वीक्स एड में ख़ूबसूरती से दिखाया जाता है जो 2017 में वायरल हुआ था.

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