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जानिये ऐसी 5 बाते जो समाज के लोगो को एक बेटी के जन्म पर नहीं कहनी चाहिए

Published by
Ayushi Jain

किसी भी माता- पिता के लिए बहुत ही सौभाग्य की बात होती है जब उनके घर एक बेटी जन्म लेती है ।वैसे तो बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता है परन्तु बेटियां सौम्य होती है और माता पिता और अपने आस पास के वातावरण से खुद को जल्द ही जुड़ा हुआ महसूस करती है। समाज के लोग किसी भी मुद्दे में एहम भूमिका निभाते है। तो आइये जानते है ऐसी 5  बाते जो समाज के किसी भी व्यक्ति को एक बेटी के जन्म पर नहीं  कहनी चाहिए।

एक लड़की के पैदा होने से परिवार का वंश नहीं बढ़ेगा

लड़का या लड़की जब भी कोई माँ किसी भी बच्चे को जन्म देती है तो उसे उसका बच्चा बहुत अज़ीज़ होता है इसलिए हमे यह कभी नहीं सोचना चाहिए की अगर परिवार में लड़की का जन्म हुआ है तो वंश आगे नहीं बढ़ेगा, इस दुनिया में एक नन्ही सी जान को लाने की बख्शीश कुदरत  ने औरत को बख्शी है तो भला वंश कैसे खत्म हो सकता है बल्कि अब और नई पीडिया आ सकेंगी, हमे इसके लिए कुदरत को धन्यवाद करना चाहिए ।

लडकियां लड़को की बराबरी नहीं कर सकती

दुनिया चाँद तक पहुँच गई पर फिर भी हम यह नहीं समझ पाते की चाहे वो लड़का हो या लड़की हर कोई अपनी किस्मत और अपना वजूद लेकर इस दुनिया में आता है, हम क्यों भूल जाते है की ऐसा कोई क्षेत्र नहीं है जिसमे लड़कियों ने अपनी प्रतिभा का जलवा न दिखाया हो । ऐसा कोई कार्य नहीं है जो लड़किया न कर सकती हो । वो हर शेता में अपनी पहचान बना चुकी हैं।

एक दिन इसे अपने घर जाना है

भारतीय समाज में लड़कियों की शादी एक बहुत ही बड़ा मुद्दा है जिसकी बाते लड़कियों के जन्म से ही शुरू हो जाती है। हमे यह क्यों नहीं समझते  की लड़कियों की खुद की इच्छा भी मायने रखती है। शादी से पहले लड़कियों को यह कहा जाता है की उन्हें एक दिन अपने घर जाना है और शादी के बाद की वो पराये घर से आयी है । क्या उनकी खुद की कोई पहचान कोई वजूद नहीं ? ऐसा भेदभाव क्यों होता है लड़कीओ के साथ ? उन्हें कितना महसूस होगा ।

बेटी बोझ है

हम सब आजकल के इस नए युग में भक्ति भांति इस बात को जानते है की आजकल की लडकियां पढ़ाई – लिखाई, खेल-कूद सभी में सक्षम है ।वह अब किसी भी तरीके से बोज नहीं है वो अपने घर को संभालती तो है ही परन्तु साथ ही साथ अपने कमाकर अपना और अपने परिवार का पेट भी भर सकती है । आजकल की लड़की को किसी की जरूरत नहीं है, वह खुद में बहुत सक्षम है । उसे अपने पैरों पे खड़ा होना आता है , वह किसी के सहारे की मोहताज नहीं।अगर वो संसार का निर्माण कर सकती है तो अपने आपको भी संभाल सकती है ।

गुलाबी चीज़ें खरीदनी शुरू कर दो

उसके जीवन की शुरुआत केवल गुलाबी खिलोनो से न करे, अपनी बेटी को यह न सोचने पे मजबूर करे की गुलाबी ही उसका मनपसंद रंग है “क्योंकि यही लड़कियों को पसंद है।” वास्तव में, शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि काफी सारे अन्य सामाजिक कारक बच्चों को लिंग-विशिष्ट खिलौने भेंट करते हैं, जिससे की उनके पालन और सोच पर असर पड़ता है।

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