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“अपनी कहानी पर विश्वास रखें और लेखन के प्यार के लिए लिखें” – सावी शर्मा

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Udisha Shrivastav

अहमदाबाद में हुए #WomenWritersFest का पैनल वह सब था जो एक आकांक्षी लेखिका चाहती है. । हमारे साथ लेखिका सावी शर्मा थीं। उन्होंने किरण मनरल से अपनी पुस्तकों और लेखन प्रक्रिया के बारे में बातचीत की। और सबसे एहम कि कैसे वे कुछ ही समय में बेस्टसेलिंग लेखक बन गयीं।

सावी ने लेखन क्यों शुरू किया?

शर्मा चार्टेड अकाउंटेंट की छात्रा थीं। हालाँकि उन्होंने अपने पैशन को जल्द ही पहचान लिया। जब उनसे पूछा कि उन्होंने लेखन क्यों शुरू किया, उन्होंने कहा कि वह लोगों को प्रेरणा देना चाहती हैं। “मुझे पता था कि मुझे लेखन के क्षेत्र में ही कुछ करना है। मैं एक कहानी की तलाश में थी। में हमेशा लोगों को प्रेरणा देना चाहती हूँ। इसलिए मैंने लिखकर लोगों को अपनी कहानी सुनाई”।

स्वयं प्रकाशित किताब को बेस्टसेलर बनाने के लिए मार्केटिंग करना

शर्मा की किताब “एवरीवन हैस ए स्टोरी” बहुत चर्चा में रही। दूसरी तरफ, इस किताब की बिक्री भी बहुत हुई। सबसे दिलचस्प बात ये रही की सावी ने अपनी किताब का खुद ही विपणन किया।

“मैं अपनी किताब के लिए किसी प्रकाशक के द्वारा एक्सेप्ट और रिजेक्ट करने का इंतज़ार नहीं करना चाहती थी”

खुद प्रकाशन करने के विचार से शर्मा याद करती हैं कि वह अपनी कहानी किस तरह से चाहती थीं। “मैंने खुद प्रकाशन इसलिए किया क्यूंकि मुझे पता था की अन्य प्रकाशकों के पढ़ने तक का इंतज़ार करना पड़ता। फिर अंत में वे फैसला लेते। मैं इतना इंतज़ार नहीं करना चाहती थी”।

“मार्केटिंग की तकनीक एक दोस्त से सीखी”

शर्मा ने मार्केटिंग तकनीक भी स्वयं ही सीखी। “मैं मार्केटिंग और प्रचार से जो भी सीख सकती थी, वह सब सीखा। ठीक ऐसे ही, मैंने अमेज़न पर एक अकाउंट खोला। इसी तरह से यह सब शुरू हुआ”।

“माउथ पब्लिसिटी ने बहुत काम किया”

शर्मा ने अभी तक ३ किताबें लिखीं हैं। उन्हें मालूम था की सोशल मीडिया उनकी संख्या और पहुँच बढ़ाने में मदद करेगा। “मुझे पता था की लोग कहानी तब ही पसंद करेंगे जब वे उससे किसी तरह से जुड़ पाएंगे। शर्मा मानती हैं कि खुद के लिए एक कहानी लिखना ज़रूरी है। लेकिन पड़ने वालों को भी अर्थ समझ आना चाहिए”।

बड़े पैमाने पर पढ़ना बेहद जरुरी है

शर्मा ने आत्मविश्वास और दृण विश्वास के कारण अपना लेखन का सपना पूरा किया। और यही उनके लेकिन में महत्वपूर्ण है।

“अगर आज आपने कुछ लिखा है तो उसे कुछ दिनों बाद पढ़िए और अगर तब भी आप उससे जुड़ा हुआ महसूस करते हैं तो उससे जारी रखिये”।

जब श्रोताओं ने शर्मा से पूछा कि अपने ही लेखन का न्याय कैसे करना चाहिए, उन्होंने कहा की यह सब वक़्त की बात है। उन्होंने समझाया कि कैसे अपने काम का विश्लेषण करना ज़रूरी है।

पढ़िए: ५ दलित लेखिकाएं जिनके बारें में आपको पता होना चाहिए

उनका मानना है कि प्रेरणा हमेशा सकरारमक होने के साथ-साथ महत्वपूर्ण भी होती है। उन्होंने कहा मेरी कहानी ने मुझे प्रेरणा दी है, उम्मीद है कि ये अन्य लोगों को भी प्रेरणा देगी”।

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