पूर्व वॉलीबॉल खिलाड़ी और सामाजिक कार्यकर्ता जगमती सांगवान को हरियाणा के मेयर पद के चुनाव के लिए रोहतक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) द्वारा चुना गया. यह पहली बार है जब समिति नहीं बल्कि लोग मेयर पद के लिए वोट देंगे.

हमने सांगवान से उनके काम और राजनीतिक प्रेरणा के बारे में बात की.

राजनीति में प्रवेश  करने पर सांगवान ने कहा कि पिछले 30 वर्षों से वह सामाजिक मुद्दों जैसे स्वच्छ पेयजल, स्वच्छता, बिजली के मुद्दे, विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए पेंशन जैसी सुविधाओं पर काम कर रही हैं. उनके मुताबिक़ अब राजनीति के माध्यम से इन मुद्दों पर कार्य करने का समय आ गया है.

चुनाव के बारे में सांगवान ने कहा कि विद्यार्थी दिनों से ही कल्याणकारी कार्यो और ज़मीनी स्तर पर लोगों के साथ काम करती रही है. उनका समाजिक योगदान विश्वसनीय एवं प्रशंसनीय है.

“मैंने कई महिला संगठन के साथ काम किया है इसलिए महिलाएं सहायक हैं. हमने महिला अन्याय के खिलाफ कई प्लेटफार्म बनाए है।” सांगवान ने कहा, “एक राष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी होने के कारन खेल बिरादरी का भी समर्थन है।”

जगमती सांगवान

 

सांगवान MDU विश्वविद्यालय में शारीरिक शिक्षा विभाग में शामिल रही है एवं विश्वविद्यालय में महिला शिक्षा की संस्थापक निदेशक हैं। साथ ही, वह शारीरिक शिक्षा में PHD भी कर चुकी है।

चुनावी मैदान में अन्य लोग- भारतीय जनता पार्टी के मनमोहन गोयल, भारतीय राष्ट्रीय लोक दल के संचित नंदल और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सीता राम सचदेव हैं। उम्मीदवारों में, गोयल, 50 करोड़ की संपत्ति के साथ सबसे अमीर है. सांगवान की आय सबसे कम- 5 लाख रुपये  है।

सामाजिक योगदान में रूचि के बारें में पूछे जाने पर, सांगवान ने कहा, “जब मैं स्कूल पढ़ने जाती थी, तब मुझे राष्ट्रीय स्तर पर खेल कर अपनी पहचान  बनाने का अवसर मिला, जो कि अन्य लड़कियों को नहीं मिला. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों की लड़कियों के पास अवसर व स्वतंत्र थी, जिससे उनके खेल प्रदशन काफी बेहतर था. साथ ही, जो शिक्षा व सहायता मैंने समाज से पाई, समाज को वापिस लौटाना चाहती हूँ.”

“जब मैं स्कूल पढ़ने जाती थी, तब मुझे राष्ट्रीय स्तर पर खेल कर अपनी पहचान  बनाने का अवसर मिला, जो कि अन्य लड़कियों को नहीं मिला. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अन्य देशों की लड़कियों के पास अवसर व स्वतंत्र थी, जिससे उनके खेल प्रदशन काफी बेहतर था.” – सांगवान 

आज भी, महिलाएं चुनाव नहीं लड़ती हैं या उन्हें राजनीतिक दलों से टिकट नहीं मिलती. उन्होंने व्यक्त किया कि ज़्यादातर राजनीतिक दल पुरुष प्रधान है. “विशेष रूप से हरियाणा में समाज पितृसत्तात्मक है, राजनीतिक दल महिलाओं और उनके मुद्दों के विकास की ओर संवेदनशील नहीं. महिलाओं को चुनाव लड़ने नहीं देते. वास्तव में, वह महिलाओं की स्थिति को लक्षित कर फायदा उठाने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि महिलाएं राजनीति में रूचि नहीं दिखाती, न ही उनके परिवार” सांगवान ने बताया.

मेयर बन कर वह जनता के लिए विकास के अर्थ को बदलना चाहती है कि लोग एक मेयर से क्या उम्मीद रखते है. लोगो के लिए स्वच्छ पेयजल, शहर में टूरिज्म और र्सार्वजनिक परिवहन सुविधा लाने की कोशिश करन चाहती है जो यातायात और प्रदूषण को रोकने में मदद करेगा। वरिष्ठ नागरिकों और विधवा पेंशन के नियमित और गैर भ्रष्ट हैंडलिंग पर रोक , आंगनवाड़ी योजना, मिड-डे मील जैसे मुद्दों पर काम करना चाहती है. 

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