ब्लॉग

मैं अभी भी इस उम्र में क्यों तैरती हूं? क्योंकि प्रसिद्धी नशे की तरह है: रिचा मिश्रा

Published by
Farah

दिल्ली की रिचा मिश्रा ने तैराकी के नेशनल में 1994 में शुरुआत की और 1998 में सीनियर नेशनल में पदक जीता. 1999 में, वह सीआरपीएफ में शामिल हो गईं. तब से वह भारतीय तैराकी में सबसे बड़े नामों में से एक रही है. हाल ही में, उन्होंने 200 व्यक्तिगत मेडली और 400 व्यक्तिगत मेडली में एक स्वर्ण जीता – उन्होंने 11 साल पहले (5:02:86) उनके द्वारा बनाये गये राष्ट्रीय रिकॉर्ड को तोड़ दिया और पांच मिनट की बाधा तोड़ने वाली पहली महिला बन गई (4:59:17 ). पिछले महीने डॉ. बीआर अम्बेडकर इंटरनेशनल एक्वेटिक कॉम्प्लेक्स में, उन्होंने अपने नौ वर्षीय पुराने मीट रिकॉर्ड और 11 साल में किसी भारतीय के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन का रिकॉर्ड बनाया. SheThePeople.TV उनकी यात्रा के बारे में जाना.

रिचा ने SheThePeople.TV के बताया,”मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं इतने लंबे समय तक तैराकी जारी रख सकूंगी. इस उम्र में भी मुझे यह करना इसलिये अच्छा लगता है कि क्योंकि तैराकी मुझे पसंद है और मुझे खेल के जीवन का आनंद मिलता है. यदि अपने जुनून के पीछे भागना और अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना आपको प्रोत्साहित नहीं करता है, तो फिर क्या करेंगा?”

35 वर्षीय रिचा अपने पूर्णकालिक पेशे और जुनून के बीच संतुलन रखती है. मिश्रा केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में काम करती है. 10 बार की राष्ट्रीय चैंपियन ने कहा,”मेरे पिता एक भारोत्तोलक थे, मेरे दादा कबड्डी खेलते थे और मेरे दादा कुश्ती में भी भाग लेते थे. इसलिए खेल हमेशा मेरे खून में था.” उन्होंने सीनियर नेशनलस में 2018 में पांच स्वर्ण पदक जीते.

“यदि अपने जुनून के पीछे भागना और अपने सपनों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करना आपको प्रोत्साहित नहीं करता है, तो फिर क्या करेंगा?” – रिचा मिश्रा

शुरुआत

रिचा ने बताया, “बचपन में मैं अपने पिता के साथ हमारे घर के पास के पूल में जाया करती थी. उस वक्त मैं पांच वर्ष की थी, पानी देखकर उस वक़्त मुझे उसमें कूदने का मन करता था. पूल में कोच ने मेरे पिता को सलाह दी थी कि मुझे सुरक्षा के लिए तैराकी सिखनी चाहिए. इस तरह मैंने शुरूआत की और कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. ”

उन्होंने पेशेवर तरीके से इसे अपनाने का फैसला कैसे किया, उन्होंने कहा, “मैंने अपनी बड़ी बहन चारू मिश्रा की वजह से प्रतिस्पर्धी तैराकी में प्रवेश किया. वह वर्तमान में मेरी कोच है. क्लब प्रतियोगिता में पदक जीतने और नकद पुरस्कार प्राप्त करने के बाद, उन्हें अपनी जीत का आनंद लेता देखा जिससे मुझे यह करने की प्रेरणा मिली और मैं पेशेवर तौर पर तैराकी में आ गई.

आयु कोई बाधा नहीं

“मैं छोटी, महत्वाकांक्षी लड़कियों के लिए एक प्रेरणा बनना चाहता थी. मैं अभी भी इस उम्र में क्यों तैरना चाहती हूं? क्योंकि प्रसिद्धी नशे की तरह है! पदक जीतना एक जुनून बन गया है, और यह मुझे आगे बढ़ने के लिये प्रेरित कर रहा है.”

चुनौतियां

उन्होंने बताया,”सबसे बड़ी चुनौती सर्दियों में ट्रेन करने के लिए पूल मिलना होती है. चूंकि मैं एकमात्र दिल्ली की महिला तैराक हूं जिसने एशियाई खेलों वल्ड चैम्पियनशिप और कई अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लिया और प्रशिक्षण लेना बहुत कठिन होता है. मुझे टॉकटोरा में प्रशिक्षण के लिये लेन नहीं मिलती है. एक खाली जगह प्राप्त करना वहां पर एक कठिन काम है. एक बार जब मैं हालिया नेशनल 2018 से पहले प्रशिक्षण ले रही थी तो मुझे जगह छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था. ”

पारिवारिक के सहयोग के बारे में बात करते हुए, रिचा कहते हैं, “हालांकि मैं निम्न मध्यम वर्ग परिवार में पैदा हुई. लेकिन मेरे माता-पिता दृढ़ता से मेरे साथ खड़े रहे और उन्हें एंकर के रूप में रखने से काफी मदद मिली. मैंने कभी भी समाज में किसी भी तरह की कोई समस्या का सामना नहीं किया. यह समस्या उन लोगों की तरफ से आई जो भारतीय खेल प्राधिकरण में काम करते थें. ”

उन्होंने आगे कहा, “तैराकी में करियर शुरू करना आसान नहीं था. मेरी बहन और मुझे कई वित्तीय समस्याओं का सामना करना पड़ा. हम अपना खेल किट भी नही ले सकते थे. दूसरे बच्चें हमें धमकाते थे और हमारी आर्थिक स्थिती का मज़ाक बनाते थे. लेकिन परिवार के सहयोग की वजह से सब आसान हो गया. हमने अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित किया और जब हमनें जीतना शुरू किया और सीआरपीएफ में शामिल हो गये तो दिन बदल गए. ”

राजीव गांधी स्टेट पुरुस्कार विजेता ने कहा,”मैं अभी भी आर्थिक दिक्क़तों का सामना कर रही हूं. मैं अकेले अपने परिवार का सहयोग कर रही हूं और मुझे जो वेतन मिलता है वह पर्याप्त नहीं है. स्विमिंग किट और कपड़े भी महंगें हैं. जब मैं प्रायोजकों के पास जाती हूं तो वह मेरी उम्र के कारण मदद से इंकार करते हैं, भले ही मैं अभी भी राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ रही हूं. दिल्ली से एकमात्र महिला तैराक होने के नाते जिन्होंने पांच स्वर्ण पदक जीते हैं मुझे काफी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है. शुरुआत करने वाले लोगों की सराहना ज्यादा की जाती है.” राजीव गांधी राज्य के पुरस्कार विजेता ने कहा।

सुविधाएं, आधारभूत संरचना, प्रशंसा जैसी चीज़ों की कमी हमारे देश में है. भारत के सभी प्रकार के खेल के मूल्यांकन के मामले में कमी है.

भविष्य की योजनाएं

मैं जल्द ही तीन महीने के लंबे प्रशिक्षण के लिए अमेरिका जाने के लिए तैयार हूं. मेरी अगली प्रतियोगिता अगले साल शुरू होगी, इसलिए यह समय कठिन प्रशिक्षण का है. आगे के लिये मैंने सोचा है कि मैं निश्चित रूप से उन युवाओं को प्रशिक्षण देना शुरू कर दूंगी जो मेरे अनुभव का फायदा उठा सकें.

तैराकी में कोई लिंग भेदभाव नहीं है

जिनके पास संभावना और प्रतिभा है, उन्हें आसानी से संघ द्वारा सहयोग मिलता है. प्रायोजक अभी भी एक बहस योग्य विषय है लेकिन पे असमानता नहीं हैं.

युवा लड़कियों का भविष्य उज्ज्वल है. संयम और चुनौतियां यहां है, लेकिन कड़ी मेहनत करके और अपने जुनून के पीछे भाग कर आप सब चीज़ों को आसान बना सकते है.

 

Recent Posts

क्यों है सिंधु गंगाधरन महिलाओं के लिए एक इंस्पिरेशन? जानिए ये 11 कारण

अपने 20 साल के लम्बे करियर में सिंधु गंगाधरन ने सोसाइटी की हर नॉर्म को…

47 mins ago

श्रद्धा कपूर के बारे में 10 बातें

1. श्रद्धा कपूर एक भारतीय एक्ट्रेस और सिंगर हैं। वह सबसे लोकप्रिय और भारत में…

2 hours ago

सुष्मिता सेन कैसे करती हैं आज भी हर महिला को इंस्पायर? जानिए ये 12 कारण

फिर चाहे वो अपने करियर को लेकर लिए गए डिसिशन्स हो या फिर मदरहुड को…

2 hours ago

केरल रेप पीड़िता ने दोषी से शादी की अनुमति के लिए SC का रुख किया

केरल की एक बलात्कार पीड़िता ने शनिवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख कर पूर्व कैथोलिक…

4 hours ago

टोक्यो ओलंपिक : पीवी सिंधु सेमीफाइनल में ताई जू से हारी, अब ब्रॉन्ज़ मैडल पाने की करेगी कोशिश

ओलंपिक में भारत के लिए एक दुखद खबर है। भारतीय शटलर पीवी सिंधु ताई त्ज़ु-यिंग…

5 hours ago

वर्क और लाइफ बैलेंस कैसे करें? जाने रुटीन होना क्यों होता है जरुरी?

वर्क और लाइफ बैलेंस - बहुत बार ऐसा होता है जब हम अपने काम में…

5 hours ago

This website uses cookies.