बोर्ड एग्जाम मेन्टल स्ट्रेस  – बोर्ड एग्जाम कैंसिल होने को लेकर काफी लबे समय से चर्चा चल रही है। इस से बच्चों में काफी डर बैठ गया है महामारी से वो पहले से परेशां हैं और उसके बाद अब पेपर को लेकर काफी समय से कुछ भी क्लियर नहीं हो पा रहा है। ऐसे में वो सोच सोच कर परेशां हो चुके हैं। जैसा कि हम सब समझते और जानते हैं बोर्ड़ परीक्षा का महत्व जो कि काफी ज़रूरी है हर एक बच्चे की शिक्षा के सफर के लिए लेकिन क्या वो बच्चे के जीवन से भी जयदा ज़रूरी है ? क्या गवर्नमेंट को इस मुद्दे पे थोड़ी ज़्यादा गोर नहीं करनी चाहिए ? आज देश का हर बच्चा जिस दौर से गुज़र रहा है वो खुद ही जानता है।

1. बच्चो को मेन्टल स्ट्रेस हो रहा है

हर एक बच्चा मानसिक तनाव से गुज़रता है क्योंकि बोर्ड्स का नाम सुनते ही आप बड़े उत्साह से उसके रिजल्ट के बारे में जानना और पूछना पसंद करते हैं और हर बच्चा भी इन कक्षाओं में ख़ास ध्यान लगाकर पड़ता है। एक समय के बाद परीक्षा और रिजल्ट भी आ जाता है लेकिन इस कोरोना काल में ऐसा कब से हो ही नहीं पा रहा है और बच्चो की टेंशन बड़ती ही जा रही है।

2. बच्चों को कंफ्यूशन से हो रही है परेशानी

अब दिन रात सोशल मीडिया पे अफवाह और देशों में बढ़ते कोरोना के केसेस बच्चों को काफी विचलित और राह से भटका रहा है। कुछ बच्चे पूरी तरह से अफवाहों पे विश्वाश कर चुके हैं लेकिन काफी बच्चों को ये कन्फ्यूजन परेशान कर रही है कि आखिर होगे भी एग्जाम या नहीं और अगर हाँ तो आखिर कैसे और कब  12 वी कक्षा के आगे बड़ पाएंगे।

3. बच्चों के मन में क्या बात आने लगी है ?

जैसे कि पिछले 1 डेड साल से हर ज़रुरी से ज़रुरी काम को टाला जा रहा है या सीधा कैंसिल कर दिया जाता है वैसे ही बोर्ड्स क्यों नहीं ? क्या 10 वी और 12 वी के बच्चे बच्चे नहीं हैं ? क्या ये कोई सुपर पावर्स के साथ पैदा हुए थे या इनकी जाने प्यारी नहीं किसी को ऐसे ही हर सवाल का जबाब ढूंढ रहा है हर एक 12 वी का बच्चा आखिर कब तक चलेगा कोरोना का खोफ सिर्फ इनके लिए ही है और प्रीकॉशन्स दुनिया के लिए हैं।

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