हर महिला के लिए, पीरियड्स के दिन चुनौतियों भरे होते हैं। कभी पेट-दर्द, कभी पेट में मरोड़ और कभी मूड स्विंग्स। इन सभी के चलते वो अपने उन दिनों में, कई बार चिड़चिड़ी भी हो जाती हैं और जल्दी गुस्सा करने लगती है। महिलाओ के आम दिन का व्यवहार भी इससे काफ़ी प्रभावित हो जाता है।

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शादी से पहले, अक्सर लड़कियां पीरियड्स से जुड़ी अपनी सारी दिक्कतें माँ/बहन को जाकर कह देती है। और उनको बदले में मिलता है, एक ठोस मानसिक सपोर्ट। पर शादी के बाद, कई बार ऐसा देखा गया है कि लड़कियां पीरियड्स की शर्म और हीन-भावना के कारण, अपने मूड स्विंग्स और पीरियड्स से जुड़ी तमाम परेशानियों को लेकर किसी से कुछ नहीं कह पाती और परेशान हो जाती है। इसी कारण तमाम तरह के प्रश्न भी उनको घेर लेते है।  यहाँ तक की, कुछ महिलाएँ, इन सब के चलते खुद को डिप्रेशन में झोंक देती है। जो की बिल्कुल भी ठीक नहीं है। मानसिक तनाव और फिर डिप्रेशन, जैसे बड़े-बड़े रोग और कारण के चलते वे पीरियड्स से जुड़ी परेशानियाँ किसी को नहीं बता पाती।

पार्टनर के साथ करें पीरियड्स पर चर्चा

  • महिलाओ को ज़रुरत है अपने इन दिनों के बारे में अपने पार्टनर से खुल के बात करने की ताकि जब भी अगली बार mood swing के कारण मन खराब  लगे, तो पार्टनर से मेंटल सपोर्ट मिल सके।
  • इन बातों को अपने पार्टनर के साथ बाँटने से आप दोनों के बीच के रिश्ते और मजबूत बनेंगे। और साथ ही आप दोनों का एक दूसरे के लिए विश्वास भी बढ़ेगा।
  • अगर आप इन बातों को अपने पार्टनर के साथ शेयर करेंगी, तो आपके पार्टनर आपको और अच्छे तरीके से जान पाएंगे।
  • ऐसी बातें पार्टनर से करने के बाद आप अपने अंदर की हीन-भावना को कई हद तक कम कर पायेंगी। और खुद को मेंटल प्रेशर से बचा लेंगी।

‘पीरियड्स’ किसी भी तरह से ऐसा विषय नहीं है जिससे आप हीन-भावना का शिकार बनें। जैसे शरीर सांस लेता है, भोजन ग्रहण करता है, ठीक उसी तरह, पीरियड्स हर महिला के शरीर में होने वाली सामान्य प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया, केवल औरत से जुड़ी होने के कारण, इसको घिन या शर्म का विषय बना देना। आप बिना किसी संकोच के, अपने पार्टनर से इस बारे में बात करें,और इस हीन भावना को कभी भी अपने अंदर न आने दे।

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