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टाइपिस्ट से बिलियर्ड्स चैंपियन बनी: रेवन्ना उमादेवी से मिलें

Published by
Farah

बिलियर्ड्स चैंपियन रेवन्ना उमादेवी नागराज 2017 की नारी शक्ति पुरस्कार विजेता है. खेल के साथ उमादेवी का रिश्ता 1989 में जुड़ा जब वह कर्नाटक में बागवानी विभाग में एक टाइपिस्ट के रूप में आयी. वह तब 23 वर्ष की थी. SheThePeople.TV  ने रेवान्ना उमादेवी से बातचीत की ताकि उनके बारे में जान सकें.

वह SheThePeople.TV से कहती है, “हमारा कार्यालय लालबाग, बैंगलोर में था, जहां मैं बड़ी हुई. कभी-कभी हम देर रात तक कार्यालय में रहते थे. मैं टेबल टेनिस खेलने के लिए कर्नाटक सरकार के सचिवालय क्लब में जाती थी. वहां मैं हमेशा हरे रंग की मेज और रंगीन गेंदों पर नज़र लगाती थी. जल्द ही मैंने अभ्यास करना शुरू कर दिया और बिलियर्ड्स खेलने का आनंद लेने लगी. बाद में मैं कर्नाटक राज्य बिलियर्ड्स एसोसिएशन की सदस्य बन गयी. इसे “क्यू स्पोर्ट्स का मक्का” भी कहा जाता है. मुझे वातावरण पसंद था क्योंकि मैं घंटों अभ्यास कर सकती थी. जब मैं 1996 में स्नूकर में राज्य में नंबर 3 बन गयी, बिलियर्ड्स में नेशनल नं 3, तब मुझे रैंकिंग ने आगे खेलने के लिये प्रेरित किया.”

जब पूछा गया कि उन्हें बिलियर्ड्स की तरफ कौन सी चीज़ खिचती है तो उन्होंने कहा, “चुनौतियां.”

उमादेवी कहती हैं, “बाधाएं मुझे मेरे सपनों की तरफ ले जाती हैं. मैं कभी भी किसी भी चुनौती से दूर नहीं भागी. जब मैं कई बार टूर्नामेंट जीत गई तब भी मुझे बहुत महत्व नहीं मिल रहा था, शायद क्योंकि मैं एक सामान्य टाइपिस्ट थी और मैं अंग्रेजी नही बोल पाती थी. इन सभी सालों में मैंने बिलियर्ड्स पर ध्यान रखा तब भी जब मैं ठीक नही थी. आज, बिलियर्ड्स मेरा ख्याल रख रहा हैं. यह आश्चर्यजनक है।”

उनकी यात्रा आसान नही थी

इस यात्रा में उमादेवी के लिए मुश्किले कम नही थी. वह अपने परिवार की परिस्थितियों के कारण कॉलेज के बाद अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सकी और उन्हें अपने पिता की लूम फैक्ट्री में काम करना शुरू कर दिया और शाम को टाइपिंग की क्लासेस में जाने लगी. “इन सभी सालों में, जब मैं खराब आकार में थी तब भी मैंने बिलियर्ड्स का ख्याल रखा। आज, बिलियर्ड्स मेरा ख्याल रखता हैं ”

तो उन्होंने खेल में कैसे कदम रखा? उमादेवी ने समझाया, “शुरुआत में मुझे किसी तरह का सहयोग नही मिला लेकिन जब मैंने चैम्पियनशिप जीतना शुरू किया, तो धीरे-धीरे मेरा परिवार मेरे साथ आ गया.”

“इन सभी सालों में, जब मैं खराब आकार में थी तब भी मैंने बिलियर्ड्स का ख्याल रखा। आज, बिलियर्ड्स मेरा ख्याल रखता हैं ” – रेवन्ना उमादेवी

इसके अलावा, वह आगे कहती है, “2010 में मेरे पति ने मुझे अपने सपने पूरे करने के लिये कहा. 2010 में मुझे सीरिया में वर्ल्ड स्नूकर चैंपियनशिप खेलना था, लेकिन पैसों की वजह से मुझे उसे छोड़ना पड़ा. कुछ वित्तीय बाधाओं के कारण मैं प्रतियोगिता के लिए पैसे नही जुटा पाई. उस समय मेरे पति बीजी नागराज ने मुझे स्नूकर वर्ल्ड चैम्पियनशिप में भाग लेने के लिए सीरिया जाने के लिए पैसे दिए. तब से मैं इस क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन कर रही हूं.”

रणनीतियाँ

खेल से पहले उनकी रणनीतियों के बारे में पूछने पर, उमादेवी ने बताती है,  “जब मैं कोई चैंपियनशिप में हार जाती हूं तो मेरी रणनीति और कठिन अभ्यास करने की होती है. मैं सुबह 6.30 बजे उठती हूं और नाश्ता और दोपहर का भोजन तैयार करती हूं. मैं तैयार होती हूं और एक सामान्य सरकारी कर्मचारी की तरह कार्यालय जाती हूं. मैं कार्यालय जाने से पहले और दोपहर के भोजन के दौरान अभ्यास करती हूं. शाम का अभ्यास काफी अधिक उपयोगी होता हैं.”

लक्ष्य

उन्होंने कहा,”मैं युवा खिलाड़ियों को अब अपने लक्ष्यों की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करना चाहती हूं. मैं अपनी जिंदगी के माध्यम से प्रेरित करना चाहती हूँ. हालांकि मुझे बिलियर्ड्स और स्नूकर के बारे में बोलना सीखना होगा. ”

उमादेवी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खेला. उनके अनुसार, “भारत में स्थिरता की कमी है.” उन्होंने दावा किया, “सरकार से हमें जो सुविधाएं मिलती हैं वह सभी तक नहीं पहुंचती है. यह केवल प्रभावशाली व्यक्तियों तक पहुंचती है.”

क्या खेल ने महिलाओं को मुक्त किया है?

उन्होंने कहा कि,”अगर आपको अपने परिवार से सहयोग मिलता है तो यह मुश्किल नहीं है.  महिलाओं के लिए किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए पारिवारिक सहायता सबसे महत्वपूर्ण है.”

उन्होंने दावा किया कि, “जैसे मैंने 29 साल से शुरू किया था. उम्र इस तरह के खेल में निश्चित रूप से कोई मुद्दा नही है. अगर हम चाहते हैं कि हम अपने लिए समय निकालें तो निकाला जा सकता है.”

वह कहती है,”नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करने के बाद, मैंने अपने काम के साथ खेलना जारी रखने का फैसला किया. तो यह इच्छाशक्ति है जो मायने रखती है. ”

बिलियर्ड्स में कोई लिंग असमानता नहीं

बिलियर्ड्स में भेदभाव के लिए कोई गुंजाइश नहीं है. वह कहती है, “मुझे उद्योग के बेहतरीन लोगों ने सिखाया. अगर अरविंद सावर ने मुझे सिखाया नहीं होता तो मैं आज चैंपियन नहीं बनती.  एस जयराज (राष्ट्रीय बिलियर्ड्स टीम के पूर्व कोच) और एमजी जयराम ने मुझे एसोसिएशन में प्रशिक्षित किया. जब भी मैं गलत होती, मेरे बिलियर्ड्स के दोस्त मुझे सही करते. बी भास्कर के साथ प्रेक्टिस करते हुये मैंने दो राष्ट्रीय बिलियर्ड्स चैम्पियनशिप जीती क्योंकि वह मुझे हमेशा प्रोत्साहित करते थे.

तो क्या बात है जो लड़कियों को बिलियर्ड्स को पहले स्थान पर चुनने से रोकती है?

उमादेवी कहती हैं, “स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए यह खेल गंभीरता से लेना मुश्किल है, क्योंकि अध्ययन पहले आते हैं”

“लेकिन स्कूल के वर्षों के दौरान भी, कई जूनियर खिलाड़ी नेशनल चैंपियंस और विश्व चैंपियंस बन गई हैं क्योंकि वे सीधे स्कूल या कॉलेज से आती हैं जहां पर वह कड़ी मेहनत कर सकती हैं.”

कोचिंग देने की योजना है

“मैं अपने जगह पर युवाओं को सिखाने के लिए पिछले एक साल से योजना बना रही हूं. उमादेवी ने कहा, “मेरे पास इंग्लैंड का ब्लैक हार्ट टिप्स टेबल है और कोचिंग मेरी लंबी अवधि की योजना होगी. ”

उभरते खिलाड़ियों के लिए सुझाव

वह कहती है, “कोई भी खेल खुशी और सम्मान के साथ खेला जाता है तो उसके लिये समय देने में कोई बुराई नही है. दैनिक काम के साथ ही, खेल और दूसरी गतिविधियां जरूरी हैं, क्योंकि यह हमारे दिमाग और टीम की भावना को विकसित करती है .”

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